Desi Ghee Remedies: सालों से देसी घी को वजन बढ़ाने वाला मानकर लोग इससे दूरी बनाते रहे हैं। लेकिन अब सेलेब्रिटी और हेल्थ एक्सपर्ट्स खुलकर कह रहे हैं कि घी को लेकर हमारी सोच ही गलत है। न्यूट्रिशनिस्ट भी यही बात कहते हैं कि देसी घी सही मात्रा में लिया जाए तो यह सेहत के लिए काफी अच्छा नुस्खा है। बॉलीवुड सितारे हमें याद दिला रहे हैं कि हमारी दादी-नानी के नुस्खे आज भी मॉडर्न डाइट प्लान्स पर भारी हैं।
सुपरस्टार्स मान रहे देसी घी को सुपरफूड
अदिति राव हैदरी ने कॉमेडियन कपिल शर्मा के शो में कहा कि उन्हें देसी घी बहुत पसंद है। वह इसे कटोरी में लेकर खाती हैं। उन्होंने भारत के घरेलू नुस्खों को सबसे असरदार बताया। शो की जज अर्चना पूरन सिंह ने कहा कि देसी घी को बेकार में ही बदनाम किया जाता है। उनका मानना है कि बहुत कम लोग यह समझते हैं कि देसी घी अपने आप वजन नहीं बढ़ाता।
नवजोत सिंह सिद्धू ने भी सुबह की दिनचर्या में घी को बेहद अहम बताया। उनका कहना है कि अगर दिन की शुरुआत हल्दी और देसी घी से की जाए और उसके बाद कुछ समय तक कुछ न खाया जाए तो शरीर सबसे पहले फैट बर्न करता है। लेकिन अगर सुबह सबसे पहले मीठी चाय पी ली जाए तो शरीर और ज्यादा शुगर और भारी खाने की मांग करने लगता है।
डाइटीशियन क्या कहती हैं घी और वजन पर
केआईएमएस हॉस्पिटल्स की चीफ डाइटीशियन अमरीन शेख ने बताया कि वजन बढ़ना किसी एक चीज से नहीं बल्कि ज्यादा कैलोरी और गलत डाइट से होता है। सीमित मात्रा में लिया गया देसी घी वजन बढ़ाने की वजह नहीं बनता बल्कि पेट भरा हुआ महसूस कराने और पाचन सुधारने में मदद करता है।
कितना और कैसे खाएं
एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए दिन में एक से दो छोटी चम्मच देसी घी काफी होती है। समस्या तब होती है जब लोग बिना नापे घी डालने लगते हैं और साथ में रिफाइंड और भारी खाना खाते हैं। यही वजह है कि घी को वजन बढ़ाने वाला मान लिया गया है। कोलेस्ट्रॉल या दिल से जुड़ी समस्या वालों को घी का सेवन कम करना चाहिए।
देसी घी में छुपा पोषण
- देसी घी में विटामिन ए डी ई और के पाए जाते हैं।
- इसमें ब्यूटिरेट जैसे शॉर्ट चेन फैटी एसिड होते हैं जो गट हेल्थ को बेहतर बनाते हैं।
- देसी घी पाचन तंत्र को सपोर्ट करता है।
- दूध से एलर्जी वाले लोगों के लिए यह पचाने में आसान होता है।
- घी में केसिन भी नहीं होता।
- यह मक्खन की तुलना में जल्दी पच जाता है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


