उत्तर-पूर्वी बिहार के सीमांचल क्षेत्र में सड़क संपर्क को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना की घोषणा की गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने पश्चिम बंगाल के रायगंज से बिहार के बारसोई होते हुए किशनगंज के मोर गांव तक एक हाई-स्पीड कॉरिडोर सड़क विकसित करने की योजना बनाई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 3 फरवरी 2026 को आधिकारिक आदेश संख्या 62030/1/2025-26 डीपीआर/एमके/बीएसपीएल/02/1507 जारी किया गया। इसके तहत, हरियाणा के गुरुग्राम स्थित एक निर्माण कंपनी को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया है। केंद्र सरकार ने इस सर्वेक्षण और डीपीआर तैयारी के लिए 1.84 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। वाणिज्यिक परिवहन को मिलेगा बढ़ावा डीपीआर में मुख्य रूप से बारसोई से किशनगंज के मोर गांव तक के मार्ग को शामिल किया जाएगा, जबकि रायगंज-बारसोई खंड के लिए अलग से डीपीआर तैयार किया गया है। यह हाई-स्पीड कॉरिडोर उत्तरी बंगाल और पूर्वी बिहार को सीधे जोड़ेगा, जिससे यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी और वाणिज्यिक परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। इस परियोजना से बिहार के सीमांचल क्षेत्र को विशेष लाभ होगा। किशनगंज, बारसोई और आसपास के इलाकों में यातायात सुगम होगा, जिससे व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह कॉरिडोर न केवल दूरी और समय की बचत करेगा, बल्कि बारसोई, रायगंज और किशनगंज के समग्र विकास को गति देगा। 53 गांवों से होकर गुजरेगा कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे लगभग 72 किलोमीटर लंबा होगा और 53 गांवों से होकर गुजरेगा, जिससे रियल एस्टेट और अन्य आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी। यह परियोजना बंगाल और बिहार के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करेगी, जिससे दोनों राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास की नई लहर आएगी। एनएचएआई की टीम ने सर्वेक्षण और मिट्टी परीक्षण का काम शुरू कर दिया है, और डीपीआर पूरा होने के बाद निर्माण कार्य की रूपरेखा स्पष्ट हो जाएगी। उत्तर-पूर्वी बिहार के सीमांचल क्षेत्र में सड़क संपर्क को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना की घोषणा की गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने पश्चिम बंगाल के रायगंज से बिहार के बारसोई होते हुए किशनगंज के मोर गांव तक एक हाई-स्पीड कॉरिडोर सड़क विकसित करने की योजना बनाई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 3 फरवरी 2026 को आधिकारिक आदेश संख्या 62030/1/2025-26 डीपीआर/एमके/बीएसपीएल/02/1507 जारी किया गया। इसके तहत, हरियाणा के गुरुग्राम स्थित एक निर्माण कंपनी को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया है। केंद्र सरकार ने इस सर्वेक्षण और डीपीआर तैयारी के लिए 1.84 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। वाणिज्यिक परिवहन को मिलेगा बढ़ावा डीपीआर में मुख्य रूप से बारसोई से किशनगंज के मोर गांव तक के मार्ग को शामिल किया जाएगा, जबकि रायगंज-बारसोई खंड के लिए अलग से डीपीआर तैयार किया गया है। यह हाई-स्पीड कॉरिडोर उत्तरी बंगाल और पूर्वी बिहार को सीधे जोड़ेगा, जिससे यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी और वाणिज्यिक परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। इस परियोजना से बिहार के सीमांचल क्षेत्र को विशेष लाभ होगा। किशनगंज, बारसोई और आसपास के इलाकों में यातायात सुगम होगा, जिससे व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह कॉरिडोर न केवल दूरी और समय की बचत करेगा, बल्कि बारसोई, रायगंज और किशनगंज के समग्र विकास को गति देगा। 53 गांवों से होकर गुजरेगा कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे लगभग 72 किलोमीटर लंबा होगा और 53 गांवों से होकर गुजरेगा, जिससे रियल एस्टेट और अन्य आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी। यह परियोजना बंगाल और बिहार के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करेगी, जिससे दोनों राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास की नई लहर आएगी। एनएचएआई की टीम ने सर्वेक्षण और मिट्टी परीक्षण का काम शुरू कर दिया है, और डीपीआर पूरा होने के बाद निर्माण कार्य की रूपरेखा स्पष्ट हो जाएगी।


