ब्रह्म दत्त द्विवेदी पुण्यतिथि: भाजपा का वो शेर, जिसने मायावती को दी थी नई जिंदगी, जानिए पूरा किस्सा

ब्रह्म दत्त द्विवेदी पुण्यतिथि: भाजपा का वो शेर, जिसने मायावती को दी थी नई जिंदगी, जानिए पूरा किस्सा

1995 की बात है। 2 जून को लखनऊ का मीराबाई मार्ग गेस्ट हाउस रणक्षेत्र बन गया जब मायावती ने तय किया कि दिसंबर 1993 से चली आ रही सपा-बसपा गठबंधन सरकार से बाहर निकलेंगी। इसके बाद भीड़ ने उस गेस्ट हाउस का घेराव किया, जहां मायावती ठहरी थीं। मायावती ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। बाहर कथित सपा कार्यकर्ता घूमते रहे।

फर्रुखाबाद से तत्कालीन भाजपा विधायक ब्रह्म दत्त द्विवेदी बगल की इमारत में ठहरे थे। वह अपनी जान की परवाह किए बिना ढाल बनकर खड़े हो गए। घटना के तुरंत बाद उन्होंने वाजपेयी से संपर्क किया। उनकी सलाह पर भाजपा ने मायावती को गवर्नर हाउस तक पहुंचाया और उनकी पार्टी को समर्थन दिया। अगली सुबह उन्होंने सीएम पद की शपथ ली।

सूत्रों के कहाना है कि उस घटना के बाद से मायावती ने द्विवेदी को बहुत सम्मान दिया। एक बार तो यह भी कहा कि अगर बसपा यूपी में भाजपा के साथ गठबंधन सरकार बनाती है तो आधे कार्यकाल (ढाई साल) के लिए केवल द्विवेदी को मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार करेंगी। आखिरकार, भाजपा द्वारा उनकी पसंद पर अड़े रहने के बाद उन्होंने कल्याण सिंह को सीएम के रूप में स्वीकार कर लिया।

जनसंघ से शुरू हुआ सफर

ब्रह्मदत्त द्विवेदी का राजनीतिक सफर विचारधारा से शुरू हुआ था। वे आजीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता रहे। राजनीति में उनकी शुरुआत जनसंघ से हुई। 1971 में वे फर्रुखाबाद नगर पालिका परिषद में पार्षद बने। बाद में वे उसी बोर्ड के उपाध्यक्ष भी चुने गए।

1977 में जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में वे पहली बार विधायक बने। इसके बाद उन्होंने कई बार विधानसभा का चुनाव जीता और यूपी की राजनीति में मजबूत पहचान बनाई। कल्याण सिंह सरकार (1991-92) में उन्होंने राजस्व और ऊर्जा मंत्री के रूप में भी काम किया। उनके संगठन कौशल और सादगीपूर्ण व्यक्तित्व की वजह से वे बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के बेहद करीब माने जाते थे।

वो हत्या जिसने अटल-आडवाणी को झकझोर दिया

10 फरवरी 1997 को फर्रुखाबाद में जब द्विवेदी एक तिलक समारोह से लौट रहे थे, तब गैंगस्टर संजीव माहेश्वरी जीवा ने उनकी हत्या कर दी। यह भाजपा के लिए एक अपूर्णीय क्षति थी। उनकी अंतिम यात्रा में अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे दिग्गज शामिल हुए थे। वाजपेयी जी तो उनके पैतृक गांव अमृतपुर तक गए थे।

‘धर्म भाई’ के जाने पर छलके थे मायावती के आंसू

ब्रह्म दत्त द्विवेदी की हत्या के बाद एक ऐसी तस्वीर सामने आई जो भारतीय राजनीति में दुर्लभ थी। मायावती, जो अपने सख्त स्वभाव के लिए जानी जाती हैं, द्विवेदी के निधन पर इमोशनल हो गई थीं। उन्होंने कभी उनके खिलाफ अपना प्रत्याशी नहीं उतारा और हमेशा उनके परिवार का सम्मान किया।

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