सरकारी स्कूलों में संचालित मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएम) में हो रही अनियमितताओं पर लगाम लगाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। योजना निदेशक विनायक मिश्र ने हाल ही में उठाए गए कदम से साफ संकेत दिया है कि अब किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामला तब सामने आया जब कई स्कूलों की ओर से रात 12 बजे के बाद भी एमडीएम से लाभान्वित विद्यार्थियों का विवरण ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा था। यह व्यवस्था तब और संदिग्ध हो जाती है। जबकि बच्चों को दोपहर 12 से 1 बजे के बीच ही भोजन परोसा जाता है। डीपीओ का सख्त निर्देश इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए योजना निदेशक ने एमडीएम डीपीओ को पत्र भेजकर सभी प्राचार्यों को सख्त हिदायत दी है। एमडीएम डीपीओ अंशु कुमारी ने स्पष्ट किया कि जिले के सभी प्रारंभिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया गया है कि हर हाल में शाम 4 बजे तक ही आंकड़े पोर्टल पर दर्ज करें। एमडीएम बीआरपी को इसकी नियमित निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले प्राचार्य और बीआरपी दोनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। भारत सरकार करती है आंकड़े निरस्त डीपीएम जीतेंद्र कुमार ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि रात 12 बजे के बाद दर्ज किए गए आंकड़ों को भारत सरकार निरस्त कर देती है। ऐसे में प्राचार्यों की यह लापरवाही न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि योजना के क्रियान्वयन में भी बाधा उत्पन्न करती है। उन्होंने प्राचार्यों से अपील करते हुए कहा कि यदि रिपोर्ट दर्ज करने में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या आती है, तो तुरंत जिला कार्यालय को सूचित करें ताकि समाधान किया जा सके। टैबलेट से उपस्थिति, फोटो अपलोड अनिवार्य योजना में पारदर्शिता लाने के लिए अब ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर छात्रों की तस्वीर, नामांकन और उपस्थिति अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। जिले के सरकारी स्कूलों में टैबलेट के माध्यम से बच्चों की उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था शुरू की गई है। यह डिजिटल पहल फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाने में कारगर साबित हो रही है। इस कड़े रुख का परिणाम भी सामने आया है। फर्जी नामांकन पर काफी हद तक रोक लगी है और पिछले एक साल में एमडीएम से लाभान्वित होने वाले वास्तविक बच्चों की संख्या 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ी है। बच्चों के हक पर कोई समझौता नहीं जिला शिक्षा पदाधिकारी आनंद विजय ने कड़े शब्दों में कहा कि विद्यालयों में बच्चों को उनके अधिकारों से वंचित करने वाले चाहे कोई भी हो, उन्हें चिह्नित कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पोषण उपलब्ध कराना हमारी पहली प्राथमिकता है। मध्याह्न भोजन योजना की समीक्षा जारी रहेगी और गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकारी स्कूलों में संचालित मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएम) में हो रही अनियमितताओं पर लगाम लगाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। योजना निदेशक विनायक मिश्र ने हाल ही में उठाए गए कदम से साफ संकेत दिया है कि अब किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामला तब सामने आया जब कई स्कूलों की ओर से रात 12 बजे के बाद भी एमडीएम से लाभान्वित विद्यार्थियों का विवरण ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा था। यह व्यवस्था तब और संदिग्ध हो जाती है। जबकि बच्चों को दोपहर 12 से 1 बजे के बीच ही भोजन परोसा जाता है। डीपीओ का सख्त निर्देश इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए योजना निदेशक ने एमडीएम डीपीओ को पत्र भेजकर सभी प्राचार्यों को सख्त हिदायत दी है। एमडीएम डीपीओ अंशु कुमारी ने स्पष्ट किया कि जिले के सभी प्रारंभिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया गया है कि हर हाल में शाम 4 बजे तक ही आंकड़े पोर्टल पर दर्ज करें। एमडीएम बीआरपी को इसकी नियमित निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले प्राचार्य और बीआरपी दोनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। भारत सरकार करती है आंकड़े निरस्त डीपीएम जीतेंद्र कुमार ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि रात 12 बजे के बाद दर्ज किए गए आंकड़ों को भारत सरकार निरस्त कर देती है। ऐसे में प्राचार्यों की यह लापरवाही न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि योजना के क्रियान्वयन में भी बाधा उत्पन्न करती है। उन्होंने प्राचार्यों से अपील करते हुए कहा कि यदि रिपोर्ट दर्ज करने में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या आती है, तो तुरंत जिला कार्यालय को सूचित करें ताकि समाधान किया जा सके। टैबलेट से उपस्थिति, फोटो अपलोड अनिवार्य योजना में पारदर्शिता लाने के लिए अब ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर छात्रों की तस्वीर, नामांकन और उपस्थिति अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। जिले के सरकारी स्कूलों में टैबलेट के माध्यम से बच्चों की उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था शुरू की गई है। यह डिजिटल पहल फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाने में कारगर साबित हो रही है। इस कड़े रुख का परिणाम भी सामने आया है। फर्जी नामांकन पर काफी हद तक रोक लगी है और पिछले एक साल में एमडीएम से लाभान्वित होने वाले वास्तविक बच्चों की संख्या 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ी है। बच्चों के हक पर कोई समझौता नहीं जिला शिक्षा पदाधिकारी आनंद विजय ने कड़े शब्दों में कहा कि विद्यालयों में बच्चों को उनके अधिकारों से वंचित करने वाले चाहे कोई भी हो, उन्हें चिह्नित कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पोषण उपलब्ध कराना हमारी पहली प्राथमिकता है। मध्याह्न भोजन योजना की समीक्षा जारी रहेगी और गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।


