9 दिन में हत्या का केस नहीं खोल पाई पुलिस:झांसी में ट्रेन वेंडर की गोली मारकर हत्या की गई थी, गुत्थी सुलझाने में उलझी पुलिस

9 दिन में हत्या का केस नहीं खोल पाई पुलिस:झांसी में ट्रेन वेंडर की गोली मारकर हत्या की गई थी, गुत्थी सुलझाने में उलझी पुलिस

झांसी में ट्रेन वेंडर जगभान कुशवाहा हत्याकांड का 9 दिन बाद भी पुलिस खुलासा नहीं कर पाई है। जिस युवक पर पुलिस को शक है, वह भी पुलिस को लगातार चकमा दे रहा है। गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस 9 दिन बाद भी कोई निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई और खुद ही उलझ गई है। इस वजह से पुलिस धीरे-धीरे इस हत्याकांड के खुलासे से दूर होती जा रही है। इस हत्याकांड को पुलिस शुरूआत से ही हल्के अंदाज में ले रही थी। एक फरवरी की सुबह रेलवे स्टेशन से पुलिया नंबर 9 जाने वाले मार्ग पर हनुमान मंदिर के पास झाड़ियों से जगभान का खून से सना शव बरामद हुआ था। पुलिस इसे हत्या नहीं मान रही थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस को गोली मारकर हत्या की बात माननी पड़ी। पुलिस को जिस युवक पर शक है, वह सुराग लगने से पहले ही चकमा देकर भाग निकला। पुलस ने मध्य प्रदेश से लेकर ललितपुर तक तलाशा, मगर वो हाथ नहीं आया। वहीं, पुलिस हत्या की वजह भी मालूम नहीं कर सकी। लहरगिर्द में लोकेशन मिली थी सीसीटीवी कैमरे और मोबाइल सीडीआर से भी पुलिस को बहुत अधिक मदद नहीं मिली। पुलिस यह भी पता नहीं लगा सकी कि हत्या से चंद घंटे पहले आखिर जगभान किसके साथ और क्यूं लहर गिर्द गया था। किस वजह से उसने अपने घर से दूरी बना ली थी। घर की जगह उसने दूसरा ठिकाना कहां बना लिया था, इस सब सवालों के भी जवाब पुलिस अब तक नहीं तलाश सकी। 9 दिन से भटकने की वजह से पुलिस पस्त पड़ती जा रही है। नवाबाद थाना प्रभारी रवि श्रीवास्तव का कहना है कि जांच चल रही है। जल्द ही खुलासा किया जाएगा। चेन्नई जाने के लिए घर से निकाला था जगभान कुशवाहा (44) पुत्र सरमन ललितपुर के तालबेहट थाना क्षेत्र के तेरई फाटक का रहने वाला था। वह 16 साल से ट्रेन में वेंडर का काम कर रहे थे। वह चेन्नई में रहते थे। कंपनी ने पुलिस वेरिफिकेशन मांगा था। इसलिए वह 28 जनवरी को अपने घर तेरई फाटक आए थे। यहां पुलिस वेरिफिकेशन कराया। 31 जनवरी की रात को उनको झांसी से चेन्नई की ट्रेन पकड़नी थी। इसलिए शाम 4 बजे बेटे राज ने जगभान को बस में बैठाया था। झांसी पहुंचने पर वे अपने चाचा भग्गे के घर पुलिया नंबर 9 मोहल्ले में चले गए। रात को बताया कि चचेरे भाई हेमंत ने स्टेशन छोड़ दिया है। गोली मारकर झाड़ियां में फेंका 31 जनवरी की रात को जगभान की कनपटी में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके बाद शव को पुलिया नंबर 9 से स्टेशन जाने वाले रास्ते पर हनुमान मंदिर के पास झाड़ियों में फेंका गया। 1 फरवरी की सुबह लगभग 9 बजे लोगों ने लाश देखी तो पुलिस को सूचना दी। जांच में जगभान की लाश के पास रोटी, पूड़ी, सब्जी और आधा पाउच शराब मिला। जबकि जेब से आधार कार्ड मिला। पुलिस ने तालबेहट पुलिस को आधार कार्ड भेजा। वहां से पुलिस ने तेरई फाटक प्रधान हीरालाल कुशवाहा को जानकारी दी। परिजनों ने झांसी आकर शव की पहचान की थी। इसके बाद पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया था। 3 महीने बाद घर आया था जगभान को लगभग 30 हजार रुपए सैलेरी मिलती थी। वे हर महीने खाते में पैसे भेज देते थे। इससे घर का खर्च और बच्चों की फीस जमा हो जाती थी। 3 महीने बाद पति दो दिन के लिए घर पर आए थे। अब पता नहीं उनको किसने मार डाला। गांव में जगभान की पत्नी किरन अपने दो बेटे राज (17) और अवियांश (6) और बेटी शिवानी (14) के साथ रहती थी। सास प्रेमबाई भी उनके साथ रहती हैं। छोटा भाई अशोक का परिवार थोड़ी दूर दूसरे मकान में रहता है।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *