परिषद में नीतीश–राबड़ी में जुबानी भिड़ंत:‘ये लड़की कोई काम की नहीं’ : नीतीश, ‘होश में आइए… डुबो दिए, शर्म कीजिए’ : राबड़ी

परिषद में नीतीश–राबड़ी में जुबानी भिड़ंत:‘ये लड़की कोई काम की नहीं’ : नीतीश, ‘होश में आइए… डुबो दिए, शर्म कीजिए’ : राबड़ी

बिहार विधान परिषद में सोमवार को भारी हंगामा हुआ। मुद्दा दरभंगा में छह साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या, ‘नीट’ छात्रा की मौत और बढ़ते अपराध का था। विपक्षी सदस्य इस पर विशेष चर्चा और सरकार से जवाब की मांग कर रहे थे। विपक्ष ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और गृह मंत्री सम्राट चौधरी से इस्तीफे की मांग की। सदन की कार्यवाही महज 35 मिनट ही चल सकी, जिसमें भी लगातार हंगामा होता रहा। इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के बीच तीखी जुबानी भिड़ंत हुई। पेश है कार्यवाही के दौरान कही गई प्रमुख बातें— इसका पति हटा तो इसे सीएम बना दिया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को ‘लड़की’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा—
“ये जो लड़की है, इसका क्या है? इसको कुछ आता है? ई कोई काम की है? इसके पति हट गए, तो कुछ दिन बाद इसी को मुख्यमंत्री बना दिया गया। ई लोग 15 साल तक कुछ काम नहीं किए और आज बोल रहे हैं। ये कोई तरीका है? ई लोग फालतू हैं। इन पर तो एक्शन लिया जाना चाहिए।” नीतीश कुमार ने आगे कहा—
“ये लोग आज तक कुछ किए ही नहीं, तो यहां आकर क्यों खड़े हो रहे हैं? जो लोग पहले सरकार में थे, क्या उन्होंने कोई काम किया? कुछ नहीं किया। जब 2005 में हमारी सरकार आई, तो हमने एक-एक काम किया।” उन्होंने वेल में नारेबाजी कर रहीं तीन महिला विधान पार्षदों की ओर इशारा करते हुए कहा—
“तीन गो बोल रही हैं। बताओ, क्या इन लोगों ने कभी महिलाओं को आगे बढ़ाया? कोई काम किया? कुछ नहीं किया।” विपक्ष चुनावी हार की पीड़ा से मुक्त नहीं हुआ है। जो लोग अपनी बेटी और बहू की सुरक्षा नहीं कर सके, वे आज बिहार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। लानत है।— अशोक चौधरी, मंत्री हर जगह बच्चियों के साथ दुष्कर्म हो रहा है राबड़ी देवी ने मुख्यमंत्री पर पलटवार करते हुए कहा—
“होश में आइए। चुप रहिए। बैठिए। बिहार को डुबो दिए हैं। शर्म कीजिए। इस्तीफा दीजिए।” राबड़ी देवी विपक्षी सदस्यों के साथ लगातार नारे लगाती रहीं—
“मुख्यमंत्री इस्तीफा दो, गृह मंत्री इस्तीफा दो, तानाशाही नहीं चलेगी, अपराधियों को बचाना बंद करो, नीतीश सरकार हाय-हाय।” उन्होंने कहा—
“हर जगह बच्चियों के साथ दुष्कर्म हो रहा है। सरकार सोई हुई है। उसे होश ही नहीं है। सरकार कुछ नहीं बोल रही, इसलिए पुलिस भी कुछ नहीं कर रही। जब से सम्राट चौधरी गृह मंत्री बने हैं, अपराध बहुत बढ़ गया है।” राबड़ी देवी ने अब्दुल बारी सिद्दीकी, सुनील कुमार सिंह, शशि यादव समेत अन्य सदस्यों की मांग का समर्थन किया कि इस मुद्दे पर सदन में तत्काल विशेष चर्चा कराई जाए। परिषद के उपसभापति रामबचन राय ने सदन में शांति बनाए रखने की काफी कोशिश की। वे स्वयं भी आसन से खड़े हुए, लेकिन हंगामा थम नहीं सका। अंततः कार्यवाही को भोजनावकाश तक के लिए स्थगित कर दिया गया। दूसरी पाली में भी करीब 20 मिनट तक हंगामा होता रहा। महिलाओं के प्रति नकारात्मक सोच का बार-बार प्रदर्शन करने वाले मुख्यमंत्री को क्या कहा जाए? उनकी इसी मानसिकता के कारण दुष्कर्म की घटनाओं को बढ़ावा मिलता है।— तेजस्वी यादव, राजद सरकार बोली— 2.31 लाख करोड़ विकास पर खर्च होंगे, लेकिन वेतन-सूद के बाद बचेंगे सिर्फ 1.22 लाख करोड़
प्रदेश सरकार ने कहा है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाई जाएगी। इसका उद्देश्य गांवों के अस्पतालों में डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही राज्य में ‘कुशल कामगार’ तैयार किए जाएंगे। इसके लिए जननायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है। राज्य सरकार के अनुसार, 2026-27 के कुल 3,47,590 करोड़ रुपए के बजट में से 2,31,267 करोड़ रुपए यानी 66.53 प्रतिशत राशि विकास कार्यों पर खर्च की जाएगी। हालांकि वेतन, पेंशन, सूद और कर्ज भुगतान के बाद योजनाओं के लिए केवल 1,22,155 करोड़ रुपए ही उपलब्ध रहेंगे। बिहार विधान परिषद में सोमवार को भारी हंगामा हुआ। मुद्दा दरभंगा में छह साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या, ‘नीट’ छात्रा की मौत और बढ़ते अपराध का था। विपक्षी सदस्य इस पर विशेष चर्चा और सरकार से जवाब की मांग कर रहे थे। विपक्ष ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और गृह मंत्री सम्राट चौधरी से इस्तीफे की मांग की। सदन की कार्यवाही महज 35 मिनट ही चल सकी, जिसमें भी लगातार हंगामा होता रहा। इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के बीच तीखी जुबानी भिड़ंत हुई। पेश है कार्यवाही के दौरान कही गई प्रमुख बातें— इसका पति हटा तो इसे सीएम बना दिया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को ‘लड़की’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा—
“ये जो लड़की है, इसका क्या है? इसको कुछ आता है? ई कोई काम की है? इसके पति हट गए, तो कुछ दिन बाद इसी को मुख्यमंत्री बना दिया गया। ई लोग 15 साल तक कुछ काम नहीं किए और आज बोल रहे हैं। ये कोई तरीका है? ई लोग फालतू हैं। इन पर तो एक्शन लिया जाना चाहिए।” नीतीश कुमार ने आगे कहा—
“ये लोग आज तक कुछ किए ही नहीं, तो यहां आकर क्यों खड़े हो रहे हैं? जो लोग पहले सरकार में थे, क्या उन्होंने कोई काम किया? कुछ नहीं किया। जब 2005 में हमारी सरकार आई, तो हमने एक-एक काम किया।” उन्होंने वेल में नारेबाजी कर रहीं तीन महिला विधान पार्षदों की ओर इशारा करते हुए कहा—
“तीन गो बोल रही हैं। बताओ, क्या इन लोगों ने कभी महिलाओं को आगे बढ़ाया? कोई काम किया? कुछ नहीं किया।” विपक्ष चुनावी हार की पीड़ा से मुक्त नहीं हुआ है। जो लोग अपनी बेटी और बहू की सुरक्षा नहीं कर सके, वे आज बिहार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। लानत है।— अशोक चौधरी, मंत्री हर जगह बच्चियों के साथ दुष्कर्म हो रहा है राबड़ी देवी ने मुख्यमंत्री पर पलटवार करते हुए कहा—
“होश में आइए। चुप रहिए। बैठिए। बिहार को डुबो दिए हैं। शर्म कीजिए। इस्तीफा दीजिए।” राबड़ी देवी विपक्षी सदस्यों के साथ लगातार नारे लगाती रहीं—
“मुख्यमंत्री इस्तीफा दो, गृह मंत्री इस्तीफा दो, तानाशाही नहीं चलेगी, अपराधियों को बचाना बंद करो, नीतीश सरकार हाय-हाय।” उन्होंने कहा—
“हर जगह बच्चियों के साथ दुष्कर्म हो रहा है। सरकार सोई हुई है। उसे होश ही नहीं है। सरकार कुछ नहीं बोल रही, इसलिए पुलिस भी कुछ नहीं कर रही। जब से सम्राट चौधरी गृह मंत्री बने हैं, अपराध बहुत बढ़ गया है।” राबड़ी देवी ने अब्दुल बारी सिद्दीकी, सुनील कुमार सिंह, शशि यादव समेत अन्य सदस्यों की मांग का समर्थन किया कि इस मुद्दे पर सदन में तत्काल विशेष चर्चा कराई जाए। परिषद के उपसभापति रामबचन राय ने सदन में शांति बनाए रखने की काफी कोशिश की। वे स्वयं भी आसन से खड़े हुए, लेकिन हंगामा थम नहीं सका। अंततः कार्यवाही को भोजनावकाश तक के लिए स्थगित कर दिया गया। दूसरी पाली में भी करीब 20 मिनट तक हंगामा होता रहा। महिलाओं के प्रति नकारात्मक सोच का बार-बार प्रदर्शन करने वाले मुख्यमंत्री को क्या कहा जाए? उनकी इसी मानसिकता के कारण दुष्कर्म की घटनाओं को बढ़ावा मिलता है।— तेजस्वी यादव, राजद सरकार बोली— 2.31 लाख करोड़ विकास पर खर्च होंगे, लेकिन वेतन-सूद के बाद बचेंगे सिर्फ 1.22 लाख करोड़
प्रदेश सरकार ने कहा है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाई जाएगी। इसका उद्देश्य गांवों के अस्पतालों में डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही राज्य में ‘कुशल कामगार’ तैयार किए जाएंगे। इसके लिए जननायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है। राज्य सरकार के अनुसार, 2026-27 के कुल 3,47,590 करोड़ रुपए के बजट में से 2,31,267 करोड़ रुपए यानी 66.53 प्रतिशत राशि विकास कार्यों पर खर्च की जाएगी। हालांकि वेतन, पेंशन, सूद और कर्ज भुगतान के बाद योजनाओं के लिए केवल 1,22,155 करोड़ रुपए ही उपलब्ध रहेंगे।  

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