पोकरण : जीएलआर व पशुखेली सूखे, कबूतर आबाद और सिस्टम फेल…

फलसूंड तहसील क्षेत्र की स्वामीजी की ढाणी व आंबाणियों की ढाणी में गत 5 माह से जलापूर्ति पूरी तरह से बंद है। ऐसे में ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है तो मवेशी भी पानी के लिए दर-दर भटक रहे है, जबकि जिम्मेदारों का ध्यान अभी तक इस ओर नहीं गया है। गौरतलब है कि फलसूंड तहसील क्षेत्र के स्वामीजी की ढाणी ग्राम पंचायत में आंबाणियों की ढाणी स्थित है। यहां 40 से अधिक परिवार निवास करते है। ढाणी में वर्षों पूर्व जीएलआर व पशुखेली का निर्माण करवाया गया था, जिसे पाइपलाइन से स्वामीजी की ढाणी में निर्मित स्वच्छ जलाशय (एसआर) से जोड़ा गया था। ढाणी में गत कई वर्षों से जलापूर्ति व्यवस्था लडख़ड़ाई हुई है और गत 5 माह से तो जलापूर्ति पूरी तरह से बंद है, जिसके कारण ग्रामीणों को महंगे दामों में ट्रैक्टर टंकियों से पानी खरीदकर मंगवाना पड़ रहा है। ग्रामीणों को मवेशी के लिए पानी की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।

लापरवाही की इंतहा, कबूतरों का लगा डेरा..

जलदाय विभाग के अधिकारियों की लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जीएलआर में कबूतरों ने डेरा जमा लिया है। लंबे समय से जलापूर्ति बंद होने और समय पर जीएलआर की सफाई नहीं किए जाने के कारण कई कबूतरों ने जीएलआर में घौंसले बना दिए है। यही नहीं कबूतरों ने यहां अंडे तक दे दिए है। सूत्रों के अनुसार जीएलआर की हर छह माह में सफाई का नियम है, लेकिन कबूतरों के घौंसले बनाने व अंडे देने से अनुमान लगा सकते है कि आखिरी बार जलापूर्ति व सफाई कब हुई है।

दुर्दशा का दंश

विभाग के अधिकारियों की अनदेखी के कारण जीएलआर व पशुखेली की निर्माण के बाद एक बार भी मरम्मत नहीं की गई है। जिससे क्षतिग्रस्त होने लगे है। जीएलआर व पशुखेली से सीमेंट उखड़ रही है और लोहे के सरिये बाहर नजर आने लगे है। ऐसे में इनके कभी भी ध्वस्त हो जाने का खतरा भी बना हुआ है।

कई बार करवाया अवगत

आंबाणियों की ढाणी में 5 माह से जलापूर्ति पूरी तरह से बंद है। महंगे दामों में पानी खरीदकर मंगवाना पड़ रहा है। जिसको लेकर कई बार अधिकारियों को अवगत भी करवाया है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

  • आरबखां, ग्रामीण

मवेशी हो रहे परेशान

जीएलआर व पशुखेली में जलापूर्ति बंद पड़ी है। ग्रामीण पानी खरीदकर मंगवा रहे है। मवेशी के लिए पानी की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है। जबकि जलापूर्ति सुचारु नहीं की जा रही है।

  • छोटूखां, ग्रामीण

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