खगड़िया में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने और मजदूरों की आजीविका सुरक्षित करने के लिए सरकार ने ‘विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी अधिनियम’ लागू किया है। सोमवार को समाहरणालय सभाकक्ष में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उप विकास आयुक्त (डीडीसी) श्वेता भारती ने इस अधिनियम की विस्तृत जानकारी दी। डीडीसी श्वेता भारती ने बताया कि इस नए अधिनियम के लागू होने से ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड धारकों को अब 125 दिन तक काम मिलने की गारंटी होगी। पहले मनरेगा योजना के तहत मजदूरों को केवल 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया जाता था। रोजगार के दिनों में यह बढ़ोतरी ग्रामीण मजदूरों की आय में वृद्धि करेगी और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाएगी। परिसंपत्तियों का भी निर्माण किया जाएगा
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी कारणवश पात्र लाभार्थियों को तय समय के भीतर काम उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो ऐसे श्रमिकों को बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। यह प्रावधान मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा के साथ-साथ प्रशासनिक जवाबदेही को भी सुनिश्चित करेगा। डीडीसी ने जानकारी दी कि इस अधिनियम के तहत जल सुरक्षा, ग्रामीण आधारभूत संरचना, आजीविका से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर तथा मौसमी आपदाओं और जलवायु परिवर्तन से निपटने वाले कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे न केवल रोजगार का सृजन होगा, बल्कि गांवों में स्थायी और उपयोगी परिसंपत्तियों का भी निर्माण किया जाएगा। संरचनाओं के निर्माण से गांवों की तस्वीर बदलेगी
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल अस्थायी रोजगार उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में दीर्घकालिक विकास को गति देना है। जल संरक्षण, सिंचाई व्यवस्था, सड़क, नाला, तालाब, खेल मैदान और अन्य सार्वजनिक उपयोग की संरचनाओं के निर्माण से गांवों की तस्वीर बदलेगी और स्थानीय लोगों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिलेंगे। खगड़िया में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने और मजदूरों की आजीविका सुरक्षित करने के लिए सरकार ने ‘विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी अधिनियम’ लागू किया है। सोमवार को समाहरणालय सभाकक्ष में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उप विकास आयुक्त (डीडीसी) श्वेता भारती ने इस अधिनियम की विस्तृत जानकारी दी। डीडीसी श्वेता भारती ने बताया कि इस नए अधिनियम के लागू होने से ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड धारकों को अब 125 दिन तक काम मिलने की गारंटी होगी। पहले मनरेगा योजना के तहत मजदूरों को केवल 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया जाता था। रोजगार के दिनों में यह बढ़ोतरी ग्रामीण मजदूरों की आय में वृद्धि करेगी और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाएगी। परिसंपत्तियों का भी निर्माण किया जाएगा
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी कारणवश पात्र लाभार्थियों को तय समय के भीतर काम उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो ऐसे श्रमिकों को बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। यह प्रावधान मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा के साथ-साथ प्रशासनिक जवाबदेही को भी सुनिश्चित करेगा। डीडीसी ने जानकारी दी कि इस अधिनियम के तहत जल सुरक्षा, ग्रामीण आधारभूत संरचना, आजीविका से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर तथा मौसमी आपदाओं और जलवायु परिवर्तन से निपटने वाले कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे न केवल रोजगार का सृजन होगा, बल्कि गांवों में स्थायी और उपयोगी परिसंपत्तियों का भी निर्माण किया जाएगा। संरचनाओं के निर्माण से गांवों की तस्वीर बदलेगी
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल अस्थायी रोजगार उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में दीर्घकालिक विकास को गति देना है। जल संरक्षण, सिंचाई व्यवस्था, सड़क, नाला, तालाब, खेल मैदान और अन्य सार्वजनिक उपयोग की संरचनाओं के निर्माण से गांवों की तस्वीर बदलेगी और स्थानीय लोगों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिलेंगे।


