AI रेस में अमेरिकी टेक कंपनियां विदेशी टैलेंट पर निर्भर, H-1B वीज़ा की मांग तेज

अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में आगे निकलने की होड़ में हैं और इस दौड़ में विदेशी टैलेंट की भूमिका लगातार अहम होती जा रही है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, एआई से जुड़ी नौकरियों के लिए एच-1बी वीज़ा धारकों की मांग तेजी से बढ़ी है, भले ही सरकार विदेशी भर्ती पर सख्ती दिखा रही हो।
बता दें कि फोर्ब्स की एक रिपोर्ट में नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी (NFAP) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025 में अमेज़ॅन, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल और एप्पल द्वारा दायर किए गए नए एच-1बी लेबर कंडीशन एप्लिकेशन में 80 प्रतिशत से अधिक पद एआई से जुड़े रहे हैं। इससे साफ है कि अमेरिकी टेक कंपनियों की एआई रणनीति में विदेशी पेशेवर गहराई से शामिल हैं।
गौरतलब है कि एच-1बी वीज़ा अमेरिका में उच्च कौशल वाले विदेशी पेशेवरों के लिए लंबे समय तक काम करने का एक प्रमुख जरिया है। इस कार्यक्रम के तहत हर साल 65 हजार वीज़ा जारी किए जाते हैं, जबकि अमेरिकी उच्च डिग्रीधारकों के लिए अतिरिक्त 20 हजार वीज़ा का प्रावधान है। मौजूद जानकारी के अनुसार, एआई और संबंधित क्षेत्रों में पढ़ने वाले लगभग 70 प्रतिशत स्नातकोत्तर छात्र अंतरराष्ट्रीय हैं, जो कंपनियों के लिए बड़ा टैलेंट पूल बनते हैं।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अमेज़ॅन, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल  ने एआई और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश की योजना बनाई है। सीएनबीसी  के एक रिपोर्ट के मुताबिक, ये कंपनियां सामूहिक रूप से सैकड़ों अरब डॉलर का पूंजीगत खर्च करने वाली हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां लागत घटाने के लिए नहीं, बल्कि विशेष कौशल के लिए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त कर रही हैं।
हालांकि, दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीतियां चिंता बढ़ा रही हैं। दिसंबर 2025 में एक संघीय अदालत ने नए एच-1बी आवेदनों पर लगाए गए 1 लाख डॉलर शुल्क को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी। इससे कंपनियों पर वित्तीय बोझ बढ़ने की आशंका है। इसके अलावा, लॉटरी सिस्टम की जगह वेतन आधारित चयन प्रणाली और ओपीटी व छात्र वीज़ा नियमों में संभावित बदलाव भी विदेशी टैलेंट के रास्ते को कठिन बना सकते हैं।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ऐसी नीतियों का उल्टा असर हो सकता है। शोध बताते हैं कि विदेशी STEM पेशेवरों ने दशकों तक अमेरिकी उत्पादकता और आर्थिक वृद्धि में बड़ा योगदान दिया है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर विदेशी भर्ती पर जरूरत से ज्यादा रोक लगी, तो कंपनियां नौकरियां अमेरिका से बाहर स्थानांतरित कर सकती हैं, जिससे एआई में अमेरिका की बढ़त कमजोर पड़ सकती है।

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