विदिशा नगर पालिका की बजट बैठक सोमवार को बस स्टैंड स्थित सभागार में हंगामेदार रही। आगामी वित्त वर्ष के लिए 391 करोड़ रुपए का बजट पेश किया गया, जिसमें नगर पालिका प्रशासन ने 16 लाख रुपए के लाभ का दावा किया। हालांकि, बैठक में बजट से अधिक विवादों और पार्षदों के बहिष्कार का बोलबाला रहा। बैठक के दौरान कांग्रेस के दो पार्षदों के साथ भाजपा के कुछ पार्षदों ने भी इसका बहिष्कार किया। कांग्रेस पार्षद बैठक छोड़कर बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके वार्डों में सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट और साफ-सफाई जैसे मूलभूत कार्य नहीं हो रहे हैं। पार्षदों ने बजट बैठक का एजेंडा समय पर न मिलने पर भी नाराजगी व्यक्त की। बताया गया कि 39 में से केवल 19 पार्षदों ने ही एजेंडे को मंजूरी दी। चर्चा के दौरान पार्षदों में धक्का मुक्की
बैठक समाप्त होने के बाद विवाद और गहरा गया। सीएमओ से चर्चा के दौरान पार्षद प्रतिनिधि धर्मेंद्र सक्सेना और कमलेश सूर्यवंशी के बीच तीखी बहस हुई। यह बहस जल्द ही धक्का-मुक्की और गाली-गलौज में बदल गई। मौके पर मौजूद अन्य पार्षदों ने हस्तक्षेप कर स्थिति को शांत किया। धर्मेंद्र सक्सेना ने आरोप लगाया कि कमलेश सूर्यवंशी पहले भी ऐसे विवादों में शामिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक दिन पहले भाजपा कार्यालय में हुई पार्षद दल की बैठक में भी कमलेश ने एक वरिष्ठ पार्षद के साथ अभद्र व्यवहार किया था। सक्सेना के अनुसार, सीएमओ से चर्चा एक सामान्य प्रक्रिया थी, जिसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं थी। सूर्यवंशी ने पैसों की मांग का आरोप लगाया
इसके जवाब में पार्षद प्रतिनिधि कमलेश सूर्यवंशी ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग विकास कार्यों का विरोध करते हैं और कर्मचारियों से पैसों की मांग करते हैं। वहीं, पार्षद प्रतिनिधि चंदू सिंह डांगी ने ठेकेदारों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कई ठेकेदार वार्डों में काम अधूरा छोड़ रहे हैं, जिससे जनता को परेशानी हो रही है। पार्षदों ने नगर पालिका अधिनियम के उल्लंघन, बैठक की सूचना समय पर न देने और जनता से लिए जा रहे टैक्स को वापस लेने की भी मांग की। नगर पालिका की इस बजट बैठक के बाद शहर की सियासत गर्मा गई है और आने वाले समय में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है।


