इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज संभल हिंसा मामले से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रकरण की सुनवाई होगी। यह सुनवाई एएसपी अनुज चौधरी सहित 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एक युवक को गोली मारने के आरोप में एफआईआर दर्ज करने से संबंधित है। न्यायमूर्ति समिति गोपाल की एकल पीठ इस मामले पर सुनवाई करेगी। चंदौसी की सीजेएम कोर्ट ने 9 जनवरी 2026 को तत्कालीन सीओ (वर्तमान एएसपी) अनुज चौधरी और संभल कोतवाली के तत्कालीन इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। यह आदेश घायल आलम के पिता यामीन की याचिका पर दिया गया था। हालांकि, संभल पुलिस ने इस आदेश का पालन करते हुए एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बजाय, पुलिस ने सीजेएम कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए एक रिवीजन याचिका दायर की है, जिस पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। पिछली सुनवाई में, 4 फरवरी को घायल के पिता के अधिवक्ता ने कोर्ट से समय मांगा था। यह मामला 24 नवंबर 2024 को संभल कोतवाली क्षेत्र में एक विवादित धार्मिक स्थल (शाही जामा मस्जिद बनाम श्री हरिहर मंदिर) के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा से जुड़ा है। मौहल्ला नई सराय निवासी आलम पुत्र यामीन ने दावा किया है कि वह उस दौरान मौके पर मौजूद था और पुलिस की तीन गोलियां लगने से घायल हो गया था। उसके पिता ने 6 फरवरी 2025 को सीजेएम कोर्ट में याचिका दाखिल कर 20 पुलिसकर्मियों पर गोली मारने का आरोप लगाया था। सीजेएम कोर्ट के इस आदेश के बाद तत्कालीन सीजेएम विभांशु सुधीर का सुल्तानपुर तबादला हो गया था। इस घटनाक्रम से नाराज अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया था। संभल हिंसा की तस्वीरें देखिए… जानिए क्या है पूरा मामला… आपको बता दें कि 19 नवंबर 2024 को संभल की शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर होने का दावा सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट चंदौसी में पेश किया गया। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन शाम को पहले चरण का सर्वे हुआ और दूसरे चरण का सर्वे 24 नवंबर 2024 को किया गया। हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा हो गए और सर्वे को बाधित करते हुए हिंसा भड़क गई, पुलिस पर पथराव-फायरिंग की गई, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, चर्चित सीओ अनुज चौधरी, डिप्टी कलेक्टर सहित 29 पुलिसकर्मी घायल हुए। संभल कोतवाली एवं थाना नखासा में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क एवं सपा विधायक इक़बाल महमूद के बेटे सुहैल इक़बाल सहित कई लोगों को नामजद करते 2750 से अधिक लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया। जामा मस्जिद के सदर जफर अली एडवोकेट सहित 134 अभियुक्तों को जेल भेज चुकी है जिसमें 3 महिलाएं और संभल हिंसा के मुख्य साजिशकर्ता फरार गैंगस्टर शारिक साठा के तीन गुर्गे मुल्ला अफरोज, वारिस एवं गुलाम भी शामिल है। हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जफर अली को बीती 1 अगस्त 2024 को मुरादाबाद जेल से रिहा कर दिया गया था, 24 मार्च को उन्हें जेल भेजा गया था और 131 दिन के बाद जेल से बाहर आए।


