पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (PMCH) ने बुजुर्ग मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। अब उन्हें इलाज के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अस्पताल ने जेरियाट्रिक (बुजुर्ग चिकित्सा) ओपीडी की व्यवस्था की है, जहां एक ही स्थान पर सभी जांच, परामर्श और इलाज की सुविधा मिलेगी। यह नई व्यवस्था बुजुर्गों को विशेष राहत देगी, जिन्हें पहले एक विभाग से दूसरे विभाग में भटकना पड़ता था। बुजुर्ग मरीजों के लिए समग्र चिकित्सा व्यवस्था जरूरी पीएमसीएच प्रशासन का मानना है कि बढ़ती उम्र के साथ जोड़ों का दर्द, उच्च रक्तचाप (बीपी), मधुमेह और सांस की समस्या जैसी कई बीमारियां एक साथ सक्रिय हो जाती हैं। ऐसे में बुजुर्ग मरीजों के लिए एक समग्र चिकित्सा व्यवस्था का होना जरूरी है। जेरियाट्रिक ओपीडी के तहत मरीजों को एक ही छत के नीचे ये सभी सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उन्हें भटकने और परेशान होने से बचाया जा सकेगा। बुजुर्गों को बेहतर सहूलियत मिले, यही प्रयास- अस्पताल अधीक्षक अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि फिलहाल जेरियाट्रिक ओपीडी मेडिसीन विभाग के तहत संचालित हो रही है। भविष्य में इसके लिए एक अलग वार्ड और समर्पित व्यवस्था बनाई जाएगी। पीएमसीएच प्रशासन के अनुसार, जेरियाट्रिक ओपीडी को और बेहतर बनाने के लिए मेडिसीन, हड्डी रोग, न्यूरोलॉजी, हृदय रोग और यूरोलॉजी सहित अन्य विभागों को भी इससे जोड़ा जाएगा। इस योजना के तहत बुजुर्ग मरीजों को अलग-अलग विभागों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, क्योंकि सभी विभागों के विशेषज्ञ और जांच सुविधाएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। जेरियाट्रिक ओपीडी में बढ़े बुजुर्ग मरीज विभागाध्यक्ष डॉ. अभय कुमार सिन्हा ने बताया कि, जेरियाट्रिक ओपीडी में रोजाना 10 से 15 बुजुर्ग मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। उनके अनुसार, जेरियाट्रिक विभाग को चौथे फेज में विकसित करने की योजना है, लेकिन वर्तमान में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस विभाग के लिए एक अलग वार्ड की व्यवस्था तुरंत जरूरी हो गई है। डॉ. सिन्हा ने अस्पताल अधीक्षक से आग्रह किया है कि जब तक अलग वार्ड तैयार नहीं हो जाता, तब तक मेडिसीन विभाग में कम से कम दस बेड बुजुर्ग मरीजों के लिए आरक्षित किए जाएं। इससे बुजुर्गों को बेहतर इलाज और देखभाल मिल सकेगी। जेरियाट्रिक ओपीडी में आने वाली आम समस्याएं जेरियाट्रिक ओपीडी में आने वाले बुजुर्ग मरीजों में सबसे आम बीमारियां जोड़ों का दर्द, गठिया, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज और सांस की समस्याएं पाई जा रही हैं। कई बुजुर्ग मरीज ऐसे भी होते हैं, जिन्हें एक साथ दो या तीन बीमारियों का इलाज करने की जरूरत होती है। इसलिए, एक समग्र चिकित्सा व्यवस्था की आवश्यकता अधिक महसूस की जा रही थी। इस पहल के बाद, बुजुर्ग मरीजों के लिए इलाज की प्रक्रिया और सरल होगी, और उन्हें बेहतर देखभाल मिलेगी। पीएमसीएच का यह कदम बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए एक अहम बदलाव साबित हो सकता है, जो उनकी जिंदगी को और अधिक आरामदायक और सुविधाजनक बना सकेगा। महत्वपूर्ण पहल से बड़ी राहत
इस पहल से न केवल बुजुर्गों को राहत मिलेगी, बल्कि उनके परिवारों को भी मानसिक शांति मिलेगी, क्योंकि अब उन्हें बुजुर्गों के इलाज के लिए अस्पतालों के दरवाजों पर नहीं भटकना पड़ेगा। पीएमसीएच का यह कदम बुजुर्गों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है, जिससे वे अधिक स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सकेंगे। पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (PMCH) ने बुजुर्ग मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। अब उन्हें इलाज के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अस्पताल ने जेरियाट्रिक (बुजुर्ग चिकित्सा) ओपीडी की व्यवस्था की है, जहां एक ही स्थान पर सभी जांच, परामर्श और इलाज की सुविधा मिलेगी। यह नई व्यवस्था बुजुर्गों को विशेष राहत देगी, जिन्हें पहले एक विभाग से दूसरे विभाग में भटकना पड़ता था। बुजुर्ग मरीजों के लिए समग्र चिकित्सा व्यवस्था जरूरी पीएमसीएच प्रशासन का मानना है कि बढ़ती उम्र के साथ जोड़ों का दर्द, उच्च रक्तचाप (बीपी), मधुमेह और सांस की समस्या जैसी कई बीमारियां एक साथ सक्रिय हो जाती हैं। ऐसे में बुजुर्ग मरीजों के लिए एक समग्र चिकित्सा व्यवस्था का होना जरूरी है। जेरियाट्रिक ओपीडी के तहत मरीजों को एक ही छत के नीचे ये सभी सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उन्हें भटकने और परेशान होने से बचाया जा सकेगा। बुजुर्गों को बेहतर सहूलियत मिले, यही प्रयास- अस्पताल अधीक्षक अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि फिलहाल जेरियाट्रिक ओपीडी मेडिसीन विभाग के तहत संचालित हो रही है। भविष्य में इसके लिए एक अलग वार्ड और समर्पित व्यवस्था बनाई जाएगी। पीएमसीएच प्रशासन के अनुसार, जेरियाट्रिक ओपीडी को और बेहतर बनाने के लिए मेडिसीन, हड्डी रोग, न्यूरोलॉजी, हृदय रोग और यूरोलॉजी सहित अन्य विभागों को भी इससे जोड़ा जाएगा। इस योजना के तहत बुजुर्ग मरीजों को अलग-अलग विभागों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, क्योंकि सभी विभागों के विशेषज्ञ और जांच सुविधाएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। जेरियाट्रिक ओपीडी में बढ़े बुजुर्ग मरीज विभागाध्यक्ष डॉ. अभय कुमार सिन्हा ने बताया कि, जेरियाट्रिक ओपीडी में रोजाना 10 से 15 बुजुर्ग मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। उनके अनुसार, जेरियाट्रिक विभाग को चौथे फेज में विकसित करने की योजना है, लेकिन वर्तमान में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस विभाग के लिए एक अलग वार्ड की व्यवस्था तुरंत जरूरी हो गई है। डॉ. सिन्हा ने अस्पताल अधीक्षक से आग्रह किया है कि जब तक अलग वार्ड तैयार नहीं हो जाता, तब तक मेडिसीन विभाग में कम से कम दस बेड बुजुर्ग मरीजों के लिए आरक्षित किए जाएं। इससे बुजुर्गों को बेहतर इलाज और देखभाल मिल सकेगी। जेरियाट्रिक ओपीडी में आने वाली आम समस्याएं जेरियाट्रिक ओपीडी में आने वाले बुजुर्ग मरीजों में सबसे आम बीमारियां जोड़ों का दर्द, गठिया, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज और सांस की समस्याएं पाई जा रही हैं। कई बुजुर्ग मरीज ऐसे भी होते हैं, जिन्हें एक साथ दो या तीन बीमारियों का इलाज करने की जरूरत होती है। इसलिए, एक समग्र चिकित्सा व्यवस्था की आवश्यकता अधिक महसूस की जा रही थी। इस पहल के बाद, बुजुर्ग मरीजों के लिए इलाज की प्रक्रिया और सरल होगी, और उन्हें बेहतर देखभाल मिलेगी। पीएमसीएच का यह कदम बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए एक अहम बदलाव साबित हो सकता है, जो उनकी जिंदगी को और अधिक आरामदायक और सुविधाजनक बना सकेगा। महत्वपूर्ण पहल से बड़ी राहत
इस पहल से न केवल बुजुर्गों को राहत मिलेगी, बल्कि उनके परिवारों को भी मानसिक शांति मिलेगी, क्योंकि अब उन्हें बुजुर्गों के इलाज के लिए अस्पतालों के दरवाजों पर नहीं भटकना पड़ेगा। पीएमसीएच का यह कदम बुजुर्गों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है, जिससे वे अधिक स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सकेंगे।


