सहरसा में तीन दोस्तों की एक साथ उठी अर्थी:मौत से पहले बेटा बोला- मां, अब हम नहीं बच सकेंगे; नशे से गई जान

सहरसा में तीन दोस्तों की एक साथ उठी अर्थी:मौत से पहले बेटा बोला- मां, अब हम नहीं बच सकेंगे; नशे से गई जान

माई हो…ई का भइल? बेटा क्यों छोड़ गइल? आखिरी बार गोद में लेटकर बोलल, मां अब हम न बच सकब… सन्नी देवल की मां मंगली देवी जब यह कहती हैं, तो उनकी जुबान लड़खड़ा जाती है। वो बात करते-करते रोती है और बार-बार बेहोश हो जाती हैं। होश में आते ही वही एक बात दोहरा रही है। दरअसल, सहरसा का फरेवा गांव में 3 लौंडा डांसर, सन्नी देवल(20), राजा कुमार(20), मुरारी सदा(18) की कीटनाशक दवा पीने से मौत हो गई। तीनों बचपन से दोस्त थे। जहां जाते थे एक साथ जाते थे। रविवार को तीनों दोस्तों का एक ही श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। वहीं, चौथा दोस्त सनोज कुमार(18) 2 दिनों से जिंदगी-मौत से लड़ रहा है। मौत कैसे और कब हुई? अब इन लौंडा डांसर्स का परिवार कैसे चलेगा? चारों डांसर्स की पूरी कहानी…चारों इस दुनिया में कैसे और कब आए? मृतकों की आर्थिक स्थिति क्या थी? इन सारे सवालों का जवाब जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम मृतकों के गांव पहुंची। उनके परिवार और आस-पड़ोस के लोगों से बातचीत की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले गांव की कुछ तस्वीरें देखिए… सबसे पहले जानिए घायल सनोज ने क्या कहा… दैनिक भास्कर की टीम जिला मुख्यालय से 90KM दूर फरेवा गांव पहुंची। वहां पूरे गांव में चीखें गूंज रही थी। तीन लाशें जमीन पर पड़ी थीं। हर किसी की आंखों में आंसू थे। हमने गांववालों से बात करने की कोशिश की, लेकिन उस समय कोई कुछ बोलने को राजी नहीं हुआ। फिर हम घायल सनोज कुमार से मिलने पहुंचे। सनोज से बातचीत की तो उन्होंने बताया, ‘शनिवार की सुबह मैं अपने बचपन के तीन दोस्तों के साथ एक शादी से लौंडा डांस कर लौट रहे थे। कई घंटों तक डांस करने की वजह से हमारे शरीर में तेज दर्द हो रहा था। थकान इतनी थी कि सीधे घर जाने का मन नहीं हुआ। हमने सोचा, क्यों न पहले थोड़ा नशा कर लिया जाए, ताकि शरीर का दर्द भी कम हो जाएगा। हम चारों एक खेत में बैठ गए। वहीं पास की दुकान से डिस्पोजल ग्लास खरीदा। फिर पानी लिया और उसमें कीटनाशक ‘फेराडोल’ मिला दिया। जो दवा एक चम्मच के डोज में लेनी होती है, हम चारों ने करीब तीन-तीन चम्मच पी लिया। शुरू में कुछ नहीं हुआ। हमारी तबीयत बिल्कुल ठीक थी। 2-3 घंटे तक वहां बैठने के बाद दोपहर 12-1 बजे घर भी आराम से पहुंच गए। इसके बाद एक-एक कर हम सभी दोस्तों की तबीयत खराब होने लगी। मैंने मां को आवाज दी। इसी दौरान मुझे उल्टी हुई। मां ने मुझे इस हालत में देखकर चिल्लाना शुरू कर दिया। मुझे लेकर परिवार वाले अस्पताल पहुंचे। मेरे तीनों दोस्तों को भी अस्पताल लाया गया। इसी दौरान मेरे दो दोस्तों मुरारी सदा और राजा कुमार की मौत हो गई। ये सुनते ही मेरे परिवार वाले डर गए।’ गांव वाले अब भी इस मौत से सदमे में हैं घायल सनोज से बात करने के बाद हम गांव में पहुंचे, यहां कुछ बुजुर्गों से मुलाकात हुई। उन्होंने बताया, ‘हमने कभी नहीं देखा कि एक ही सीढ़ी से तीन-तीन अर्थी उठे। यह तो दिल को फाड़ देने वाला मंजर था। कोई विश्वास नहीं कर पा रहा कि जो चार लड़के कल तक गांव को हंसी और मनोरंजन दे रहे थे, आज अचानक मौत की राह पकड़ लेंगे। जिस टोली के बिना गांव का कोई कार्यक्रम पूरा नहीं होता था, आज उसी टोली के सभी सदस्य मिट्टी में मिल गए हैं।’ ‘सन्नी देवल घर का इकलौता कमाने वाला बेटा था’ सन्नी देवल के घर पर चीखें अब भी थम नहीं रही है। उसकी मां मंगली देवी बार-बार बेहोश हो रही हैं। जब होश में आती है तो एक ही वाक्य दोहराती है, माई रे… हमरा सन्नी काहे छोड़ देलक? सन्नी की जिंदगी दुखों से भरी थी। वह चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर था। 15 साल पहले सन्नी के पिता की सड़क हादसे में मौत हो गई। इस दौरान सन्नी सिर्फ 3 साल का था। बड़ा भाई भी 7 साल पहले बीमारी के कारण गुजर गया। ऐसे में परिवार की जिम्मेदारी सन्नी पर आ गई। वह घर का इकलौता कमाऊ सदस्य था। ‘हमारे परिवार को किसी की नजर लग गई’ सन्नी की बड़ी बहन प्रियंका आंखें पोंछते हुए कहती हैं, हम सब बहुत छोटे थे, तब पापा चले गए। सन्नी ही था जो कमाकर घर चलाता था। हरियाणा से अभी तीन महीने पहले ही लौटा था। गांव में भी नटुआ डांस करके कुछ कमा लेता था। पता नहीं परिवार को किसकी नजर लग गई। प्रियंका की आवाज धीरे-धीरे लड़खड़ाने लगती है। वह आगे कहती हैं, अब घर कैसे चलेगा? चूल्हा कैसे जलेगा? मां क्या खाएगी? हमारा भविष्य क्या होगा? अब मेरी शादी कौन और कैसे करेगा? हालांकि, इन सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है। मुरारी सादा हर किसी को बांटता था मुस्कान सन्नी की बहन से बात करने के बाद हम गांव में आगे बढ़े तो हमारी मुलाकात मुरारी के कुछ परिजन से हुई। उन्होंने बताया, मुरारी अपने समूह का सबसे हंसमुख लड़का था। हर समय चेहरे पर मुस्कान रखता था। डांस में अद्भुत ऊर्जा थी। गांव के बड़े-बूढ़े भी कहते हैं, मुरारी का सबसे बड़ा गुण यह था कि वह किसी को रोते देखकर खुद रो पड़ता था और किसी को हंसते देखकर खुद हंस पड़ता था, लेकिन वही मुरारी सबसे दर्दनाक तरीके से तड़प-तड़प कर मर गया। घर के दरवाजे पर आकर गिरा, मुंह से झाग निकल रहा था मृतक मुरारी कुमार की मां सिरजेन देवी ने बताया, उनके दो बेटों में सबसे बड़ा मुरारी था। मुरारी को बचपन से ही नाच गाने का शौक था और अक्सर गांव घर में शादी विवाह समेत अन्य कार्यक्रम में लड़की का ड्रेस पहनकर नाचने जाता था। राजा, सन्नी देवल और सनोज और मुरारी चारों में नाच गाना को लेकर अच्छी दोस्ती थी। शनिवार के सुबह रोज के तरह वो सुबह 8 बजे उठा और बिना कुछ खाए घर से निकल गया। वह दोपहर करीब 1 बजे लड़खड़ाते हुए घर आया और गिर गया। उसको उठाकर देख तो मुंह से झाग निकल रहा था। उसे उठाकर हमलोग नजदीक के अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने उसे खगड़िया ले जाने को कहा, लेकिन रास्ते में मुरारी ने दम तोड़ दिया। ‘मुंह से निकल रहा था झाग’ मुरारी की बड़ी चाची शांति देवी बताती हैं, शनिवार की सुबह वो पहले घर आया। इसके बाद वो बाहर गया और 3-4 घंटे बाद घर लौटा। वो अपने कमरे में सो रहा था। जब मैं उसे देखने के लिए गई तो उसके चेहरे पर थकावट दिख रही थी। मुझे लगा सोने देते हैं, लेकिन थोड़ी देर बाद जोर से चिल्लाने की आवाज आई। मां, बचा लो मां… बचा लो। मैं तुरंत दौड़कर उसके पास पहुंची तो देखा उसके मुंह से झाग निकल रहा था। मुरारी को जल्दबाजी में धाप बाजार के अस्पताल ले जाया गया। वहां से खगड़िया जिला अस्पताल भेजा गया, लेकिन रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। गरीब घर से रहने के कारण मुरारी ने सिर्फ पहली कक्षा तक पढ़ाई की थी। उसके बाद वह पूरी तरह नाच-गाने में लग गया। उसकी मां आज भी समझ नहीं पा रही कि उनके बेटे ने ऐसा कदम क्यों उठाया। राजा दो बेटियों का पिता था राजा की मौत ने उसके परिवार को झकझोर दिया। उसकी पत्नी पिंकी देवी, जिसका अभी तक सुहाग का सिंदूर ताजा था, अब लगातार बेसुध हो जा रहीं हैं। पिंकी की दो बेटियां हैं- एक डेढ़ साल की और एक सिर्फ 8 महीने की है। दोनों लगातार रो रही हैं। शायद वह समझ नहीं पा रही थीं कि आज उनके पिता की गोद क्यों नहीं मिली। ‘मेरा राजा कोई नशा नहीं करता था’ पिंकी कहती हैं, मेरे राजा ने कभी नशा नहीं किया। मैं कसम खाती हूं। वो कभी गलत रास्ते पर नहीं गया। वो तो बस डांस करता था, मेहनत करता था, मजदूरी करता था। तीन महीने पहले ही हरियाणा से लौटा था। हम दोनों ने मिलकर बच्चों का भविष्य बनाने की सोची थी, इसलिए वो लौंडा डांसर बना…लेकिन एक झटके में अब सब खत्म हो गया। राजा की मां अमेरिका देवी रोते हुए कहती हैं, मैंने सोचा था कि बेटा थका होगा। चाय देने गई तो देखा कि वह मोबाइल देख रहा है। फिर गौर से देखा….अरे ई का! मुंह से झाग निकल रहा था। हम चिल्लाने लगे, लोग दौड़े, पर तब तक देर हो चुकी थी। ‘लंबे बाल रख रंग-बिरंगे कपड़े में होते थे तैयार’ फरेवा गांव में नाचने वाले लौंडा डांसर के रूप में मशहूर यह चारों युवक सन्नी देवल, राजा कुमार, मुरारी सादा और सनोज गांव के हर आयोजन की जान थे। किसी के यहां शादी हो, मुंडन हो, सरस्वती पूजा हो या कोई सांस्कृतिक आयोजन इन चारों की टोली जरूर पहुंचती थी। लड़की की तरह लंबा बाल रखना, रंग-बिरंगे कपड़े पहनना और धुन पर झूमकर डांस करना इन्हीं चीजों से उनकी पहचान बनी हुई थी, लेकिन शायद किसी ने नहीं सोचा था कि शोहरत और दोस्ती की यही राह उन्हें अंधेरे की तरफ ले जाएगी, जहां से वापसी की कोई उम्मीद नहीं थी। कॉस्ट्यूम से लेकर मेकअप तक सेट करता था सनोज सनोज के घर भी मातम फैला है। उसकी मां सिर्फ ये दुआ कर रही है कि उसका बेटा अस्पताल से सही सलामत वापस आ जाए। गांव वाले बताते हैं कि सनोज सबसे शांत स्वभाव का है। डांस में उतना आगे नहीं, पर मेहनत और लगन में बाकी सभी से ज्यादा। चारों दोस्तों में उसकी भूमिका मिला-जुलाकर चलने वाली थी। कार्यक्रम कब है, कहां है, कपड़े क्या पहनने हैं, सब तय करता था। माई हो…ई का भइल? बेटा क्यों छोड़ गइल? आखिरी बार गोद में लेटकर बोलल, मां अब हम न बच सकब… सन्नी देवल की मां मंगली देवी जब यह कहती हैं, तो उनकी जुबान लड़खड़ा जाती है। वो बात करते-करते रोती है और बार-बार बेहोश हो जाती हैं। होश में आते ही वही एक बात दोहरा रही है। दरअसल, सहरसा का फरेवा गांव में 3 लौंडा डांसर, सन्नी देवल(20), राजा कुमार(20), मुरारी सदा(18) की कीटनाशक दवा पीने से मौत हो गई। तीनों बचपन से दोस्त थे। जहां जाते थे एक साथ जाते थे। रविवार को तीनों दोस्तों का एक ही श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। वहीं, चौथा दोस्त सनोज कुमार(18) 2 दिनों से जिंदगी-मौत से लड़ रहा है। मौत कैसे और कब हुई? अब इन लौंडा डांसर्स का परिवार कैसे चलेगा? चारों डांसर्स की पूरी कहानी…चारों इस दुनिया में कैसे और कब आए? मृतकों की आर्थिक स्थिति क्या थी? इन सारे सवालों का जवाब जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम मृतकों के गांव पहुंची। उनके परिवार और आस-पड़ोस के लोगों से बातचीत की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले गांव की कुछ तस्वीरें देखिए… सबसे पहले जानिए घायल सनोज ने क्या कहा… दैनिक भास्कर की टीम जिला मुख्यालय से 90KM दूर फरेवा गांव पहुंची। वहां पूरे गांव में चीखें गूंज रही थी। तीन लाशें जमीन पर पड़ी थीं। हर किसी की आंखों में आंसू थे। हमने गांववालों से बात करने की कोशिश की, लेकिन उस समय कोई कुछ बोलने को राजी नहीं हुआ। फिर हम घायल सनोज कुमार से मिलने पहुंचे। सनोज से बातचीत की तो उन्होंने बताया, ‘शनिवार की सुबह मैं अपने बचपन के तीन दोस्तों के साथ एक शादी से लौंडा डांस कर लौट रहे थे। कई घंटों तक डांस करने की वजह से हमारे शरीर में तेज दर्द हो रहा था। थकान इतनी थी कि सीधे घर जाने का मन नहीं हुआ। हमने सोचा, क्यों न पहले थोड़ा नशा कर लिया जाए, ताकि शरीर का दर्द भी कम हो जाएगा। हम चारों एक खेत में बैठ गए। वहीं पास की दुकान से डिस्पोजल ग्लास खरीदा। फिर पानी लिया और उसमें कीटनाशक ‘फेराडोल’ मिला दिया। जो दवा एक चम्मच के डोज में लेनी होती है, हम चारों ने करीब तीन-तीन चम्मच पी लिया। शुरू में कुछ नहीं हुआ। हमारी तबीयत बिल्कुल ठीक थी। 2-3 घंटे तक वहां बैठने के बाद दोपहर 12-1 बजे घर भी आराम से पहुंच गए। इसके बाद एक-एक कर हम सभी दोस्तों की तबीयत खराब होने लगी। मैंने मां को आवाज दी। इसी दौरान मुझे उल्टी हुई। मां ने मुझे इस हालत में देखकर चिल्लाना शुरू कर दिया। मुझे लेकर परिवार वाले अस्पताल पहुंचे। मेरे तीनों दोस्तों को भी अस्पताल लाया गया। इसी दौरान मेरे दो दोस्तों मुरारी सदा और राजा कुमार की मौत हो गई। ये सुनते ही मेरे परिवार वाले डर गए।’ गांव वाले अब भी इस मौत से सदमे में हैं घायल सनोज से बात करने के बाद हम गांव में पहुंचे, यहां कुछ बुजुर्गों से मुलाकात हुई। उन्होंने बताया, ‘हमने कभी नहीं देखा कि एक ही सीढ़ी से तीन-तीन अर्थी उठे। यह तो दिल को फाड़ देने वाला मंजर था। कोई विश्वास नहीं कर पा रहा कि जो चार लड़के कल तक गांव को हंसी और मनोरंजन दे रहे थे, आज अचानक मौत की राह पकड़ लेंगे। जिस टोली के बिना गांव का कोई कार्यक्रम पूरा नहीं होता था, आज उसी टोली के सभी सदस्य मिट्टी में मिल गए हैं।’ ‘सन्नी देवल घर का इकलौता कमाने वाला बेटा था’ सन्नी देवल के घर पर चीखें अब भी थम नहीं रही है। उसकी मां मंगली देवी बार-बार बेहोश हो रही हैं। जब होश में आती है तो एक ही वाक्य दोहराती है, माई रे… हमरा सन्नी काहे छोड़ देलक? सन्नी की जिंदगी दुखों से भरी थी। वह चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर था। 15 साल पहले सन्नी के पिता की सड़क हादसे में मौत हो गई। इस दौरान सन्नी सिर्फ 3 साल का था। बड़ा भाई भी 7 साल पहले बीमारी के कारण गुजर गया। ऐसे में परिवार की जिम्मेदारी सन्नी पर आ गई। वह घर का इकलौता कमाऊ सदस्य था। ‘हमारे परिवार को किसी की नजर लग गई’ सन्नी की बड़ी बहन प्रियंका आंखें पोंछते हुए कहती हैं, हम सब बहुत छोटे थे, तब पापा चले गए। सन्नी ही था जो कमाकर घर चलाता था। हरियाणा से अभी तीन महीने पहले ही लौटा था। गांव में भी नटुआ डांस करके कुछ कमा लेता था। पता नहीं परिवार को किसकी नजर लग गई। प्रियंका की आवाज धीरे-धीरे लड़खड़ाने लगती है। वह आगे कहती हैं, अब घर कैसे चलेगा? चूल्हा कैसे जलेगा? मां क्या खाएगी? हमारा भविष्य क्या होगा? अब मेरी शादी कौन और कैसे करेगा? हालांकि, इन सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है। मुरारी सादा हर किसी को बांटता था मुस्कान सन्नी की बहन से बात करने के बाद हम गांव में आगे बढ़े तो हमारी मुलाकात मुरारी के कुछ परिजन से हुई। उन्होंने बताया, मुरारी अपने समूह का सबसे हंसमुख लड़का था। हर समय चेहरे पर मुस्कान रखता था। डांस में अद्भुत ऊर्जा थी। गांव के बड़े-बूढ़े भी कहते हैं, मुरारी का सबसे बड़ा गुण यह था कि वह किसी को रोते देखकर खुद रो पड़ता था और किसी को हंसते देखकर खुद हंस पड़ता था, लेकिन वही मुरारी सबसे दर्दनाक तरीके से तड़प-तड़प कर मर गया। घर के दरवाजे पर आकर गिरा, मुंह से झाग निकल रहा था मृतक मुरारी कुमार की मां सिरजेन देवी ने बताया, उनके दो बेटों में सबसे बड़ा मुरारी था। मुरारी को बचपन से ही नाच गाने का शौक था और अक्सर गांव घर में शादी विवाह समेत अन्य कार्यक्रम में लड़की का ड्रेस पहनकर नाचने जाता था। राजा, सन्नी देवल और सनोज और मुरारी चारों में नाच गाना को लेकर अच्छी दोस्ती थी। शनिवार के सुबह रोज के तरह वो सुबह 8 बजे उठा और बिना कुछ खाए घर से निकल गया। वह दोपहर करीब 1 बजे लड़खड़ाते हुए घर आया और गिर गया। उसको उठाकर देख तो मुंह से झाग निकल रहा था। उसे उठाकर हमलोग नजदीक के अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने उसे खगड़िया ले जाने को कहा, लेकिन रास्ते में मुरारी ने दम तोड़ दिया। ‘मुंह से निकल रहा था झाग’ मुरारी की बड़ी चाची शांति देवी बताती हैं, शनिवार की सुबह वो पहले घर आया। इसके बाद वो बाहर गया और 3-4 घंटे बाद घर लौटा। वो अपने कमरे में सो रहा था। जब मैं उसे देखने के लिए गई तो उसके चेहरे पर थकावट दिख रही थी। मुझे लगा सोने देते हैं, लेकिन थोड़ी देर बाद जोर से चिल्लाने की आवाज आई। मां, बचा लो मां… बचा लो। मैं तुरंत दौड़कर उसके पास पहुंची तो देखा उसके मुंह से झाग निकल रहा था। मुरारी को जल्दबाजी में धाप बाजार के अस्पताल ले जाया गया। वहां से खगड़िया जिला अस्पताल भेजा गया, लेकिन रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। गरीब घर से रहने के कारण मुरारी ने सिर्फ पहली कक्षा तक पढ़ाई की थी। उसके बाद वह पूरी तरह नाच-गाने में लग गया। उसकी मां आज भी समझ नहीं पा रही कि उनके बेटे ने ऐसा कदम क्यों उठाया। राजा दो बेटियों का पिता था राजा की मौत ने उसके परिवार को झकझोर दिया। उसकी पत्नी पिंकी देवी, जिसका अभी तक सुहाग का सिंदूर ताजा था, अब लगातार बेसुध हो जा रहीं हैं। पिंकी की दो बेटियां हैं- एक डेढ़ साल की और एक सिर्फ 8 महीने की है। दोनों लगातार रो रही हैं। शायद वह समझ नहीं पा रही थीं कि आज उनके पिता की गोद क्यों नहीं मिली। ‘मेरा राजा कोई नशा नहीं करता था’ पिंकी कहती हैं, मेरे राजा ने कभी नशा नहीं किया। मैं कसम खाती हूं। वो कभी गलत रास्ते पर नहीं गया। वो तो बस डांस करता था, मेहनत करता था, मजदूरी करता था। तीन महीने पहले ही हरियाणा से लौटा था। हम दोनों ने मिलकर बच्चों का भविष्य बनाने की सोची थी, इसलिए वो लौंडा डांसर बना…लेकिन एक झटके में अब सब खत्म हो गया। राजा की मां अमेरिका देवी रोते हुए कहती हैं, मैंने सोचा था कि बेटा थका होगा। चाय देने गई तो देखा कि वह मोबाइल देख रहा है। फिर गौर से देखा….अरे ई का! मुंह से झाग निकल रहा था। हम चिल्लाने लगे, लोग दौड़े, पर तब तक देर हो चुकी थी। ‘लंबे बाल रख रंग-बिरंगे कपड़े में होते थे तैयार’ फरेवा गांव में नाचने वाले लौंडा डांसर के रूप में मशहूर यह चारों युवक सन्नी देवल, राजा कुमार, मुरारी सादा और सनोज गांव के हर आयोजन की जान थे। किसी के यहां शादी हो, मुंडन हो, सरस्वती पूजा हो या कोई सांस्कृतिक आयोजन इन चारों की टोली जरूर पहुंचती थी। लड़की की तरह लंबा बाल रखना, रंग-बिरंगे कपड़े पहनना और धुन पर झूमकर डांस करना इन्हीं चीजों से उनकी पहचान बनी हुई थी, लेकिन शायद किसी ने नहीं सोचा था कि शोहरत और दोस्ती की यही राह उन्हें अंधेरे की तरफ ले जाएगी, जहां से वापसी की कोई उम्मीद नहीं थी। कॉस्ट्यूम से लेकर मेकअप तक सेट करता था सनोज सनोज के घर भी मातम फैला है। उसकी मां सिर्फ ये दुआ कर रही है कि उसका बेटा अस्पताल से सही सलामत वापस आ जाए। गांव वाले बताते हैं कि सनोज सबसे शांत स्वभाव का है। डांस में उतना आगे नहीं, पर मेहनत और लगन में बाकी सभी से ज्यादा। चारों दोस्तों में उसकी भूमिका मिला-जुलाकर चलने वाली थी। कार्यक्रम कब है, कहां है, कपड़े क्या पहनने हैं, सब तय करता था।  

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