हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजीव रंजन उर्फ पप्पू यादव को पटना पुलिस ने 31 साल पुराने केस में 6 फरवरी की आधी रात को गिरफ्तार कर लिया। 7 फरवरी को कोर्ट में पेश किया, जहां से दो दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी में PMCH (पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल) भेज दिया गया। पप्पू यादव की गिरफ्तारी उस वक्त हुई, जब वह NEET स्टूडेंट के रेप-मर्डर केस को लेकर लगातार पुलिस पर हमलावर थे। कानूनन लगने वाली पप्पू की गिरफ्तारी में राजनीति, पर्सनल खुन्नस और प्लानिंग तीनों हैं। तीनों कहानी जानेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। 1. जनवरी में बनी थी पप्पू को गिरफ्तार करने की प्लानिंग पुलिस महकमे के सूत्रों के मुताबिक, NEET स्टूडेंट के रेप-मर्डर केस की जांच के लिए बनी SIT की मीटिंग में तय हुआ कि पप्पू यादव को चुप कराना जरूरी है। इससे पुलिस पर प्रेशर बन रहा है। बताया जा रहा है कि पुलिस के कुछ अफसरों ने पप्पू यादव के करीबी लोगों से संपर्क किया था। कहा था कि बोलिए-चुप हो जाएं। केस की जांच चल रही है। पुलिस के इस मैसेज के बाद भी पप्पू यादव चुप नहीं हुए। पटना से लेकर दिल्ली तक लगातार बयानबाजी करते रहे। 2. पप्पू NEET स्टूडेंट रेप-मर्डर के बहाने SSP पर निकाल रहे पुराना खुन्नस पुलिस डिपार्टमेंट के मुताबिक, पप्पू यादव NEET स्टूडेंट रेप-मर्डर केस के बहाने पटना SSP कार्तिकेय शर्मा से अपना पुराना खुन्नस निकाल रहे हैं। वह पूर्णिया की लड़ाई पटना लेकर आ गए हैं। बताया जा रहा है कि पूर्णिया का SP रहते हुए कार्तिकेय शर्मा ने पप्पू के VVIP सुरक्षा पाने वाली पूरी प्लानिंग को फेल कर दिया था। उनके एक्सपोज करने के कारण ही पप्पू जेड कैटेगरी की सुरक्षा हासिल नहीं कर पाए थे। पप्पू और SSP के बीच पुराना खुन्नस ऐसे समझिए… 3. सरकार को भनक नहीं, पुलिस डिपार्टमेंट पप्पू से नाराज पप्पू यादव पर कार्रवाई पूरी तरह डिपार्टमेंटल थी। इसे इतना गोपनीय रखा गया कि सरकार में शामिल किसी मंत्री या सीनियर लीडर को भी पहले से कोई जानकारी नहीं थी। गिरफ्तारी के बाद ही नेताओं को पता चला। सामान्यतः ऐसे हाई-प्रोफाइल मामलों में पुलिस मंत्री को बताती है, खासकर जब राजनीतिक संवेदनशीलता हो। लेकिन यहां सरकार के किसी मंत्री तक से परमिशन नहीं ली गई और ना ही जानकारी दी गई। कार्रवाई का पूरा निर्णय पुलिस महकमे के टॉप अफसरों ने लिया। बताया जाता है कि पुलिस डिपार्टमेंट पिछले कुछ महीनों में पप्पू यादव से खासा नाराज है। यह नाराजगी प्लानिंग में एक फैक्टर रही, लेकिन पुलिस इसे ‘कोर्ट ऑर्डर का सख्ती से पालन’ के रूप में पेश किया। हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजीव रंजन उर्फ पप्पू यादव को पटना पुलिस ने 31 साल पुराने केस में 6 फरवरी की आधी रात को गिरफ्तार कर लिया। 7 फरवरी को कोर्ट में पेश किया, जहां से दो दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी में PMCH (पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल) भेज दिया गया। पप्पू यादव की गिरफ्तारी उस वक्त हुई, जब वह NEET स्टूडेंट के रेप-मर्डर केस को लेकर लगातार पुलिस पर हमलावर थे। कानूनन लगने वाली पप्पू की गिरफ्तारी में राजनीति, पर्सनल खुन्नस और प्लानिंग तीनों हैं। तीनों कहानी जानेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। 1. जनवरी में बनी थी पप्पू को गिरफ्तार करने की प्लानिंग पुलिस महकमे के सूत्रों के मुताबिक, NEET स्टूडेंट के रेप-मर्डर केस की जांच के लिए बनी SIT की मीटिंग में तय हुआ कि पप्पू यादव को चुप कराना जरूरी है। इससे पुलिस पर प्रेशर बन रहा है। बताया जा रहा है कि पुलिस के कुछ अफसरों ने पप्पू यादव के करीबी लोगों से संपर्क किया था। कहा था कि बोलिए-चुप हो जाएं। केस की जांच चल रही है। पुलिस के इस मैसेज के बाद भी पप्पू यादव चुप नहीं हुए। पटना से लेकर दिल्ली तक लगातार बयानबाजी करते रहे। 2. पप्पू NEET स्टूडेंट रेप-मर्डर के बहाने SSP पर निकाल रहे पुराना खुन्नस पुलिस डिपार्टमेंट के मुताबिक, पप्पू यादव NEET स्टूडेंट रेप-मर्डर केस के बहाने पटना SSP कार्तिकेय शर्मा से अपना पुराना खुन्नस निकाल रहे हैं। वह पूर्णिया की लड़ाई पटना लेकर आ गए हैं। बताया जा रहा है कि पूर्णिया का SP रहते हुए कार्तिकेय शर्मा ने पप्पू के VVIP सुरक्षा पाने वाली पूरी प्लानिंग को फेल कर दिया था। उनके एक्सपोज करने के कारण ही पप्पू जेड कैटेगरी की सुरक्षा हासिल नहीं कर पाए थे। पप्पू और SSP के बीच पुराना खुन्नस ऐसे समझिए… 3. सरकार को भनक नहीं, पुलिस डिपार्टमेंट पप्पू से नाराज पप्पू यादव पर कार्रवाई पूरी तरह डिपार्टमेंटल थी। इसे इतना गोपनीय रखा गया कि सरकार में शामिल किसी मंत्री या सीनियर लीडर को भी पहले से कोई जानकारी नहीं थी। गिरफ्तारी के बाद ही नेताओं को पता चला। सामान्यतः ऐसे हाई-प्रोफाइल मामलों में पुलिस मंत्री को बताती है, खासकर जब राजनीतिक संवेदनशीलता हो। लेकिन यहां सरकार के किसी मंत्री तक से परमिशन नहीं ली गई और ना ही जानकारी दी गई। कार्रवाई का पूरा निर्णय पुलिस महकमे के टॉप अफसरों ने लिया। बताया जाता है कि पुलिस डिपार्टमेंट पिछले कुछ महीनों में पप्पू यादव से खासा नाराज है। यह नाराजगी प्लानिंग में एक फैक्टर रही, लेकिन पुलिस इसे ‘कोर्ट ऑर्डर का सख्ती से पालन’ के रूप में पेश किया।


