मेरठ में बिना लाइसेंस दवा बेचने वाले तुषार गर्ग को रविवार को पुलिस ने रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस छानबीन के अनुसार- तुषार गर्ग का पूरा कारोबार गैरकानूनी है। उसके पास ना तो दवा बेचने का लाइसेंस है और ना ही कारोबार का GST नंबर। इस पूरे मामले में ड्रग डिपार्टमेंट को भी शामिल किया जा चुका है जो उसके नेटवर्क को खंगालने में जुट गई है। पहले एक नजर डालते हैं वारदात पर
टीपीनगर पुलिस को शनिवार को सूचना मिली कि ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में नकली दवाओं का कारोबार हो रहा है। सीओ सौम्या अस्थाना ने ड्रग डिपार्टमेंट के साथ बताए गए गोदाम पर छापा मारा, जहां भारी मात्रा में दवाओं के बड़े बड़े डिब्बे मौजूद थे। छानबीन में पता चला कि दवाएं असली हैं लेकिन गोदाम स्वामी के पास दवा सेल एवं स्टॉक का कोई लाइसेंस नहीं है। आठ माह से करता आ रहा था काम
पुलिस ने जिस गोदाम पर छापा मारा, उसके असल मालिक ब्रह्मपुरी निवासी बालेश गुप्ता हैं। उनसे यह गोदाम माधवपुरम निवासी तुषार गर्ग ने आठ महीने पहले किराए पर लिया था। पुलिस ने गोदाम मालिक को भी बुला लिया। हालांकि पूछताछ के बाद पुलिस ने गोदाम मालिक को घर भेज दिया। मेडिकल स्टोरों पर काम कर चुका तुषार
शुरुआती छानबीन में सामने आया कि तुषार को करीब 12 से 15 वर्ष का दवाओं का अनुभव है। उसने सबसे पहले ब्रह्मपुरी में एक मेडिकल स्टोर पर काम किया था। कई साल काम करने के बाद उसने माधवपुरम इलाके में अपना मेडिकल स्टोर खोल लिया। ज्यादा मुनाफा देख उसने इसे काम को आगे बढ़ाने का फैसला किया। हरिद्वार व सहारनपुर से दवाएं मंगाने लगा। उसकी सबसे बड़ी सप्लाई मेरठ समेत आस पास के आठ से दस जनपदों के ग्रामीण इलाकों में थी। दवाओं की कीमत करीब 1 से 1.5 करोड़
पुलिस ने दवाओं से भरे 70 गत्ते के डिब्बे बरामद किए हैं। दवाओं पर मौजूद MRP के अनुसार इनकी कीमत तकरीबन 55 लाख रुपये आंकी गई थी। रविवार को भी दिनभर छानबीन चली। आशंका जताई जा रही है कि इन दवाओं की कीमत एक से डेढ़ करोड़ तक हो सकती है। इसकी वजह नारकोटिक दवा हैं, जिन्हें बिना बिल के ओने-पोने दाम पर बेचा जाता है। कुल 17 तरह की दवा हैं, जिनमें से सात नारकोटिक कमर्शियल श्रेणी की हैं। रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने किया पेश
रविवार को पूछताछ के बाद पुलिस ने आरोपी तुषार गर्ग को रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। इस मामले में ड्रग डिपार्टमेंट ने गहनता से छानबीन शुरु कर दी है। मेरठ से लेकर सहारनपुर और फिर हरिद्वार तक के तार जोड़कर पड़ताल शुरु कराई गई है। संभावना है कि जल्द पुलिस कुछ और लोगों को दबोच सकती है। यह दवाएं जब्त हुई गोदाम से
NEFIL, ONDEMIT, NEFTEREM, PANTATECH,NEWCHLOR DX, TECHECAV-650, ETORITECH-P, FEROTECH XT, AZITECH-40 (सभी साधारण दवाएं), DIAZERIAN-5, ZOCIFX-30 Mg, ALPCORE-0.5 Mg, NETOWIN, ALPCORE-0.5 Mg, SPASMORE, AIPRATAN-0.5 Mg (सभी नारकोटिक्स कमर्शियल श्रेणी) बरामद की गई हैं। इनमें एंटीबायोटिक, आयरन, गैस जैसी दवाओं के अलावा केवल नारकोटिक्स के लाइसेंस पर बेची जाने वालीं दर्द, नींद, एंजायटी की दवा के अलावा ऑपरेशन के वक्त प्रयुक्त होने वाला इंजेक्शन भी है। इनका नशे में भी प्रयोग होता है। दवा कारोबारियों में बढ़ी नाराजगी
दवाओं की गैरकानूनी बिक्री का खुलासा होने के बाद इस कारोबार से जुड़े लोगों में रोष है। जिला मेरठ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री रजनीश कौशल बताते हैं कि वह लंबे समय से शिकायत करते आ रहे हैं लेकिन नतीजा हर बार ढाक के तीन पात ही निकलता है। एक आरोपी को दबोचकर फाइल बंद कर दी जाती है जबकि जनहित का मुद्दा होने के कारण इसकी चेन का खुलासा होना जरूरी है। सीओ बोली- रिमांड पर लेकर करेंगे पूछताछ सीओ ब्रह्मपुरी सौम्या अस्थाना का कहना है कि आरोपी को रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया था। पुलिस की रिमांड मंजूर कर आरोपी को जेल भेज दिया गया है। इस मामले में पुलिस अब ड्रग डिपार्टमेंट के साथ मिलकर छानबीन में जुटी है। यह साफ हो चुका है कि आरोपी के पास ना लाइसेंस था और ना ही कारोबार के लिए GST नंबर।


