मुंबई की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। भाजपा (BJP) पहली बार मुंबई में अपना मेयर (महापौर) बनाने जा रही है, जिससे नगर निकाय में ठाकरे परिवार का 25 वर्षों से चला आ रहा दबदबा समाप्त हो जाएगा। भाजपा पार्षद रितु तावड़े ने शनिवार को देश की सबसे अमीर नगर निकाय बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के मेयर पद के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। दिलचस्प बात यह है कि किसी अन्य विपक्षी दल ने इस पद के लिए पर्चा नहीं भरा है, जिससे तावड़े का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया है।
महायुति गठबंधन ने नगर निगम की कमान संभालने के लिए अपनी टीम तैयार कर ली है। जहां भाजपा की रितु तावड़े मेयर का पद संभालेंगी, वहीं गठबंधन की सहयोगी शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के संजय घाडी को उप-मेयर (उपमहापौर) पद के लिए उम्मीदवार बनाया गया है। संजय घाडी वार्ड नंबर 5 से पार्षद हैं और पहले शिवसेना (यूबीटी) का हिस्सा थे, लेकिन बाद में वे शिंदे गुट में शामिल हो गए थे। शिवसेना ने रणनीति के तहत उपमहापौर के कार्यकाल को 15-15 महीनों के चार हिस्सों में बांटने का फैसला किया है ताकि पार्टी के चार पार्षदों को इस पद पर सेवा करने का अवसर मिल सके।
शनिवार को नामांकन की प्रक्रिया के दौरान महायुति के नेताओं ने अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया। रितु तावड़े और संजय घाडी ने मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम और पूर्व सांसद राहुल शेवाले की उपस्थिति में अपने फॉर्म जमा किए।
बीएमसी के सचिव कार्यालय ने पुष्टि की है कि शाम 6 बजे की समय सीमा तक केवल इन्हीं दो उम्मीदवारों के नामांकन प्राप्त हुए हैं। हालांकि चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया 11 फरवरी को पूरी की जाएगी, लेकिन संख्या बल पूरी तरह भाजपा गठबंधन के पक्ष में है। भाजपा 89 सीटों के साथ बीएमसी में सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि शिवसेना के 29 पार्षदों के साथ गठबंधन के पास कुल 118 सदस्यों का समर्थन है, जो बहुमत के 114 के आंकड़े से अधिक है।
कौन है रितु तावड़े?
मुंबई के गुजराती बहुल इलाके घाटकोपर (वार्ड 132) से दो बार पार्षद रह चुकीं रितु तावड़े साल 2012 में भाजपा में शामिल हुई थीं और उसी साल पार्षद चुनी गयी थीं। घाटकोपर में उनकी पहचान एक जमीनी नेता के रूप में है जिनका विशेष रूप से गुजराती और मराठी दोनों समुदायों के बीच अच्छा प्रभाव माना जाता है।

पार्षद के रूप में अपने पहले कार्यकाल में ही उन्होंने शिक्षा समिति की अध्यक्षता की और नगर निकाय के प्रशासनिक कार्यों में अपनी गहरी पैठ बनाई। तावड़े न केवल बुनियादी ढांचे, जल आपूर्ति और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों को उठाने के लिए जानी जाती हैं, बल्कि वे तब भी सुर्खियों में आई थीं जब उन्होंने दुकानों में पुतलों पर प्रदर्शित आपत्तिजनक कपड़ों के खिलाफ आवाज उठाई थी।
बीएमसी में नए युग की शुरुआत
भाजपा नेताओं ने इस जीत को मुंबई के विकास के लिए एक नया सवेरा बताया है। मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम ने विश्वास जताया कि 44 साल बाद भाजपा का महापौर मुंबई को भ्रष्टाचार के चंगुल से मुक्त करने का काम करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि महायुति ने हमेशा एक मराठी और हिंदू मेयर पद देने का वादा किया था, जिसे रितु तावड़े के रूप में पूरा किया गया है।
गौरतलब है कि 227 सदस्यीय बीएमसी चुनाव में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि शिवसेना ने 29 सीटें जीतीं। वहीं, 1997 से बीएमसी पर शासन करने वाली शिवसेना (उद्धव गुट) को इस बार 65 सीटें मिलीं। कांग्रेस ने 24, एआईएमआईएम ने 8, मनसे ने 6, एनसीपी (अजित पवार) ने 3, एनसीपी (शरद पवार) ने एक और समाजवादी पार्टी ने 2 सीटें जीतीं। दो निर्दलीय उम्मीदवार भी विजयी हुए।
74,450 करोड़ रुपये के विशाल बजट वाली बीएमसी का पिछला कार्यकाल समाप्त होने के बाद 7 मार्च 2022 से बीएमसी कमिश्नर राज्य सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासक के रूप में काम कर रहे हैं।


