सुई-धागे से सशक्तिकरण, हर महीने 15 हजार कमाई:बुनाई सीख कर आत्मनिर्भर बन रही महिलाएं, उत्पाद बेचने के लिए मार्केट भी उपलब्ध

सुई-धागे से सशक्तिकरण, हर महीने 15 हजार कमाई:बुनाई सीख कर आत्मनिर्भर बन रही महिलाएं, उत्पाद बेचने के लिए मार्केट भी उपलब्ध

वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार की पहल पर समस्तीपुर में गुरु-शिष्य हस्तशिल्प कार्यक्रम के तहत ग्रामीण महिलाओं को नीटिंग क्राफ्ट (क्रोशिया और बुनाई) का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पाकर महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और घर बैठे रोजगार से जुड़ रही हैं। महिलाओं को यह काम न सिर्फ पसंद आ रहा है, बल्कि इससे वे घरेलू सजावटी सामान भी तैयार कर रही हैं। प्रशिक्षण के बाद महिलाओं के बनाए उत्पादों की बिक्री की जिम्मेदारी जिला उद्योग विभाग उठाएगा। कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) के माध्यम से उत्पाद बाजार तक पहुंचाए जाएंगे, जिससे महिलाओं को बिक्री के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। इसके अलावा उपेंद्र महारथी शिल्प संस्थान, पटना की ओर से विभिन्न खादी ग्राम उद्योग केंद्रों के जरिए भी बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक विवेक कुमार शर्मा ने बताया कि महिलाओं को घर बैठे रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पहले चरण में 30 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में इच्छुक अन्य महिलाओं को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा। 18 प्रकार के हस्तशिल्प की जानकारी दी जाएगी कार्यक्रम की मुख्य ट्रेनर अनामिका शर्मा ने बताया कि गुरू शिष्य हस्तशिल्प योजना के तहत जिले में पहले चरण में 30 महिलाओं को ट्रेनिंग दी जा रही है। अभी उन्हें क्रोशिया की ट्रेनिंग दी जा रही है। अभियान के तहत 18 प्रकार के हस्तशिल्प की जानकारी दी जाएगी। जिसमें मिथिला पेंटिंग, रिंग, बैग, पर्स स्वेटर, बेबी, ड्रेस डिजाईनिंग, सीकी आर्ट के साथ ही घरेलू सजावटी का समान बनाने का प्रशिक्षण शामिल है। प्रशिक्षण लेने के बाद महिलाएं अपने घर पर सजावटी सामान बना सकेंगी। महिलाओं की ओर से बनाए गए सजावटी सामान को उपेंद्र महारथी शिल्प संस्थान और कॉमन फेसेलिटी सेंटर के माध्यम से बेचा जाएगा। सजावटी समान बनाकर घर बैठे-बैठे 15-20 हजार रुपए तक महीना कमाया जा सकता है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद घर पर काम कर करूंगी प्रशिक्षण ले रही महिला सुदेवी ने बताया कि मैं क्रोशिया से फुल बनाने के साथ ही कई घरेलू सजावटी सामान बनाने की जानकारी दी गई है। सुदेवी ने बताया कि पूर्ण प्रशिक्षण के बाद मैं अपने घर पर इसका निर्माण करूंगी। जिससे आय की प्राप्ति होगी। विभाग की ओर से इसके लिए बाजार भी उपलब्ध कराया जाएगा। प्रशिक्षण ले रही कंचन कुमारी ने बताया कि अबतक मछली, कछुआ, फूल, नजरिया, आदि सिख चुकी हूं। घर के कामकाज के बाद मैं घर में बैठी रहती थी। इस कला को सिखने के बाद घर में सजारवटी सामान बना कर रोजगार कर सकूंगी। प्रशिक्षक की ओर से बताया गया है कि सजावटी सामान बेचने के लिए बजार भी उपलब्ध कराने की बात कही गई है। वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार की पहल पर समस्तीपुर में गुरु-शिष्य हस्तशिल्प कार्यक्रम के तहत ग्रामीण महिलाओं को नीटिंग क्राफ्ट (क्रोशिया और बुनाई) का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पाकर महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और घर बैठे रोजगार से जुड़ रही हैं। महिलाओं को यह काम न सिर्फ पसंद आ रहा है, बल्कि इससे वे घरेलू सजावटी सामान भी तैयार कर रही हैं। प्रशिक्षण के बाद महिलाओं के बनाए उत्पादों की बिक्री की जिम्मेदारी जिला उद्योग विभाग उठाएगा। कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) के माध्यम से उत्पाद बाजार तक पहुंचाए जाएंगे, जिससे महिलाओं को बिक्री के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। इसके अलावा उपेंद्र महारथी शिल्प संस्थान, पटना की ओर से विभिन्न खादी ग्राम उद्योग केंद्रों के जरिए भी बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक विवेक कुमार शर्मा ने बताया कि महिलाओं को घर बैठे रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पहले चरण में 30 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में इच्छुक अन्य महिलाओं को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा। 18 प्रकार के हस्तशिल्प की जानकारी दी जाएगी कार्यक्रम की मुख्य ट्रेनर अनामिका शर्मा ने बताया कि गुरू शिष्य हस्तशिल्प योजना के तहत जिले में पहले चरण में 30 महिलाओं को ट्रेनिंग दी जा रही है। अभी उन्हें क्रोशिया की ट्रेनिंग दी जा रही है। अभियान के तहत 18 प्रकार के हस्तशिल्प की जानकारी दी जाएगी। जिसमें मिथिला पेंटिंग, रिंग, बैग, पर्स स्वेटर, बेबी, ड्रेस डिजाईनिंग, सीकी आर्ट के साथ ही घरेलू सजावटी का समान बनाने का प्रशिक्षण शामिल है। प्रशिक्षण लेने के बाद महिलाएं अपने घर पर सजावटी सामान बना सकेंगी। महिलाओं की ओर से बनाए गए सजावटी सामान को उपेंद्र महारथी शिल्प संस्थान और कॉमन फेसेलिटी सेंटर के माध्यम से बेचा जाएगा। सजावटी समान बनाकर घर बैठे-बैठे 15-20 हजार रुपए तक महीना कमाया जा सकता है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद घर पर काम कर करूंगी प्रशिक्षण ले रही महिला सुदेवी ने बताया कि मैं क्रोशिया से फुल बनाने के साथ ही कई घरेलू सजावटी सामान बनाने की जानकारी दी गई है। सुदेवी ने बताया कि पूर्ण प्रशिक्षण के बाद मैं अपने घर पर इसका निर्माण करूंगी। जिससे आय की प्राप्ति होगी। विभाग की ओर से इसके लिए बाजार भी उपलब्ध कराया जाएगा। प्रशिक्षण ले रही कंचन कुमारी ने बताया कि अबतक मछली, कछुआ, फूल, नजरिया, आदि सिख चुकी हूं। घर के कामकाज के बाद मैं घर में बैठी रहती थी। इस कला को सिखने के बाद घर में सजारवटी सामान बना कर रोजगार कर सकूंगी। प्रशिक्षक की ओर से बताया गया है कि सजावटी सामान बेचने के लिए बजार भी उपलब्ध कराने की बात कही गई है।  

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