‘प्रॉमिस’ सिर्फ एक शब्द नहीं, वो विश्वास होता है,जो दो लोगों को जीवन भर साथ जोड़ें रखता। प्रॉमिस डे पर जानिए गोरखपुर के उन कपल की कहानी जिन्होंने एक दूसरे का साथ निभाने का वादा किया और लाइफ पार्टनर बने। कॉलेज के दिनों में मिलने वाले कंचन और संजीत को एक दूसरे की सादगी पसंद आई। दोस्ती प्यार में बदली और एक दिन संजीत ने कभी न साथ छोड़ने का वादा किया। परिवार को मना कर दोनों ने शादी की और ये वादा अब तक निभा रहे। ऐसी ही कुछ कहानी है, अल्पना और सुधीर की। 29 साल पहले दोनों को परिवार ने मिलाया, अरेंज्ड मैरिज हुई। अनजान लोगों के बीच जब कल्पना घबराई तो सुधीर के एक प्रॉमिस ने उन्हें हिम्मत दी। आज ये कपल युवाओं के लिए मिसाल है। एक दूसरे के साथ ने दी हिम्मत कहते हैं लव मैरिज में चुनौतियां बहुत होती हैं, लेकिन अगर इरादे पक्के हों तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। आज ‘प्रॉमिस डे’ है, और इस मौके पर शहर के प्यारे कपल, कंचन और संजीत की कहानी हमें याद दिलाती है कि वादे सिर्फ लफ्जों से नहीं, बल्कि निभाने की हिम्मत से पूरे होते हैं। शुरुआत एक ‘छोटे’ वादे से
कंचन और संजीत की मुलाकात कॉलेज की कैंटीन में हुई थी। प्यार हुआ, तो सबसे बड़ी दीवार खड़ी थी, दोनों के परिवार। कंचन कहती हैं कि जब हमने शादी का फैसला किया, तो सब डरा रहे थे कि लव मैरिज ज्यादा दिन नहीं चलती। तब संजीत ने मेरा हाथ पकड़कर एक छोटा सा वादा किया था, चाहे दुनिया इधर की उधर हो जाए, हम एक-दूसरे को कभी हारने नहीं देंगे। उस दिन मेरा डर विश्वास में बदल गया और मैंने उनके साथ जीवन बिताने का मन बना लिया। जब वादे ने ली हकीकत की शक्ल
2004 में हमारी शादी हुई। शुरुआती साल आसान नहीं थे। घर वालों की नाराजगी और नादानी के बीच कई बार झगड़े भी हुए। संजीत बताते हैं कि प्रॉमिस डे पर लोग महंगे गिफ्ट देते हैं, लेकिन हमने एक-दूसरे को ‘वक्त’ और ‘धैर्य’ देने का वादा किया था। कंचन ने जिंदगी की हर मोड़ पर मेरा साथ दिया। ये वादा पूरे जीवन के लिए है। वो ‘वादा’ जो शादी के बाद हुआ
अरेंज्ड मैरिज में अक्सर लोग एक-दूसरे को ‘जानने’ में सालों लगा देते हैं, लेकिन अल्पना और सुधीर की कहानी इस सोच को बदल देती है। अल्पना बताती हैं, 29 साल पहले उनकी शादी के अगले अनजान लोगों के बीच मैं घबराई हुई थी, तभी सुधीर मेरे पास आएं और बोले- तुम चिंता मत करो मैं हर वक्त तुम्हारे साथ हूं, वादा करता हूं, इस घर में तुम्हें कोई दिक्कत नहीं होगी। उनकी बातें सुन कर मेरे मन को तसल्ली मिली और तब मुझे लगा मुझे घबराने की जरूरत नहीं है। सुधीर आज तक उस वादें को निभाते हैं। हर मुश्किल में सबसे पहले वो ही मेरे पास होते हैं। अल्पना और सुधीर जैन की कहानी जो आज के युवाओं के लिए मिसाल है। 29 वर्षों पहले दोनों ने तय किया कि वे एक-दूसरे से अपनी कमियां नहीं छुपाएंगे। सुधीर ने वादा किया कि अल्पना की हॉबीज और उसकी सहेलियां शादी के बाद भी उसकी जिंदगी का हिस्सा रहेंगी। उन्होंने वादा किया कि वे एक-दूसरे की खामोशी को भी उतनी ही तवज्जो देंगे जितनी उनकी बातों को। परंपरा और आधुनिकता का मेल
जहां दुनिया डेटिंग ऐप्स के जरिए साथी ढूंढ रही है, वहीं अल्पना और सुधीर की यह ‘अरेंज्ड’ शुरुआत बताती है कि अगर नीयत साफ हो, तो अनजान शख्स के साथ भी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत वादा निभाया जा सकता है।


