लखनऊ के हुसैनाबाद स्थित नेहरू युवा केंद्र में शनिवार को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया का 17वां उत्तर प्रदेश राज्य सम्मेलन शुरू हो गया है। दो दिवसीय इस सम्मेलन में प्रदेश भर से 89 छात्र प्रतिनिधि शामिल हुए। उन्होंने स्कूल बंद होने, बढ़ती फीस, छात्रों के स्कूल छोड़ने की बढ़ती संख्या और कैंपस लोकतंत्र जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की। सम्मेलन का उद्घाटन प्रोफेसर सूरज बहादुर थापा ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत एसएफआई के पूर्व राज्य सचिव विवेक विक्रम सिंह ने ध्वजारोहण के साथ की। समिति के अध्यक्ष राकेश वेदा ने प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए लखनऊ के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को याद किया। उन्होंने ऊदा देवी और बेगम हजरत महल जैसे शहीदों को नमन करते हुए छात्रों से इन संघर्षों से प्रेरणा लेने और छात्र आंदोलन को मजबूत करने का आह्वान किया। उत्तर प्रदेश में स्कूलों के बंद होने पर चिंता व्यक्त की इस मौके पर प्रोफेसर सूरज बहादुर थापा ने देश, विशेषकर उत्तर प्रदेश में स्कूलों के बंद होने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकार 27 हजार स्कूलों को छात्रों की कमी का हवाला देकर बंद करने की बात कर रही है, जबकि वास्तविक कारण बुनियादी सुविधाओं और शिक्षकों का अभाव है। प्रोफेसर थापा ने यह भी बताया कि कई स्कूलों के शिक्षकों को पढ़ाई के बजाय बीएलओ ड्यूटी, जनगणना और ट्रैफिक ड्यूटी जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसरों में बढ़ती असहिष्णुता, जातिवाद और सांप्रदायिकता पर भी चिंता व्यक्त करते हुए छात्रों से एकजुट होने की अपील की। 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल के समर्थन की अपील एसएफआई की अखिल भारतीय संयुक्त सचिव आइशे घोष ने नई शिक्षा नीति 2020 और डिजिटल असमानता को स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की बढ़ती दर का एक प्रमुख कारण बताया। सम्मेलन की अध्यक्षता एसएफआई के प्रदेश अध्यक्ष पार्थ सारथी द्विवेदी ने की। इस दौरान सीटू के प्रेमनाथ राय ने 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल के समर्थन की अपील की। विभिन्न जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने भी सम्मेलन को संबोधित किया। सम्मेलन का समापन दूसरे दिन संगठन की गतिविधियों की समीक्षा और नई राज्य कमेटी के चुनाव के साथ होगा।


