India US Interim Trade Agreement: भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार ढांचे (Interim Trade Framework) पर सहमति बनी है, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार में आ रही अड़चनों को कुछ हद तक कम करना है। इस ढांचे के तहत भारतीय ऑटो पार्ट्स निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में टैरिफ-रेट कोटा (TRQ) के माध्यम से अपेक्षाकृत कम शुल्क पर प्रवेश मिलने की संभावना है।
संयुक्त बयान के अनुसार, यह व्यवस्था अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा नियमों के अनुरूप है और पहले लागू किए गए Proclamation 9888 के तहत ऑटोमोबाइल आयात पर लगाए गए सख्त प्रावधानों में आंशिक संशोधन करती है। ढांचा लागू होने पर भारतीय ऑटो कंपोनेंट्स को एक तय सीमा तक कम टैरिफ पर निर्यात की सुविधा मिल सकती है।
मौजूदा स्थिति क्या है?
वर्तमान में भारत से अमेरिका जाने वाले अधिकतर ऑटो कंपोनेंट्स पर करीब 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगता है। इनमें से बड़ी संख्या सेक्शन 232 के तहत आती है, जिसमें कार पार्ट्स शामिल हैं। व्यावसायिक वाहनों और ऑफ-हाइवे वाहनों के पुर्जों पर बीते वर्षों में इससे भी अधिक शुल्क लगाया गया था। नवंबर 2025 में शुल्क को एक समान 25 प्रतिशत पर लाने का स्पष्टीकरण जरूर आया था, लेकिन लागत दबाव बना रहा।
निर्यात आंकड़े क्या संकेत देते हैं?
इस घोषणा का समय इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि FY26 की पहली छमाही में भारत का ऑटो कंपोनेंट सेक्टर लगभग 200 मिलियन डॉलर के व्यापार घाटे में रहा। ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ACMA) के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच अमेरिका को ऑटो कंपोनेंट निर्यात 3.12 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 3.10 अरब डॉलर के आसपास ही रहा। यानी अन्य बाजारों में वृद्धि के बावजूद अमेरिकी बाजार में निर्यात लगभग स्थिर रहा।
उद्योग जगत की शुरुआती प्रतिक्रिया
ACMA के अध्यक्ष विक्रमपति सिंघानिया ने बयान में कहा कि प्रस्तावित उपायों से निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने, तकनीकी सहयोग गहराने और वैश्विक ऑटो सप्लाई चेन में भारत की भूमिका मजबूत होने की उम्मीद है। साथ ही, उन्होंने अंतिम समझौते में संतुलित बाजार पहुंच और दीर्घकालिक नीति स्पष्टता की जरूरत पर भी जोर दिया।
ऑटो सेक्टर के अलावा कौन से क्षेत्र शामिल?
यह अंतरिम ढांचा सिर्फ ऑटो उद्योग तक सीमित नहीं है। इसके तहत अमेरिका ने टेक्सटाइल, लेदर, रबर और केमिकल्स समेत कई भारतीय उत्पादों पर टैरिफ को मौजूदा लगभग 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत तक लाने पर सहमति जताई है।
इसके बदले भारत ने कुछ अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पाद-जैसे पशु आहार, ज्वार (Sorghum), डिस्टिलर्स ग्रेन्स, सोयाबीन तेल और प्रोसेस्ड फल-पर शुल्क घटाने या हटाने का संकेत दिया है।
आगे क्या?
अंतरिम ढांचा एक अस्थायी व्यवस्था है और इसे व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है। अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि टैरिफ-रेट कोटा की शर्तें क्या होती हैं और किन उत्पादों को किस सीमा तक राहत मिलती है। फिलहाल, यह समझौता भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में संभावित राहत और आगे की बातचीत का संकेत देता है।


