पटना पुलिस ने 31 साल पुराने मामले में कोर्ट के आदेश के बाद पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव को गिरफ्तार किया है। जिससे समर्थकों में नाराजगी है। आरा स्टेशन परिसर के पास समर्थकों ने सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। पुतला फूंककर नारेबाजी की है। पप्पू यादव की गिरफ्तारी को राजनीतिक साजिश बताया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि वर्षों पुराने मामले को लेकर अचानक की गई गिरफ्तारी लोकतंत्र और विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश है। चेतावनी देते हुए कहा कि पप्पू यादव को जल्द रिहा नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
सरकार के इशारे पर कार्रवाई पप्पू यादव के समर्थक डॉक्टर ब्रजेश कुमार सिंह ने कहा कि गिरफ्तारी पूरी तरह राजनीतिक साजिश का परिणाम है। कई वर्षों पुराने, लगभग खत्म हो चुके मामले को सरकार के इशारे पर दोबारा जिंदा कर पटना पुलिस ने यह कार्रवाई की है। इसका असली कारण यह है कि सांसद पप्पू यादव नीट घोटाले के मुद्दे पर सड़क से लेकर संसद तक लगातार उठा रहे थे। इस मामले में बड़े पदाधिकारी और एक प्रभावशाली मंत्री के बेटे का नाम सामने आ रहा है, जिसे बचाने के लिए यह पूरा षड्यंत्र रचा गया है।
सरकार मामले को दबाने का प्रयास कर रही है ब्रजेश कुमार सिंह ने आगे कहा कि पप्पू यादव हमेशा जनता के हक में और सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ मुखर रहे हैं। कोरोना काल में भी उन्होंने जनता की आवाज उठाई थी और तब भी उन्हें पुराने केस में फंसाकर एक महीने जेल में रखा गया था। आज फिर सरकार उन पर दबाव बना रही है कि वे जनहित के मुद्दे न उठाएं। वे बिहार के नेता, बिहार के बेटे और जनता के सच्चे प्रतिनिधि हैं। बिहार की बेटी से जुड़े हत्या के मामले में अपराधियों की गिरफ्तारी को लेकर उन्होंने सरकार पर लगातार दबाव बनाया और आंदोलन किया। इसी कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। एक सांसद को रात 12 बजे अपराधी की तरह गिरफ्तार करना पुलिस प्रशासन को शोभा नहीं देता। उनकी तबीयत भी खराब है, उन्हें आईजीएमएस में भर्ती कराया गया और बाद में पीएमसीएच रेफर किया गया। इस अन्यायपूर्ण कार्रवाई के विरोध में पूरे बिहार सहित आरा-भोजपुर में सरकार का पुतला दहन कर विरोध जारी रहेगा। बेटियों की सुरक्षा और न्याय की लड़ाई लड़ी है समर्थक सुजीत कुमार ने कहा कि शुक्रवार की रात करीब 12 बजे पप्पू यादव के आवास पर गिरफ्तारी के लिए पूरी पटना पुलिस को लगा दिया गया। ऐसा लग रहा था मानो किसी बड़े अपराधी की गिरफ्तारी की जा रही हो। आज पप्पू यादव की तबीयत भी खराब है। मैं पूछना चाहता हूं कि उन्होंने आखिर कौन-सा गुनाह किया है। वे तो लगातार समाज के बीच रहकर जनता की आवाज उठाते रहे हैं। नीट छात्रा की हत्या के खिलाफ सड़क पर उतरकर संघर्ष कर रहे थे। उन्होंने बेटियों की सुरक्षा और न्याय की लड़ाई लड़ी है। इसके बावजूद सरकार ने पुराने मामलों को दबाकर केवल पप्पू यादव को निशाना बनाया है। उनके घर पर न तो कुर्की-जब्ती हुई और न ही किसी तरह का विधिवत नोटिस दिया गया, लेकिन इसके बावजूद अचानक देर रात उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पूरे बिहार में चक्का जाम होगा सुजीत कुमार ने आगे कहा कि ढोल-नगाड़ों के साथ इस्तेहार चस्पा करने जैसी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पप्पू यादव को जल्द बेशर्त रिहा नहीं किया गया तो अगले दो दिनों के भीतर पूरे बिहार में चक्का जाम किया जाएगा। यह लड़ाई केवल पप्पू यादव की नहीं, बल्कि बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और इंसाफ की लड़ाई है। इस संघर्ष को एक-एक कार्यकर्ता अंतिम क्षण तक लड़ेंगे और जरूरत पड़ी तो जेल जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। पटना पुलिस ने 31 साल पुराने मामले में कोर्ट के आदेश के बाद पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव को गिरफ्तार किया है। जिससे समर्थकों में नाराजगी है। आरा स्टेशन परिसर के पास समर्थकों ने सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। पुतला फूंककर नारेबाजी की है। पप्पू यादव की गिरफ्तारी को राजनीतिक साजिश बताया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि वर्षों पुराने मामले को लेकर अचानक की गई गिरफ्तारी लोकतंत्र और विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश है। चेतावनी देते हुए कहा कि पप्पू यादव को जल्द रिहा नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
सरकार के इशारे पर कार्रवाई पप्पू यादव के समर्थक डॉक्टर ब्रजेश कुमार सिंह ने कहा कि गिरफ्तारी पूरी तरह राजनीतिक साजिश का परिणाम है। कई वर्षों पुराने, लगभग खत्म हो चुके मामले को सरकार के इशारे पर दोबारा जिंदा कर पटना पुलिस ने यह कार्रवाई की है। इसका असली कारण यह है कि सांसद पप्पू यादव नीट घोटाले के मुद्दे पर सड़क से लेकर संसद तक लगातार उठा रहे थे। इस मामले में बड़े पदाधिकारी और एक प्रभावशाली मंत्री के बेटे का नाम सामने आ रहा है, जिसे बचाने के लिए यह पूरा षड्यंत्र रचा गया है।
सरकार मामले को दबाने का प्रयास कर रही है ब्रजेश कुमार सिंह ने आगे कहा कि पप्पू यादव हमेशा जनता के हक में और सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ मुखर रहे हैं। कोरोना काल में भी उन्होंने जनता की आवाज उठाई थी और तब भी उन्हें पुराने केस में फंसाकर एक महीने जेल में रखा गया था। आज फिर सरकार उन पर दबाव बना रही है कि वे जनहित के मुद्दे न उठाएं। वे बिहार के नेता, बिहार के बेटे और जनता के सच्चे प्रतिनिधि हैं। बिहार की बेटी से जुड़े हत्या के मामले में अपराधियों की गिरफ्तारी को लेकर उन्होंने सरकार पर लगातार दबाव बनाया और आंदोलन किया। इसी कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। एक सांसद को रात 12 बजे अपराधी की तरह गिरफ्तार करना पुलिस प्रशासन को शोभा नहीं देता। उनकी तबीयत भी खराब है, उन्हें आईजीएमएस में भर्ती कराया गया और बाद में पीएमसीएच रेफर किया गया। इस अन्यायपूर्ण कार्रवाई के विरोध में पूरे बिहार सहित आरा-भोजपुर में सरकार का पुतला दहन कर विरोध जारी रहेगा। बेटियों की सुरक्षा और न्याय की लड़ाई लड़ी है समर्थक सुजीत कुमार ने कहा कि शुक्रवार की रात करीब 12 बजे पप्पू यादव के आवास पर गिरफ्तारी के लिए पूरी पटना पुलिस को लगा दिया गया। ऐसा लग रहा था मानो किसी बड़े अपराधी की गिरफ्तारी की जा रही हो। आज पप्पू यादव की तबीयत भी खराब है। मैं पूछना चाहता हूं कि उन्होंने आखिर कौन-सा गुनाह किया है। वे तो लगातार समाज के बीच रहकर जनता की आवाज उठाते रहे हैं। नीट छात्रा की हत्या के खिलाफ सड़क पर उतरकर संघर्ष कर रहे थे। उन्होंने बेटियों की सुरक्षा और न्याय की लड़ाई लड़ी है। इसके बावजूद सरकार ने पुराने मामलों को दबाकर केवल पप्पू यादव को निशाना बनाया है। उनके घर पर न तो कुर्की-जब्ती हुई और न ही किसी तरह का विधिवत नोटिस दिया गया, लेकिन इसके बावजूद अचानक देर रात उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पूरे बिहार में चक्का जाम होगा सुजीत कुमार ने आगे कहा कि ढोल-नगाड़ों के साथ इस्तेहार चस्पा करने जैसी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पप्पू यादव को जल्द बेशर्त रिहा नहीं किया गया तो अगले दो दिनों के भीतर पूरे बिहार में चक्का जाम किया जाएगा। यह लड़ाई केवल पप्पू यादव की नहीं, बल्कि बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और इंसाफ की लड़ाई है। इस संघर्ष को एक-एक कार्यकर्ता अंतिम क्षण तक लड़ेंगे और जरूरत पड़ी तो जेल जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।


