राजगीर के जैन धर्मशाला में मां, 2 बेटियां और 1 बेटे की लाशें फंदे से लटकी मिली। पुलिस जांच के अनुसार, जिस रस्सी से चारों की लाशें लटकी थी, वो नई थी। चारों की बॉडी डिकंपोज हो गई थी यानी स्किन निकलने लगे थे। धर्मशाला के केयर टेकर मुकेश जैन ने बताया, ‘ये लोग 31 जनवरी को आए थे। तब 1 दिन के लिए कमरा बुक कराया था। 1 फरवरी को इनकी बुकिंग खत्म होने वाली थी, लेकिन इनलोगों ने कमरे की बुकिंग को बढ़वा लिया। बेटे ने कहा था हमें 3-4 दिन के लिए और कमरा चाहिए। इसके वाद वे लोग कमरे से बाहर नहीं निकले।’ मृतकों की पहचान स्व. रत्नबाला राजु की पत्नी जीआर सुमंगला(78), बेटी शिल्पा जीआर (48), श्रुथा जीबी (43) और बेटा जीआर नागा प्रसाद (50) शामिल हैं। ये सभी कर्नाटक के तुमकुर जिले के बैलेडा पेटे गुब्बी के रहने वाले थे। धर्मशाला के कमरे में क्या था, धर्मशाला के लोगों को कब गड़बड़ी का शक हुआ, पुलिस क्या कर रही कार्रवाई, पढ़िए रिपोर्ट… पहले देखें कुछ तस्वीरें.. घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने कमरे को सील कर जांच पड़ताल की। कमरे से 1.18 लाख रुपए कैश और कई गहने मिले, जिसकी कीमत का आकलन अभी नहीं किया गया है। एसपी भारत सोनी ने बताया कि नागा प्रसाद और शिल्पा अविवाहित थे, जबकि श्रुथा तलाकशुदा थी और मां सुमंगला दिव्यांग थीं। कमरे से बरामद दस्तावेजों और धर्मशाला के रजिस्टर के आधार पर इनकी पहचान हुई है। मामले की जांच के लिए पुलिस की टीम बनी है, जो बेंगलुरू जाकर जांच करेगी और पूरे परिवार के बारे में पता लगाएगी। लोग शौचालय की बदबू समझकर इग्नोर कर रहे थे लाश की बदबू 5 फरवरी से फैलने लगी थी, लेकिन धर्मशाला में रह रहे लोग समझ नहीं पाए। कमरे के बगल में एक गलियारा है। जहां से लोग आना-जाना करते हैं। वहां एक शौचालय भी है। लोगों को लग रहा था शौचालय की बदबू फैल रही है। धर्मशाला के केयर टेकर अनुसार, ये लोग 4 दिनों से नहीं दिख रहे थे। कमरा भी नहीं खुल रहा था। बदबू की वजह से शक हुआ तो 6 फरवरी (शुक्रवार) की सुबह पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने दरवाजे के छेद से कमरे में झांक कर देखा तो लाशें लटकी देखी। पहले पुलिस को लगा कि कमरे में 2 महिला और 2 पुरुष हैं। मौके पर मजिस्ट्रेट को बुलाया गया और दरवाजे को तोड़ा गया। तब पता चला कि 3 महिलाएं और पुरूष 1 की लाशें हैं। कमरे में एक टेबल-बेड था, सामान इधर-उधर पड़े थे धर्मशाला का कमरा ज्यादा बड़ा नहीं था। कमरे में बस एक टेबल और एक बेड था। रूम में आने-जाने का रास्ता एक ही है। गेट के बगल में एक खिड़की है वो भी बंद थी। अंदर सारे सामान इधर-उधर रखे हुए थे। इसके अलावा आधार कार्ड, पैन कार्ड भी बरामद हुए हैं। पहले सभी मौत को सुसाइड समझ रहे थे, थोड़ी ही देर में मामला बिल्कुल अलग लगने लगा, क्योंकि सभी के हाथ बंधे थे। एफएसएल के आने के बाद आगे की जांच बढ़ी सुबह 9:40 में पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने पहले दरवाजे को नहीं तोड़ा था। पहले पुलिस केयर टेकर से पूरी पूछताछ कर ली। जिसके बाद एफएसएल की टीम को सूचना दी गई। टीम पटना से आ रही थी। टीम को आने में दोपहर हो गए। तब के लिए कमरे के आसपास पुलिस ने घेराबंद कर दी। वहां किसी को भी नहीं जाने दिया जा रहा था। पटना से एफएसएल की टीम आई तब आगे की कार्रवाई हुई। SIT का गठन और बेंगलुरु पुलिस से संपर्क नालंदा एसपी भारत सोनी ने मामले की तह तक जाने के लिए 8 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इस टीम में राजगीर एसडीपीओ सुनील कुमार सिंह, अंचल निरीक्षक संजय कुमार, जिला आसूचना इकाई के प्रभारी आलोक कुमार, गिरियक अंचल निरीक्षक सुमंत कुमार, राजगीर थानाध्यक्ष रमण कुमार, नेहा कुमारी, नवीन कुमार और भानु प्रताप सिंह शामिल हैं। वहीं, पुलिस की एक 2 सदस्यीय टीम को जांच के लिए बेंगलुरु भेजा जा रहा है, ताकि परिवार के किसी अन्य सदस्य और उनके पुराने इतिहास का पता लगाया जा सके। विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता एसपी भारत सोनी ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह सामूहिक आत्महत्या का मामला लग रहा है, क्योंकि दरवाजा अंदर से पूरी तरह लॉक था। हालांकि, हाथ बंधे थे और मुंह पर टेप होने की वजह से पुलिस हर पहलू पर बारीकी से जांच कर रही है। मेडिकल बोर्ड की ओर से वीडियोग्राफी के साथ शवों का पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा। डॉग स्क्वायड और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह साफ हो पाएगी। फिलहाल धर्मशाला के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। लाशों को पोस्टमॉर्टम के लिए पटना भेजा जाएगा सदर अस्पताल के उपाअधीक्षक डॉक्टर राजीव रंजन ने बताया कि शव ग्रेड 3 स्टेज में पहुंच गया है। जिसके कारण एक्सपर्ट ऑपिनियन पोस्टमॉर्टम के लिए लेना जरूरी है। इसी कारण शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए पीएमसीएच भेजा जा रहा है। राजगीर के जैन धर्मशाला में मां, 2 बेटियां और 1 बेटे की लाशें फंदे से लटकी मिली। पुलिस जांच के अनुसार, जिस रस्सी से चारों की लाशें लटकी थी, वो नई थी। चारों की बॉडी डिकंपोज हो गई थी यानी स्किन निकलने लगे थे। धर्मशाला के केयर टेकर मुकेश जैन ने बताया, ‘ये लोग 31 जनवरी को आए थे। तब 1 दिन के लिए कमरा बुक कराया था। 1 फरवरी को इनकी बुकिंग खत्म होने वाली थी, लेकिन इनलोगों ने कमरे की बुकिंग को बढ़वा लिया। बेटे ने कहा था हमें 3-4 दिन के लिए और कमरा चाहिए। इसके वाद वे लोग कमरे से बाहर नहीं निकले।’ मृतकों की पहचान स्व. रत्नबाला राजु की पत्नी जीआर सुमंगला(78), बेटी शिल्पा जीआर (48), श्रुथा जीबी (43) और बेटा जीआर नागा प्रसाद (50) शामिल हैं। ये सभी कर्नाटक के तुमकुर जिले के बैलेडा पेटे गुब्बी के रहने वाले थे। धर्मशाला के कमरे में क्या था, धर्मशाला के लोगों को कब गड़बड़ी का शक हुआ, पुलिस क्या कर रही कार्रवाई, पढ़िए रिपोर्ट… पहले देखें कुछ तस्वीरें.. घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने कमरे को सील कर जांच पड़ताल की। कमरे से 1.18 लाख रुपए कैश और कई गहने मिले, जिसकी कीमत का आकलन अभी नहीं किया गया है। एसपी भारत सोनी ने बताया कि नागा प्रसाद और शिल्पा अविवाहित थे, जबकि श्रुथा तलाकशुदा थी और मां सुमंगला दिव्यांग थीं। कमरे से बरामद दस्तावेजों और धर्मशाला के रजिस्टर के आधार पर इनकी पहचान हुई है। मामले की जांच के लिए पुलिस की टीम बनी है, जो बेंगलुरू जाकर जांच करेगी और पूरे परिवार के बारे में पता लगाएगी। लोग शौचालय की बदबू समझकर इग्नोर कर रहे थे लाश की बदबू 5 फरवरी से फैलने लगी थी, लेकिन धर्मशाला में रह रहे लोग समझ नहीं पाए। कमरे के बगल में एक गलियारा है। जहां से लोग आना-जाना करते हैं। वहां एक शौचालय भी है। लोगों को लग रहा था शौचालय की बदबू फैल रही है। धर्मशाला के केयर टेकर अनुसार, ये लोग 4 दिनों से नहीं दिख रहे थे। कमरा भी नहीं खुल रहा था। बदबू की वजह से शक हुआ तो 6 फरवरी (शुक्रवार) की सुबह पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने दरवाजे के छेद से कमरे में झांक कर देखा तो लाशें लटकी देखी। पहले पुलिस को लगा कि कमरे में 2 महिला और 2 पुरुष हैं। मौके पर मजिस्ट्रेट को बुलाया गया और दरवाजे को तोड़ा गया। तब पता चला कि 3 महिलाएं और पुरूष 1 की लाशें हैं। कमरे में एक टेबल-बेड था, सामान इधर-उधर पड़े थे धर्मशाला का कमरा ज्यादा बड़ा नहीं था। कमरे में बस एक टेबल और एक बेड था। रूम में आने-जाने का रास्ता एक ही है। गेट के बगल में एक खिड़की है वो भी बंद थी। अंदर सारे सामान इधर-उधर रखे हुए थे। इसके अलावा आधार कार्ड, पैन कार्ड भी बरामद हुए हैं। पहले सभी मौत को सुसाइड समझ रहे थे, थोड़ी ही देर में मामला बिल्कुल अलग लगने लगा, क्योंकि सभी के हाथ बंधे थे। एफएसएल के आने के बाद आगे की जांच बढ़ी सुबह 9:40 में पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने पहले दरवाजे को नहीं तोड़ा था। पहले पुलिस केयर टेकर से पूरी पूछताछ कर ली। जिसके बाद एफएसएल की टीम को सूचना दी गई। टीम पटना से आ रही थी। टीम को आने में दोपहर हो गए। तब के लिए कमरे के आसपास पुलिस ने घेराबंद कर दी। वहां किसी को भी नहीं जाने दिया जा रहा था। पटना से एफएसएल की टीम आई तब आगे की कार्रवाई हुई। SIT का गठन और बेंगलुरु पुलिस से संपर्क नालंदा एसपी भारत सोनी ने मामले की तह तक जाने के लिए 8 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इस टीम में राजगीर एसडीपीओ सुनील कुमार सिंह, अंचल निरीक्षक संजय कुमार, जिला आसूचना इकाई के प्रभारी आलोक कुमार, गिरियक अंचल निरीक्षक सुमंत कुमार, राजगीर थानाध्यक्ष रमण कुमार, नेहा कुमारी, नवीन कुमार और भानु प्रताप सिंह शामिल हैं। वहीं, पुलिस की एक 2 सदस्यीय टीम को जांच के लिए बेंगलुरु भेजा जा रहा है, ताकि परिवार के किसी अन्य सदस्य और उनके पुराने इतिहास का पता लगाया जा सके। विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता एसपी भारत सोनी ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह सामूहिक आत्महत्या का मामला लग रहा है, क्योंकि दरवाजा अंदर से पूरी तरह लॉक था। हालांकि, हाथ बंधे थे और मुंह पर टेप होने की वजह से पुलिस हर पहलू पर बारीकी से जांच कर रही है। मेडिकल बोर्ड की ओर से वीडियोग्राफी के साथ शवों का पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा। डॉग स्क्वायड और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह साफ हो पाएगी। फिलहाल धर्मशाला के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। लाशों को पोस्टमॉर्टम के लिए पटना भेजा जाएगा सदर अस्पताल के उपाअधीक्षक डॉक्टर राजीव रंजन ने बताया कि शव ग्रेड 3 स्टेज में पहुंच गया है। जिसके कारण एक्सपर्ट ऑपिनियन पोस्टमॉर्टम के लिए लेना जरूरी है। इसी कारण शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए पीएमसीएच भेजा जा रहा है।


