गया में दो बच्चों को मिला नया परिवार:प्रशासन की निगरानी में दत्तक ग्रहण, एक पश्चिम बंगाल तो दूसरी तमिलनाडु के परिवार ने अपनाया

गया में दो बच्चों को मिला नया परिवार:प्रशासन की निगरानी में दत्तक ग्रहण, एक पश्चिम बंगाल तो दूसरी तमिलनाडु के परिवार ने अपनाया

गया में दत्तक ग्रहण प्रक्रिया के तहत दो बालिकाओं को विधिवत अभिभावकों के सौंपा गया। इस मौके पर एक बालिका को पश्चिम बंगाल के दंपति, जबकि दूसरी बालिका को तमिलनाडु की एकल तलाकशुदा महिला को दत्तक ग्रहण में दिया गया। पूरी दत्तक ग्रहण प्रक्रिया जिला प्रशासन की निगरानी में तय कानूनी प्रावधानों के अनुसार संपन्न कराई गई। सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई, गया और बाल संरक्षण पदाधिकारी, गया ने सभी आवश्यक औपचारिकताओं का पालन सुनिश्चित किया। प्रक्रिया के दौरान बच्चों के हित, सुरक्षा और भविष्य को प्राथमिकता में रखा गया। इस मौके पर विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान (SAA), गया के समन्वयक भी मौजूद रहे। कानून और CARA गाइडलाइन के तहत पूरी हुई प्रक्रिया अधिकारियों ने बताया कि दत्तक ग्रहण की संपूर्ण प्रक्रिया किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015, केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के दिशा-निर्देशों के अनुसार पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ पूरी की गई। दत्तक ग्रहण से पहले अभिभावकों की पात्रता जांच, दस्तावेजों का कानूनी सत्यापन और अन्य सभी चरणबद्ध प्रक्रियाएं पूरी की गईं। दत्तक ग्रहण सिर्फ कानूनी नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी भी जिला बाल संरक्षण इकाई के अधिकारियों ने कहा कि दत्तक ग्रहण केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि बच्चों को सुरक्षित, स्थिर और स्नेहमय पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराने की एक महत्वपूर्ण सामाजिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने बताया कि दत्तक ग्रहण के बाद बच्चों के पुनर्वास और देखरेख को लेकर समय-समय पर फॉलोअप किया जाएगा, ताकि उनके विकास में कोई बाधा न आए। नागरिकों से आगे आने की अपील अधिकारियों ने दत्तक ग्रहण करने वाले अभिभावकों को शुभकामनाएं देते हुए बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। साथ ही आम नागरिकों से अपील की कि वे विधिसम्मत प्रक्रिया के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों को परिवार का सहारा देने के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास समाज में संवेदनशीलता, समावेशन और उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करते हैं। गया में दत्तक ग्रहण प्रक्रिया के तहत दो बालिकाओं को विधिवत अभिभावकों के सौंपा गया। इस मौके पर एक बालिका को पश्चिम बंगाल के दंपति, जबकि दूसरी बालिका को तमिलनाडु की एकल तलाकशुदा महिला को दत्तक ग्रहण में दिया गया। पूरी दत्तक ग्रहण प्रक्रिया जिला प्रशासन की निगरानी में तय कानूनी प्रावधानों के अनुसार संपन्न कराई गई। सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई, गया और बाल संरक्षण पदाधिकारी, गया ने सभी आवश्यक औपचारिकताओं का पालन सुनिश्चित किया। प्रक्रिया के दौरान बच्चों के हित, सुरक्षा और भविष्य को प्राथमिकता में रखा गया। इस मौके पर विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान (SAA), गया के समन्वयक भी मौजूद रहे। कानून और CARA गाइडलाइन के तहत पूरी हुई प्रक्रिया अधिकारियों ने बताया कि दत्तक ग्रहण की संपूर्ण प्रक्रिया किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015, केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के दिशा-निर्देशों के अनुसार पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ पूरी की गई। दत्तक ग्रहण से पहले अभिभावकों की पात्रता जांच, दस्तावेजों का कानूनी सत्यापन और अन्य सभी चरणबद्ध प्रक्रियाएं पूरी की गईं। दत्तक ग्रहण सिर्फ कानूनी नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी भी जिला बाल संरक्षण इकाई के अधिकारियों ने कहा कि दत्तक ग्रहण केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि बच्चों को सुरक्षित, स्थिर और स्नेहमय पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराने की एक महत्वपूर्ण सामाजिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने बताया कि दत्तक ग्रहण के बाद बच्चों के पुनर्वास और देखरेख को लेकर समय-समय पर फॉलोअप किया जाएगा, ताकि उनके विकास में कोई बाधा न आए। नागरिकों से आगे आने की अपील अधिकारियों ने दत्तक ग्रहण करने वाले अभिभावकों को शुभकामनाएं देते हुए बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। साथ ही आम नागरिकों से अपील की कि वे विधिसम्मत प्रक्रिया के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों को परिवार का सहारा देने के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास समाज में संवेदनशीलता, समावेशन और उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करते हैं।  

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