नालंदा में 10 फरवरी से चलेगा फाइलेरिया उन्मूलन अभियान:11 प्रखंडों में 18.12 लाख लोगों को खिलाई जाएगी दवा; इमरजेंसी के लिए रिस्पॉन्स टीम तैनात

नालंदा में 10 फरवरी से चलेगा फाइलेरिया उन्मूलन अभियान:11 प्रखंडों में 18.12 लाख लोगों को खिलाई जाएगी दवा; इमरजेंसी के लिए रिस्पॉन्स टीम तैनात

नालंदा जिले के 11 प्रखंडों में 10 फरवरी से फाइलेरिया उन्मूलन के लिए व्यापक स्तर पर सर्वजन दवा सेवन अभियान (एमडीए) शुरू किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत 18 लाख 12 हजार 203 लोगों को घर-घर जाकर निशुल्क दवा खिलाई जाएगी। जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने अधिकारियों को अभियान की सफलता के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करते हुए इसे जन स्वास्थ्य के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। डीएम ने सभी संबंधित अधिकारियों और कार्यकर्ताओं से अभियान को सफल बनाने की अपील की है। 14 दिवसीय अभियान की रूपरेखा एसीएमओ सह गैर संचारी रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. राम मोहन सहाय ने बताया कि अभियान के लिए विस्तृत माइक्रो प्लान तैयार किया गया है। 14 दिनों तक चलने वाले इस अभियान में दो-दो आशा कार्यकर्ताओं की टीमें गठित की गई हैं, जो घर-घर जाकर लोगों को दवा खिलाएंगी। विशेष बात यह है कि जीविका से जुड़े परिवारों के लिए 11 फरवरी को विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा जो लोग किसी कारणवश दवा लेने से छूट जाएं, वे 15 से 28 फरवरी तक अपने नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्रों पर जाकर दवा प्राप्त कर सकेंगे। दवा की मात्रा और खुराक चिह्नित प्रखंडों के आशा कार्यकर्ताओं के पास पर्याप्त मात्रा में दवा पहुंचा दी गई है। उम्र के अनुसार दवा की खुराक निर्धारित की गई है। 2 से 5 वर्ष के बच्चे को अल्बेंडाजोल और डीईसी की एक-एक गोली, 5 से 15 वर्ष के किशोर को अल्बेंडाजोल की एक और डीईसी की दो गोली, 15 वर्ष से अधिक उम्र के लोगो को अल्बेंडाजोल की एक और डीईसी की तीन गोली दी जाएगी। सावधानियां और आपातकालीन व्यवस्था डॉ. सहाय ने स्पष्ट किया कि यह दवा भोजन के बाद ही लेनी है। गर्भवती महिलाओं, गंभीर रूप से बीमार बुजुर्गों और दो साल से कम उम्र के बच्चों को यह दवा नहीं दी जाएगी। फाइलेरिया एक गंभीर बीमारी है जिसके लक्षण प्रकट होने में 5 से 15 साल तक का लंबा समय लग सकता है। दवा सेवन के बाद कुछ लोगों को उल्टी या चक्कर आ सकते हैं, लेकिन यह दवा के काम करने का संकेत है । 10-15 मिनट आराम करने से स्थिति सामान्य हो जाती है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रत्येक प्रखंड में विशेष रिस्पॉन्स टीम तैनात रहेगी। आशा कार्यकर्ताओं के पास सेफ्टी किट भी उपलब्ध रहेगा, जिसमें आपातकालीन दवाएं शामिल हैं। संबंधित सीएचओ भी स्थिति पर नजर रखेंगे। प्रखंडवार लक्ष्य किया गया तय विभिन्न प्रखंडों में निर्धारित लक्ष्य इस प्रकार हैं, बिहारशरीफ (3,36,273), इस्लामपुर (2,60,128), एकंगरसराय (1,91,597), नूरसराय (1,93,016), सिलाव (1,68,991), चंडी (1,70,170), रहुई (1,59,534), सरमेरा (1,08,642), परबलपुर (78,749), बिंद (76,626), और थरथरी (75,909)। हरनौत, राजगीर और हिलसा समेत जिले के नौ प्रखंडों में यह अभियान नहीं चलाया जाएगा। नालंदा जिले के 11 प्रखंडों में 10 फरवरी से फाइलेरिया उन्मूलन के लिए व्यापक स्तर पर सर्वजन दवा सेवन अभियान (एमडीए) शुरू किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत 18 लाख 12 हजार 203 लोगों को घर-घर जाकर निशुल्क दवा खिलाई जाएगी। जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने अधिकारियों को अभियान की सफलता के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करते हुए इसे जन स्वास्थ्य के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। डीएम ने सभी संबंधित अधिकारियों और कार्यकर्ताओं से अभियान को सफल बनाने की अपील की है। 14 दिवसीय अभियान की रूपरेखा एसीएमओ सह गैर संचारी रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. राम मोहन सहाय ने बताया कि अभियान के लिए विस्तृत माइक्रो प्लान तैयार किया गया है। 14 दिनों तक चलने वाले इस अभियान में दो-दो आशा कार्यकर्ताओं की टीमें गठित की गई हैं, जो घर-घर जाकर लोगों को दवा खिलाएंगी। विशेष बात यह है कि जीविका से जुड़े परिवारों के लिए 11 फरवरी को विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा जो लोग किसी कारणवश दवा लेने से छूट जाएं, वे 15 से 28 फरवरी तक अपने नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्रों पर जाकर दवा प्राप्त कर सकेंगे। दवा की मात्रा और खुराक चिह्नित प्रखंडों के आशा कार्यकर्ताओं के पास पर्याप्त मात्रा में दवा पहुंचा दी गई है। उम्र के अनुसार दवा की खुराक निर्धारित की गई है। 2 से 5 वर्ष के बच्चे को अल्बेंडाजोल और डीईसी की एक-एक गोली, 5 से 15 वर्ष के किशोर को अल्बेंडाजोल की एक और डीईसी की दो गोली, 15 वर्ष से अधिक उम्र के लोगो को अल्बेंडाजोल की एक और डीईसी की तीन गोली दी जाएगी। सावधानियां और आपातकालीन व्यवस्था डॉ. सहाय ने स्पष्ट किया कि यह दवा भोजन के बाद ही लेनी है। गर्भवती महिलाओं, गंभीर रूप से बीमार बुजुर्गों और दो साल से कम उम्र के बच्चों को यह दवा नहीं दी जाएगी। फाइलेरिया एक गंभीर बीमारी है जिसके लक्षण प्रकट होने में 5 से 15 साल तक का लंबा समय लग सकता है। दवा सेवन के बाद कुछ लोगों को उल्टी या चक्कर आ सकते हैं, लेकिन यह दवा के काम करने का संकेत है । 10-15 मिनट आराम करने से स्थिति सामान्य हो जाती है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रत्येक प्रखंड में विशेष रिस्पॉन्स टीम तैनात रहेगी। आशा कार्यकर्ताओं के पास सेफ्टी किट भी उपलब्ध रहेगा, जिसमें आपातकालीन दवाएं शामिल हैं। संबंधित सीएचओ भी स्थिति पर नजर रखेंगे। प्रखंडवार लक्ष्य किया गया तय विभिन्न प्रखंडों में निर्धारित लक्ष्य इस प्रकार हैं, बिहारशरीफ (3,36,273), इस्लामपुर (2,60,128), एकंगरसराय (1,91,597), नूरसराय (1,93,016), सिलाव (1,68,991), चंडी (1,70,170), रहुई (1,59,534), सरमेरा (1,08,642), परबलपुर (78,749), बिंद (76,626), और थरथरी (75,909)। हरनौत, राजगीर और हिलसा समेत जिले के नौ प्रखंडों में यह अभियान नहीं चलाया जाएगा।  

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