लता दी केवल महान गायिका नहीं थीं, बल्कि वे साक्षात सरस्वती की पुत्री थीं : सार्जेंट मेजर

भास्कर न्यूज | गढ़वा संगीत कला महाविद्यालय में विश्व कोकिला स्वर्गीय लता मंगेशकर की चौथी पुण्यतिथि के अवसर पर संगीत भरी श्रद्धांजलि कार्यक्रम का भावपूर्ण आयोजन किया गया। इस अवसर पर पूरा परिसर सुरों की साधना, श्रद्धा और स्मृतियों से सराबोर नजर आया। कार्यक्रम की शुरुआत स्वर्गीय लता मंगेशकर की तस्वीर पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। जिसमें मुख्य अतिथि सार्जेंट मेजर संदीप कुमार, भाजपा के वरिष्ठ नेता उमेश कश्यप, डॉ अनिता तूफानी, एसएस वर्मा, अभिमन्यु पाठक, संगीत कला महाविद्यालय के निदेशक प्रमोद सोनी, जेएमएम के वरिष्ठ नेता नीलू खान सहित अन्य अतिथियों व वरिष्ठ कलाकारों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि सार्जेंट मेजर संदीप कुमार ने स्वर्गीय लता मंगेशकर के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लता दी केवल एक महान गायिका नहीं थीं, बल्कि वे साक्षात सरस्वती की पुत्री थीं। डॉ अनिता तूफानी ने अपने संबोधन में कहा कि लता मंगेशकर के कंठ में मानो स्वयं मां सरस्वती का वास था। रितुल विश्वास ने रहे न रहे हम।गीत के माध्यम से श्रोताओं की आंखें नम कर दीं। वहीं शबनम खातून ने तूने ओ रंगीले गीत की प्रस्तुति देकर तालियां बटोरीं। रौशन कुमार ने एक प्यार का नगमा है गाकर श्रोताओं को पुराने सुनहरे दौर की याद दिला दी। पिंकी सिन्हा ने सुन साहिबा सुन गीत प्रस्तुत किया। जबकि सुधांशु कुमार ने कोरा कागज था ये मन मेरा गीत गाकर श्रद्धांजलि को और भी भावनात्मक बना दिया। अंत में महाविद्यालय के निदेशक प्रमोद सोनी ने सभी अतिथियों, कलाकारों और उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लता मंगेशकर का संगीत युगों तक प्रेरणा देता रहेगा और ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से नई पीढ़ी को उनकी विरासत से जोड़ने का प्रयास जारी रहेगा।

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