सफाईकर्मी को रजनीकांत ने दी सोने की चेन, डायरेक्टर ने बताया ‘नकली’, सोशल मीडिया पर मचा बवाल

सफाईकर्मी को रजनीकांत ने दी सोने की चेन, डायरेक्टर ने बताया ‘नकली’, सोशल मीडिया पर मचा बवाल

Director Lenin Bharathi Calls Rajinikanth Fake: तमिल सिनेमा के सुपरस्टार रजनीकांत एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं, लेकिन इस बार वजह उनकी कोई फिल्म या बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड नहीं, बल्कि एक सामाजिक घटना और उस पर उठे सवाल हैं। हाल ही में चेन्नई की एक सफाईकर्मी महिला की ईमानदारी से प्रभावित होकर रजनीकांत ने उन्हें अपने घर बुलाया और सोने की चेन भेंट की। इस कदम को सोशल मीडिया पर जहां बड़े पैमाने पर सराहना मिली, वहीं फिल्ममेकर लेनिन भारती ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए अभिनेता को ‘फेक फिलैंथ्रोपिस्ट’ तक कह डाला। क्या है पूरा मामला, चलिए जानते हैं।

कैसे शुरू हुआ पूरा मामला? (Director Lenin Bharathi Calls Rajinikanth Fake)

दरअसल, ये पूरा मामला तब शुरू हुआ जब टी नगर इलाके में काम करने वाली सफाईकर्मी पद्मा को सड़क पर गहनों से भरा एक पाउच मिला। पद्मा ने बिना किसी लालच के उसे अपने अधिकारियों को सौंपा और बाद में वो पाउच पुलिस के जरिए असली मालिकों तक पहुंचा दिया गया। पद्मा की इस ईमानदारी की खबर जब रजनीकांत तक पहुंची तो उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर उनसे मुलाकात की इच्छा जताई।

रजनीकांत ने दी सोने की चेन

इसके बाद पद्मा को पोएस गार्डन स्थित रजनीकांत के आवास पर बुलाया गया, जहां अभिनेता ने उन्हें सम्मानित किया और एक सोने की चेन भेंट की। इस मुलाकात की तस्वीरें जैसे ही सोशल मीडिया पर सामने आईं, प्रशंसकों ने इसे रजनीकांत की दरियादिली और विनम्रता का उदाहरण बताया।

लेनिन भारती ने रजनीकांत पर बोला हमला

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर निर्देशक लेनिन भारती का नजरिया बिल्कुल अलग था। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तस्वीर साझा करते हुए सवाल उठाया कि जब सफाईकर्मी अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रहे थे, तब रजनीकांत कहां थे। भारती ने ये भी आरोप लगाया कि किसी व्यक्ति को सिर्फ उसकी वर्दी के जरिए पहचानकर दानवीरता दिखाना दिखावटी परोपकार है। उनके मुताबिक, असली समाजसेवा वो होती है जो लंबे समय तक किसी वर्ग के हक और सम्मान के लिए खड़ी हो।

Director Lenin Bharathi Calls Rajinikanth Fake

सोशल मीडिया पर मचा बवाल

लेनिन भारती की टिप्पणी के बाद ये मामला सिर्फ एक दान या सम्मान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गया। एक वर्ग का मानना है कि किसी की ईमानदारी को पहचानना और सम्मान देना गलत नहीं है, चाहे वो छोटा कदम ही क्यों न हो। वहीं दूसरा वर्ग ये सवाल उठा रहा है कि क्या ऐसे साहसिक कदम वास्तविक बदलाव ला सकते हैं या फिर ये सिर्फ छवि निर्माण का हिस्सा हैं।

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