मुजफ्फरपुर के बड़गांव में पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हुई है। वाहन जांच के दौरान शुरू हुआ विवाद पत्थरबाजी तक पहुंच गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए क्षेत्र में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। विरोध में लोगों ने रोड जाम कर दिया। पुलिसकर्मियों पर सरपंच की पिटाई का आरोप पियर थाना पुलिस वाहन चेकिंग कर रही थी। इस दौरान एक युवक को पकड़ा और उससे पूछताछ शुरू की गई। स्थानीय सरपंच लाल बाबू सहनी ने इसमें हस्तक्षेप किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सरपंच ने युवक को छोड़ने और स्थानीय स्तर पर चेकिंग न करने का दबाव बनाया। उनका तर्क था कि इससे कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है। इसके बाद पुलिस और सरपंच के बीच बहस हुई, जो जल्द ही मारपीट में बदल गई। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने सरपंच लाल बाबू सहनी की सड़क पर पिटाई कर दी। पिटाई की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, सड़कों पर उतर आए। एसडीपीओ मौके पर पहुंचे पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की और मुख्य सड़क को जाम कर दिया। इस झड़प में स्थिति बिगड़ती देख पुलिस को पीछे हटना पड़ा। घटना की सूचना मिलने पर सकरा के एसडीपीओ मनोज कुमार सिंह अतिरिक्त पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। आक्रोशित भीड़ को शांत करने का प्रयास किया और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। सरकारी कार्य में बाधा डालने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी मुजफ्फरपुर के एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने इस घटना पर कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी हालत में सरकारी कार्य में बाधा डालना स्वीकार्य नहीं है। जानकारी मिली है कि एक जनप्रतिनिधि ने विधि-व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास किया। मामले की गहन जांच के आदेश दिए गए हैं। अगर सरकारी काम में रुकावट पाई गई, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि अगर जांच में कोई पुलिसकर्मी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। मुजफ्फरपुर के बड़गांव में पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हुई है। वाहन जांच के दौरान शुरू हुआ विवाद पत्थरबाजी तक पहुंच गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए क्षेत्र में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। विरोध में लोगों ने रोड जाम कर दिया। पुलिसकर्मियों पर सरपंच की पिटाई का आरोप पियर थाना पुलिस वाहन चेकिंग कर रही थी। इस दौरान एक युवक को पकड़ा और उससे पूछताछ शुरू की गई। स्थानीय सरपंच लाल बाबू सहनी ने इसमें हस्तक्षेप किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सरपंच ने युवक को छोड़ने और स्थानीय स्तर पर चेकिंग न करने का दबाव बनाया। उनका तर्क था कि इससे कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है। इसके बाद पुलिस और सरपंच के बीच बहस हुई, जो जल्द ही मारपीट में बदल गई। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने सरपंच लाल बाबू सहनी की सड़क पर पिटाई कर दी। पिटाई की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, सड़कों पर उतर आए। एसडीपीओ मौके पर पहुंचे पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की और मुख्य सड़क को जाम कर दिया। इस झड़प में स्थिति बिगड़ती देख पुलिस को पीछे हटना पड़ा। घटना की सूचना मिलने पर सकरा के एसडीपीओ मनोज कुमार सिंह अतिरिक्त पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। आक्रोशित भीड़ को शांत करने का प्रयास किया और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। सरकारी कार्य में बाधा डालने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी मुजफ्फरपुर के एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने इस घटना पर कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी हालत में सरकारी कार्य में बाधा डालना स्वीकार्य नहीं है। जानकारी मिली है कि एक जनप्रतिनिधि ने विधि-व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास किया। मामले की गहन जांच के आदेश दिए गए हैं। अगर सरकारी काम में रुकावट पाई गई, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि अगर जांच में कोई पुलिसकर्मी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।


