मृत महिला के नाम 16 जिलों में 90 वाहन:करनाल में बुजुर्ग की पेंशन कटी,फैमिली आईडी की गलती से दो महीने से भटक रहा पीड़ित परिवार

मृत महिला के नाम 16 जिलों में 90 वाहन:करनाल में बुजुर्ग की पेंशन कटी,फैमिली आईडी की गलती से दो महीने से भटक रहा पीड़ित परिवार

करनाल में फैमिली आईडी की एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है, जिसने सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक बुजुर्ग व्यक्ति की मृत पत्नी के नाम पर दर्जनों वाहन दिखा दिए गए। जैसे ही फैमिली आईडी में यह एंट्री सामने आई, बुजुर्ग की बुढ़ापा पेंशन काट दी गई। जब पीड़ित ने फैमिली आईडी की पूरी जानकारी निकलवाई तो वह हैरान रह गया। उसकी मृत पत्नी को करोड़पति दर्शाते हुए अलग-अलग जिलों में दर्जनों वाहनों का मालिक दिखाया गया। करनाल निवासी रविंद्र मरवाहा ने बताया कि उनकी पत्नी सविता का देहांत 2019 में हो चुका है। उस समय फैमिली आईडी की व्यवस्था भी लागू नहीं हुई थी। इसके बावजूद फैमिली आईडी में उनकी मृत पत्नी के नाम पर मोटरसाइकिल, एक्टिवा स्कूटी, कार और ट्रक समेत कुल 90 वाहन दर्ज कर दिए गए। ये वाहन हरियाणा के 16 जिलों में बताए जा रहे हैं। फैमिली आईडी बनते ही सामने आई गड़बड़ी
रविंद्र मरवाहा ने बताया कि उन्होंने 2021 में अपनी फैमिली आईडी बनवाई थी। इसके बाद अचानक उनकी बुढ़ापा पेंशन बंद हो गई। जांच करने पर पता चला कि सिस्टम में उनकी पत्नी सविता के नाम पर बड़ी संख्या में वाहन दर्ज हैं। इनमें फरीदाबाद, सोनीपत, करनाल, पानीपत, रेवाड़ी, नारनौल, बहादुरगढ़, हिसार, गुरुग्राम, कुरुक्षेत्र, सिरसा और रोहतक जैसे जिले शामिल हैं। हकीकत सिर्फ एक बाइक और एक स्कूटी
बुजुर्ग का कहना है कि उनके पास केवल एक बाइक और एक एक्टिवा स्कूटी है, वह भी टूटी-फूटी हालत में। इसके अलावा उनके नाम या पत्नी के नाम पर कोई वाहन नहीं है। उन्होंने व्यंग्य में कहा कि अगर उनकी पत्नी के नाम इतनी गाड़ियां हैं तो सरकार वे सभी गाड़ियां उनके घर भिजवा दे, फिर उन्हें पेंशन की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। शिकायतों के बाद भी नहीं मिला समाधान
रविंद्र मरवाहा ने बताया कि उन्होंने संबंधित विभागों को लिखित शिकायतें दी हैं। इसके अलावा सीएम विंडो में भी शिकायत दर्ज करवाई, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया। दो महीने से उनकी बुढ़ापा पेंशन नहीं आई है। इसी पेंशन से वह अपना रोजमर्रा का खर्च चलाते थे। डिजिटल सिस्टम पर उठे सवाल
बुजुर्ग ने कहा कि उनकी पत्नी का देहांत 2019 में हो गया था, इसके बाद भी 2021 और उसके बाद खरीदी गई गाड़ियां उनकी पत्नी के नाम पर दिखाई जा रही हैं। उनका कहना है कि यह लापरवाही की हद है। फैमिली आईडी और डिजिटल सिस्टम की इस गलती ने एक बुजुर्ग को दफ्तरों के चक्कर काटने पर मजबूर कर दिया है। पीड़ित परिवार अब सिर्फ यही मांग कर रहा है कि फैमिली आईडी की गलती सुधारी जाए और बुढ़ापा पेंशन दोबारा शुरू की जाए।

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