जमुई में 36 साल से बंद 12 बेड का अस्पताल:बिल्डिंग पर स्थानीय लोगों का कब्जा, 10 हजार लोगों की सेहत खतरे में

जमुई में 36 साल से बंद 12 बेड का अस्पताल:बिल्डिंग पर स्थानीय लोगों का कब्जा, 10 हजार लोगों की सेहत खतरे में

जमुई में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली सामने आई है। मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर दूर बिजुआही स्थित स्वास्थ्य उपकेंद्र बीते 36 वर्षों से बंद पड़ा है। कभी 12 बेड वाला यह अस्पताल सर्जरी जैसी सुविधाओं के लिए जाना जाता था, लेकिन अब इसकी इमारत पर स्थानीय लोगों का कब्जा है और जमीन पर खेती की जा रही है। इस स्थिति के कारण दर्जनों गांवों के करीब 10 हजार लोगों को इलाज के लिए आज भी 12 किलोमीटर दूर सदर अस्पताल जाना पड़ता है। यह उपकेंद्र कभी इलाके की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माना जाता था। 12 बेड का उप स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किया गया था वर्ष 1965 में बिजुआही गांव के मिश्री मंडल, फुलेश्वर मंडल, लट्टू मंडल, गुल्लू मंडल, अमृत महतो, सौकी महतो, बेबी महतो और इतवारी महतो सहित दर्जनभर ग्रामीणों ने एक-एकड़ जमीन दान की थी। ग्रामीणों ने 1000 रुपये भी जमा कर स्वास्थ्य विभाग को दिए थे। इसके बाद यहां 12 बेड का उप स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किया गया था, जहां प्रसूता महिलाओं और गंभीर मरीजों की सर्जरी भी होती थी। हालांकि, 1990 के बाद विभागीय लापरवाही और उदासीनता के कारण यह उपकेंद्र धीरे-धीरे जर्जर होता चला गया। वर्तमान में पुरानी अस्पताल भवन पर स्थानीय लोगों का कब्जा है, जहां पशु चारा और अन्य सामग्री रखी जाती है। अस्पताल की जमीन पर धान का पुआल जमा किया गया है और खेती भी की जा रही है। नई छोटी इमारत में दो कर्मचारियों की नियुक्ति की गई बगल में बनी एक नई छोटी इमारत में दो कर्मचारियों की नियुक्ति तो की गई है, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार यह केंद्र शायद ही कभी खुलता है। ग्रामीणों का आरोप है कि कभी-कभार स्वास्थ्य कर्मी आते हैं और दवा वितरण करते हैं, लेकिन अधिकांश दवाएं एक्सपायर हो जाती हैं, जिन्हें अधिकारियों की नजर से बचाने के लिए पीछे फेंक दिया जाता है। 70 वर्षीय ग्रामीण सीताराम मंडल बताते हैं कि कभी इस अस्पताल में सदर अस्पताल के प्रसिद्ध सर्जन डॉक्टर अरुण प्रसाद द्वारा सर्जरी की जाती थी और दर्जनों गांवों के 10 हजार से अधिक लोगों का इलाज होता था। लेकिन आज हालात इतने खराब हैं कि प्रसूता महिलाओं और गंभीर मरीजों को रात में 12 किलोमीटर दूर सदर अस्पताल ले जाना पड़ता है। स्थानीय निवासी ने उपकेंद्र के विकास की मांग की स्थानीय निवासी शशि भूषण कुमार ने बताया कि ग्रामीणों ने कई बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, स्वास्थ्य मंत्री, स्थानीय विधायक और सिविल सर्जन को आवेदन देकर इस उपकेंद्र के विकास की मांग की, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। इस मामले पर सिविल सर्जन अशोक कुमार ने कहा कि उन्हें पहले इसकी जानकारी नहीं थी, अब मामला सामने आया है और जांच कराई जाएगी। जमुई में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली सामने आई है। मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर दूर बिजुआही स्थित स्वास्थ्य उपकेंद्र बीते 36 वर्षों से बंद पड़ा है। कभी 12 बेड वाला यह अस्पताल सर्जरी जैसी सुविधाओं के लिए जाना जाता था, लेकिन अब इसकी इमारत पर स्थानीय लोगों का कब्जा है और जमीन पर खेती की जा रही है। इस स्थिति के कारण दर्जनों गांवों के करीब 10 हजार लोगों को इलाज के लिए आज भी 12 किलोमीटर दूर सदर अस्पताल जाना पड़ता है। यह उपकेंद्र कभी इलाके की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माना जाता था। 12 बेड का उप स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किया गया था वर्ष 1965 में बिजुआही गांव के मिश्री मंडल, फुलेश्वर मंडल, लट्टू मंडल, गुल्लू मंडल, अमृत महतो, सौकी महतो, बेबी महतो और इतवारी महतो सहित दर्जनभर ग्रामीणों ने एक-एकड़ जमीन दान की थी। ग्रामीणों ने 1000 रुपये भी जमा कर स्वास्थ्य विभाग को दिए थे। इसके बाद यहां 12 बेड का उप स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किया गया था, जहां प्रसूता महिलाओं और गंभीर मरीजों की सर्जरी भी होती थी। हालांकि, 1990 के बाद विभागीय लापरवाही और उदासीनता के कारण यह उपकेंद्र धीरे-धीरे जर्जर होता चला गया। वर्तमान में पुरानी अस्पताल भवन पर स्थानीय लोगों का कब्जा है, जहां पशु चारा और अन्य सामग्री रखी जाती है। अस्पताल की जमीन पर धान का पुआल जमा किया गया है और खेती भी की जा रही है। नई छोटी इमारत में दो कर्मचारियों की नियुक्ति की गई बगल में बनी एक नई छोटी इमारत में दो कर्मचारियों की नियुक्ति तो की गई है, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार यह केंद्र शायद ही कभी खुलता है। ग्रामीणों का आरोप है कि कभी-कभार स्वास्थ्य कर्मी आते हैं और दवा वितरण करते हैं, लेकिन अधिकांश दवाएं एक्सपायर हो जाती हैं, जिन्हें अधिकारियों की नजर से बचाने के लिए पीछे फेंक दिया जाता है। 70 वर्षीय ग्रामीण सीताराम मंडल बताते हैं कि कभी इस अस्पताल में सदर अस्पताल के प्रसिद्ध सर्जन डॉक्टर अरुण प्रसाद द्वारा सर्जरी की जाती थी और दर्जनों गांवों के 10 हजार से अधिक लोगों का इलाज होता था। लेकिन आज हालात इतने खराब हैं कि प्रसूता महिलाओं और गंभीर मरीजों को रात में 12 किलोमीटर दूर सदर अस्पताल ले जाना पड़ता है। स्थानीय निवासी ने उपकेंद्र के विकास की मांग की स्थानीय निवासी शशि भूषण कुमार ने बताया कि ग्रामीणों ने कई बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, स्वास्थ्य मंत्री, स्थानीय विधायक और सिविल सर्जन को आवेदन देकर इस उपकेंद्र के विकास की मांग की, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। इस मामले पर सिविल सर्जन अशोक कुमार ने कहा कि उन्हें पहले इसकी जानकारी नहीं थी, अब मामला सामने आया है और जांच कराई जाएगी।  

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