नालंदा के 5 निजी कॉलेजों पर शिकंजा:स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में गड़बड़ी की आशंका; शिक्षा विभाग ने 10 फरवरी तक मांगा जांच रिपोर्ट

नालंदा के 5 निजी कॉलेजों पर शिकंजा:स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में गड़बड़ी की आशंका; शिक्षा विभाग ने 10 फरवरी तक मांगा जांच रिपोर्ट

बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका के बाद शिक्षा विभाग ने 13 जिलों के 60 निजी कॉलेजों की जन्मकुंडली खंगालने का फैसला किया है। नालंदा जिले के पांच संस्थान भी इस जांच के दायरे में हैं। अप्रत्याशित रूप से बढ़ते आवेदनों और डाटा अपलोड में अनियमितता ने विभाग को चौकन्ना कर दिया है। 10 फरवरी तक रिपोर्ट देने का अल्टीमेटम जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) आनंद विजय ने बताया कि लेखा डीपीओ की अगुआई में पांच सदस्यीय जांच टीम गठित की जाएगी, जो संस्थानों की धरातलीय हकीकत से लेकर कागजी जांच तक सूक्ष्मता से करेगी। हर हाल में 10 फरवरी तक जांच प्रतिवेदन योजना के राज्य प्रभारी पदाधिकारी मोहम्मद नसीम अहमद को सौंपना अनिवार्य किया गया है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जांच में सहयोग न करने या रिपोर्ट देरी से देने पर संबंधित संस्थानों के आवेदक छात्र-छात्राओं को योजना के लाभ से वंचित कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं, ऐसे संस्थानों की मान्यता पर भी खतरा मंडरा सकता है। लक्ष्य से 121 फीसदी आवेदन, लेकिन कुछ संस्थानों में संदिग्ध बढ़ोतरी
डीईओ आनंद विजय ने बताया कि बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत जिला निबंधन सह परामर्श केंद्रों पर शैक्षणिक सत्र 2024-25 में वार्षिक लक्ष्य से 117 प्रतिशत, जबकि सत्र 2025-26 में 121 प्रतिशत आवेदन प्राप्त हुए हैं। यह आंकड़ा सकारात्मक लग सकता है, लेकिन चिंता की बात यह है कि कुछ चिह्नित संस्थानों में आवेदकों की संख्या अप्रत्याशित और संदिग्ध रूप से बढ़ी है। इससे यह आशंका पैदा हुई है कि कुछ निजी संस्थान योजना का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं या फर्जी आवेदन दाखिल करवा रहे हैं। यह योजना उच्च और तकनीकी शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, ताकि धन की कमी शिक्षा में बाधा न बने। लेकिन अब इसमें गड़बड़ी की आशंका ने विभाग को कड़ी कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया है। पांच सदस्यीय टीम करेगी जांच जांच के लिए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (लेखा) की अध्यक्षता में विशेष समिति गठित की गई है। इस समिति में डीआरसीसी (जिला निबंधन सह परामर्श केंद्र) के प्रबंधक, सहायक प्रबंधक और बिहार राज्य वित्त निगम के अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल होंगे। जांच टीम निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान देगी भौतिक सत्यापन: संस्थान वास्तव में संचालित है या केवल कागजों पर मौजूद है? वैधानिक अनुमति: राज्य सरकार से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) मिला है या नहीं। पाठ्यक्रम और नामांकन: सत्रवार पाठ्यक्रम, कुल आवंटित सीटें और वास्तविक नामांकन की स्थिति। संबद्धता दस्तावेज: विश्वविद्यालय से संबद्धता संबंधी सभी कागजात की जांच। शुल्क संरचना: शैक्षणिक शुल्क की पारदर्शिता। बुनियादी ढांचा: कक्षा, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, कंप्यूटर लैब, सेमिनार हॉल, प्रशासनिक भवन की विस्तृत जानकारी। उपस्थिति रिकॉर्ड: छात्रों की नियमित उपस्थिति का सत्यापन। शिक्षक योग्यता: स्थायी और अस्थायी शिक्षकों की योग्यता और संख्या। गैर-शैक्षणिक स्टाफ: कर्मचारियों की वास्तविक संख्या। जियो-टैगिंग: भवन, कक्षाओं, कैंटीन की जियो टैग तस्वीरें लेना। छात्र प्रतिक्रिया: छात्रों का सीधा फीडबैक लेना। वेबसाइट: संस्थान की वेबसाइट की कार्यशील स्थिति। किन जिलों के कितने संस्थान जांच के दायरे में पटना में सबसे ज्यादा 28 संस्थानों की जांच होगी। नालंदा के 5, मुजफ्फरपुर, गया और वैशाली के 4-4, पूर्वी चंपारण और औरंगाबाद के 4-4, बेगूसराय के 2, तथा अररिया, सीवान, जमुई, पूर्णिया और सीतामढ़ी के 1-1 संस्थान जांच के दायरे में आए हैं। जांच के दायरे में नालंदा के ये 5 संस्थान निभा इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंस गौतम इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिक्स आरएल पॉलिटेक्निक कॉलेज केके विश्वविद्यालय डीपी सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका के बाद शिक्षा विभाग ने 13 जिलों के 60 निजी कॉलेजों की जन्मकुंडली खंगालने का फैसला किया है। नालंदा जिले के पांच संस्थान भी इस जांच के दायरे में हैं। अप्रत्याशित रूप से बढ़ते आवेदनों और डाटा अपलोड में अनियमितता ने विभाग को चौकन्ना कर दिया है। 10 फरवरी तक रिपोर्ट देने का अल्टीमेटम जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) आनंद विजय ने बताया कि लेखा डीपीओ की अगुआई में पांच सदस्यीय जांच टीम गठित की जाएगी, जो संस्थानों की धरातलीय हकीकत से लेकर कागजी जांच तक सूक्ष्मता से करेगी। हर हाल में 10 फरवरी तक जांच प्रतिवेदन योजना के राज्य प्रभारी पदाधिकारी मोहम्मद नसीम अहमद को सौंपना अनिवार्य किया गया है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जांच में सहयोग न करने या रिपोर्ट देरी से देने पर संबंधित संस्थानों के आवेदक छात्र-छात्राओं को योजना के लाभ से वंचित कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं, ऐसे संस्थानों की मान्यता पर भी खतरा मंडरा सकता है। लक्ष्य से 121 फीसदी आवेदन, लेकिन कुछ संस्थानों में संदिग्ध बढ़ोतरी
डीईओ आनंद विजय ने बताया कि बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत जिला निबंधन सह परामर्श केंद्रों पर शैक्षणिक सत्र 2024-25 में वार्षिक लक्ष्य से 117 प्रतिशत, जबकि सत्र 2025-26 में 121 प्रतिशत आवेदन प्राप्त हुए हैं। यह आंकड़ा सकारात्मक लग सकता है, लेकिन चिंता की बात यह है कि कुछ चिह्नित संस्थानों में आवेदकों की संख्या अप्रत्याशित और संदिग्ध रूप से बढ़ी है। इससे यह आशंका पैदा हुई है कि कुछ निजी संस्थान योजना का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं या फर्जी आवेदन दाखिल करवा रहे हैं। यह योजना उच्च और तकनीकी शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, ताकि धन की कमी शिक्षा में बाधा न बने। लेकिन अब इसमें गड़बड़ी की आशंका ने विभाग को कड़ी कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया है। पांच सदस्यीय टीम करेगी जांच जांच के लिए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (लेखा) की अध्यक्षता में विशेष समिति गठित की गई है। इस समिति में डीआरसीसी (जिला निबंधन सह परामर्श केंद्र) के प्रबंधक, सहायक प्रबंधक और बिहार राज्य वित्त निगम के अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल होंगे। जांच टीम निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान देगी भौतिक सत्यापन: संस्थान वास्तव में संचालित है या केवल कागजों पर मौजूद है? वैधानिक अनुमति: राज्य सरकार से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) मिला है या नहीं। पाठ्यक्रम और नामांकन: सत्रवार पाठ्यक्रम, कुल आवंटित सीटें और वास्तविक नामांकन की स्थिति। संबद्धता दस्तावेज: विश्वविद्यालय से संबद्धता संबंधी सभी कागजात की जांच। शुल्क संरचना: शैक्षणिक शुल्क की पारदर्शिता। बुनियादी ढांचा: कक्षा, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, कंप्यूटर लैब, सेमिनार हॉल, प्रशासनिक भवन की विस्तृत जानकारी। उपस्थिति रिकॉर्ड: छात्रों की नियमित उपस्थिति का सत्यापन। शिक्षक योग्यता: स्थायी और अस्थायी शिक्षकों की योग्यता और संख्या। गैर-शैक्षणिक स्टाफ: कर्मचारियों की वास्तविक संख्या। जियो-टैगिंग: भवन, कक्षाओं, कैंटीन की जियो टैग तस्वीरें लेना। छात्र प्रतिक्रिया: छात्रों का सीधा फीडबैक लेना। वेबसाइट: संस्थान की वेबसाइट की कार्यशील स्थिति। किन जिलों के कितने संस्थान जांच के दायरे में पटना में सबसे ज्यादा 28 संस्थानों की जांच होगी। नालंदा के 5, मुजफ्फरपुर, गया और वैशाली के 4-4, पूर्वी चंपारण और औरंगाबाद के 4-4, बेगूसराय के 2, तथा अररिया, सीवान, जमुई, पूर्णिया और सीतामढ़ी के 1-1 संस्थान जांच के दायरे में आए हैं। जांच के दायरे में नालंदा के ये 5 संस्थान निभा इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंस गौतम इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिक्स आरएल पॉलिटेक्निक कॉलेज केके विश्वविद्यालय डीपी सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन  

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