‘हरिनगर के ब्राह्मण टोला के बहुत सारे लड़के अचानक एक साथ मेरे घर में घुस आए। वो लोग रॉड लेकर आए थे। घर में घुसते ही सबसे पहले मां-पापा को मारा। फिर बाकी लोगों को भी मारने लगे। मैं बीमार थी, घर में सोई थी। मुझे भी रॉड से मारा। मेरे पूरे घर को तोड़ दिया।’ वो लोग जय बजरंगबली, जय माता दी के नारे लगा रहे थे। बोल रहे थे कि इसके हर एक सदस्य को मारेंगे। मैं उन्हें पहचानती हूं। हमलोग बहुत डर गए थे। उस समय ऐसा लग रहा था, कोई नहीं बचेगा। सब लोग जान बचाने के लिए भाग रहे थे।’ ये कहना है दरभंगा के कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के हरिनगर गांव की रहने वाली कोमल कुमारी का। मजदूरी के बकाया पैसे को लेकर शुरू हुआ विवाद अब जातीय टकराव का रूप ले चुका है। इस मामले में मारपीट, गाली-गलौज, धमकी, घर में घुसकर तोड़फोड़ और लूटपाट जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। ब्राह्मण परिवारों का कहना है कि पहले उन लोगों के साथ मारपीट हुई। पासवान परिवार का कहना है कि ब्राह्मणों ने उन्हें घर में घुसकर पीटा है। हरिनगर गांव के नामजद 70 ब्राह्मणों और 150 अज्ञात के खिलाफ ST-SC एक्ट में FIR दर्ज की गई है। अब तक इस मामले में 12 लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। दैनिक भास्कर की टीम ने हरिनगर गांव के दोनों पक्षों से बातचीत कर पूरे मामले को समझने की कोशिश की। विवाद की शुरुआत कहां से हुई, आखिर क्यों गांव के सभी ब्राह्मणों के नाम FIR हुई। घटना के बाद गांव में कैसे हालात हैं? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… सबसे पहले घटना के बाद गांव की 2 तस्वीरें.. क्या है पूरा विवाद गांव के कैलाश पासवान, जो पेशे से राजमिस्त्री हैं, गांव के ही हेमकांत झा के बहनोई का घर बनाने के लिए केरल गए थे। शुरुआत में उन्होंने 15 हजार रुपए मासिक मजदूरी पर काम किया, बाद में ठेकेदारी का काम संभाल लिया। ये 7 साल पहले का मामला है।
30 जनवरी को जब हेमकांत झा की बहन- बहनोई गांव आए थे, उसी दौरान कैलाश पासवान बकाए पैसे मांगने उनके घर पहुंचे। इस दौरान धक्का-मुक्की हुई, जिसका वीडियो भी वायरल हुआ। मामला पंचायत तक पहुंचा, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। आरोप है कि पंचायत से लौटते समय कैलाश पासवान ने गाली-गलौज की, उसी शाम पंचायत में पंच के रूप में शामिल श्रीकांत झा के साथ मारपीट भी की गई। 31 जनवरी को विवाद ने दो जातियों और पूरे गांव के बीच संघर्ष का रूप ले लिया। इस मामले में 70 लोगों को नामजद करते हुए प्राथमिकी दर्ज की गई है, जबकि करीब 150 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। 3 बार पंचायती हुई नहीं सुलझा विवादः संजू देवी हरिनगर गांव में हुए विवाद को लेकर शिकायकर्ता के पक्ष से कैलाश पासवान की पत्नी संजू देवी ने ब्राह्मण पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया, ‘मजदूरी का पैसा मांगने को लेकर विवाद हुआ था। मेरे पति साल 2015 में केरल में हेमकांत झा के बहनोई का घर बनाने गए थे।’ संजू देवी के अनुसार, ‘जब लंबे समय बाद हेमकांत झा के बहनोई गांव लौटे तो मेरे पति बकाए मजदूरी के ढाई लाख मांगने उनके घर गए। वहां मौजूद लोगों ने गाली-गलौज कर उन्हें भगा दिया। मामला 5–7 साल पुराना था, लेकिन पैसे की मांग पहले भी की गई थी। तीन बार पंचायत हुई, लेकिन फैसला नहीं हुआ।’ पैसे-गहने लूट लिए, अब बेटी की शादी कैसे होगी संजू देवी ने आरोप लगाया कि गांव के ब्राह्मण समुदाय के लोगों ने उनके परिवार के साथ मारपीट, तोड़फोड़ और लूटपाट की। घर से सारा पैसा, गहने और बाकी सामान लूट लिए गए हैं। ‘ये पैसा मैंने अपनी बेटी की शादी के लिए रखा था। 15 फरवरी को उसकी शादी तय है। अब समझ में नहीं आ रहा कि शादी कैसे होगी।’ दो लोगों के बीच विवाद था, तीसरा क्यों बोलेगा 30 जनवरी को विवाद खत्म होने के बाद श्रीकांत झा के साथ मारपीट को लेकर जब सवाल किया गया, तो संजू देवी ने कहा, “श्रीकांत झा हेमकांत झा का पक्ष ले रहे थे। पैसा हमारा बकाया था, उन्हें देना था। दो लोगों के बीच का मामला था, तीसरा आदमी क्यों बोले।“ संजू देवी के अनुसार, “इस घटना में मेरे परिवार के आठ लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (DMCH) में चल रहा है।“ घायलों में अविनाश राजगीर, रामतारा देवी, रामदाइ और कोमल कुमारी सहित अन्य शामिल हैं।
उन्होंने प्रशासन से न्याय की मांग करते हुए कहा कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। नवजात बच्चे को जबरन छीना, फिर गड्ढे में फेंक दिया – आरती देवी मायके आई कैलाश पासवान की बहन आरती देवी की डिलीवरी मात्र 15 दिन पहले हुई है। उन्होंने बताया, ‘घटना के समय मैं अपने नवजात बच्चे के साथ घर में सो रही थीं। घर पर दो भाई मौजूद थे। अचानक पता चला कि गांव में मारपीट शुरू हो गई है। देखते ही देखते करीब 300–400 लोग एक साथ घर पर टूट पड़े।‘ आरती देवी ने आगे बताया, ‘हमलावरों ने नवजात बच्चे को जबरन मेरी गोद से छीन लिया और गड्ढे में फेंक दिया। हम लोगों के साथ बेरहमी से मारपीट की। घर का सामान भी तोड़ दिया गया।’ ब्राह्मण परिवारों के पुरुषों ने छोड़ा गांव घटना के बाद गांव में भय का माहौल है। दोनों पक्ष के लोग सहमे हुए हैं। ब्राह्मण परिवारों के अधिकांश पुरुष गांव छोड़कर फरार हैं, जबकि महिलाएं, बुजुर्ग और युवतियां घरों में मौजूद हैं। गांव में शांति बनाए रखने के लिए पुलिस लगातार पेट्रोलिंग कर रही है। गांव में ब्राह्मण समुदाय की आबादी करीब 2000 है, जिनमें लगभग 1000 लोग बाहर रहते हैं और 1000 गांव में। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि प्राथमिकी में कई ऐसे लोगों के नाम भी शामिल है, जो लंबे समय से गांव से बाहर रह रहे हैं। हमारी पड़ताल के दौरान पूरे दिन गांव में प्रशासनिक अधिकारियों का आना-जाना लगा रहा। एसडीपीओ, एसडीएम सहित कई पुलिस अधिकारी गांव में कैंप करते नजर आए। देर शाम जिलाधिकारी और एसएसपी भी गांव पहुंचे और स्थिति की समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। मेरा बेटा निर्दोष है- हेमकांत झा की मां हेमकांत झा की मां प्रमिला देवी ने दूसरे पक्ष पर आरोप लगाते हुए अपना पक्ष रखा है। उन्होंने बताया कि ‘कैलाश पासवान को मेरे बेटे ने मजदूरी के लिए केरल ले जाकर काम पर लगाया था। शुरुआत में कैलाश पासवान को 15 हजार रुपए मासिक मजदूरी पर काम कराया गया। बाद में उसने ठेकेदारी के आधार पर काम करने की बात कही, जिसे बेटे ने स्वीकार कर लिया।‘ उन्होंने दावा किया, ‘मेरे बेटे ने कहा था कि काम की नापी के बाद जो भी राशि बनेगी, उसका भुगतान किया जाएगा। यदि वह केरल नहीं जाएगा, तो उसके पास पहले से 28 हजार रुपए अतिरिक्त भुगतान किया हुआ है।‘ प्रमिला देवी ने कहा, ‘गांव में कई बार मेरे बेटे के साथ मारपीट या विवाद की स्थिति बनी, लेकिन हर बार समाज के लोगों ने बीच-बचाव कर मामला शांत करा दिया। मेरा बेटा निर्दोष है, उसने गाली-गलौज और मारपीट नहीं की।‘
हमारे आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं, दूसरे पक्ष की प्राथमिकी दर्ज- प्रमिला देवी प्रमिला देवी के अनुसार, ‘30 जनवरी की रात पंच श्रीबाबू के साथ मारपीट की गई और उनकी बहन को भी घायल कर दिया गया। इसके बाद उनके बेटे ने प्राथमिकी दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने समय पर कार्रवाई नहीं की। जब विवाद बढ़ा तो उनके बेटे ने पुलिस को बुलाने की बात कही। पुलिस आई, लेकिन कैलाश पासवान पंचायत कराने की बात कहकर मौके से चला गया। इसके बाद वह गायब हो गया और उसके भाई पंचायत में पहुंचे।‘ प्रमिला देवी ने बताया कि, इस बीच दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई और पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने उनके बेटे को घर से बुलाकर गाड़ी में बैठाकर ले गई। प्रमिला देवी ने आरोप लगाया कि उनके पक्ष से दिए गए आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि दूसरे पक्ष की प्राथमिकी पर कार्रवाई शुरू कर दी गई। कई ऐसे लोगों को आरोपी बनाया गया है, जो गांव में रहते ही नहीं हैं। प्रमिला देवी ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि उनके बेटे को रिहा किया जाए और मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
मेरा पति मौके पर सिर्फ खड़े थे, फिर भी प्राथमिकी में नाम डाला वहीं देवकला देवी ने बताया, ‘मेरा पोता सूरत में रहकर पढ़ाई करता है और तीन दिन पहले ही गांव आया था, लेकिन उसका भी नाम प्राथमिकी में शामिल कर दिया गया है। उसके पिता सौरभ मिश्रा, घटना को देखने के लिए मौके पर खड़े थे, फिर भी उनके खिलाफ प्राथमिकी कर दी गई।’ देवकला देवी ने प्रशासन से मांग की है कि निर्दोष लोगों को मामले से अलग किया जाए और उनके पोते का नाम प्राथमिकी से हटाया जाए। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि निर्दोष लोगों को न्याय मिल सके। पैसे की मांग करने पर विवाद बढ़ा, फिर भीड़ हिंसक हो गई- मुखिया पंचायत के मुखिया विमल चंद्र खां ने दोनों पक्षों की भूमिका पर अपनी बात रखी है। उन्होंने बताया, ‘पासवान समुदाय के दो व्यक्ति केरल में जाकर मकान निर्माण का काम कर रहे थे, लेकिन मजदूरी के भुगतान को लेकर विवाद हुआ। इस मामले में कई बार पंचायत हुई, लेकिन मुझे इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई और न ही बैठक में बुलाया गया।’ उन्होंने बताया, ‘30 जनवरी को फिर विवाद बढ़ा, जब केरल से जुड़े हेमकांत झा के रिश्तेदारों से पासवान परिवार के लोग पैसे की मांग करने पहुंचे। इसी दौरान तनाव बढ़ गया। मारपीट की गई, जिसमें उनका सिर फट गया। इस मामले में कुशेश्वरस्थान थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।‘ आरोपियों पर SC-ST एक्ट में FIR- SSP पूरे मामले में बिरौली DSP प्रभाकर तिवारी ने बताया, ’31 जनवरी 2026 की रात पैसों के लेनदेन के विवाद को लेकर मारपीट हुई थी। इसमें 10 से अधिक लोग घायल हो गए थे। मामले में 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया।‘ पुलिस के मुताबिक, हरिनगर गांव निवासी असर्फी पासवान ने कुशेश्वरस्थान थाने में आवेदन दिया है। आवेदन में पूरे गांव को अभियुक्त बनाया गया । इसमें 70 ब्राह्मण नामजद आरोपी हैं। इसके अलावा 100–150 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। इसमें 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। इसके साथ ही पुलिस आगे की कार्रवाई में जुटी है। ‘हरिनगर के ब्राह्मण टोला के बहुत सारे लड़के अचानक एक साथ मेरे घर में घुस आए। वो लोग रॉड लेकर आए थे। घर में घुसते ही सबसे पहले मां-पापा को मारा। फिर बाकी लोगों को भी मारने लगे। मैं बीमार थी, घर में सोई थी। मुझे भी रॉड से मारा। मेरे पूरे घर को तोड़ दिया।’ वो लोग जय बजरंगबली, जय माता दी के नारे लगा रहे थे। बोल रहे थे कि इसके हर एक सदस्य को मारेंगे। मैं उन्हें पहचानती हूं। हमलोग बहुत डर गए थे। उस समय ऐसा लग रहा था, कोई नहीं बचेगा। सब लोग जान बचाने के लिए भाग रहे थे।’ ये कहना है दरभंगा के कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के हरिनगर गांव की रहने वाली कोमल कुमारी का। मजदूरी के बकाया पैसे को लेकर शुरू हुआ विवाद अब जातीय टकराव का रूप ले चुका है। इस मामले में मारपीट, गाली-गलौज, धमकी, घर में घुसकर तोड़फोड़ और लूटपाट जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। ब्राह्मण परिवारों का कहना है कि पहले उन लोगों के साथ मारपीट हुई। पासवान परिवार का कहना है कि ब्राह्मणों ने उन्हें घर में घुसकर पीटा है। हरिनगर गांव के नामजद 70 ब्राह्मणों और 150 अज्ञात के खिलाफ ST-SC एक्ट में FIR दर्ज की गई है। अब तक इस मामले में 12 लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। दैनिक भास्कर की टीम ने हरिनगर गांव के दोनों पक्षों से बातचीत कर पूरे मामले को समझने की कोशिश की। विवाद की शुरुआत कहां से हुई, आखिर क्यों गांव के सभी ब्राह्मणों के नाम FIR हुई। घटना के बाद गांव में कैसे हालात हैं? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… सबसे पहले घटना के बाद गांव की 2 तस्वीरें.. क्या है पूरा विवाद गांव के कैलाश पासवान, जो पेशे से राजमिस्त्री हैं, गांव के ही हेमकांत झा के बहनोई का घर बनाने के लिए केरल गए थे। शुरुआत में उन्होंने 15 हजार रुपए मासिक मजदूरी पर काम किया, बाद में ठेकेदारी का काम संभाल लिया। ये 7 साल पहले का मामला है।
30 जनवरी को जब हेमकांत झा की बहन- बहनोई गांव आए थे, उसी दौरान कैलाश पासवान बकाए पैसे मांगने उनके घर पहुंचे। इस दौरान धक्का-मुक्की हुई, जिसका वीडियो भी वायरल हुआ। मामला पंचायत तक पहुंचा, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। आरोप है कि पंचायत से लौटते समय कैलाश पासवान ने गाली-गलौज की, उसी शाम पंचायत में पंच के रूप में शामिल श्रीकांत झा के साथ मारपीट भी की गई। 31 जनवरी को विवाद ने दो जातियों और पूरे गांव के बीच संघर्ष का रूप ले लिया। इस मामले में 70 लोगों को नामजद करते हुए प्राथमिकी दर्ज की गई है, जबकि करीब 150 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। 3 बार पंचायती हुई नहीं सुलझा विवादः संजू देवी हरिनगर गांव में हुए विवाद को लेकर शिकायकर्ता के पक्ष से कैलाश पासवान की पत्नी संजू देवी ने ब्राह्मण पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया, ‘मजदूरी का पैसा मांगने को लेकर विवाद हुआ था। मेरे पति साल 2015 में केरल में हेमकांत झा के बहनोई का घर बनाने गए थे।’ संजू देवी के अनुसार, ‘जब लंबे समय बाद हेमकांत झा के बहनोई गांव लौटे तो मेरे पति बकाए मजदूरी के ढाई लाख मांगने उनके घर गए। वहां मौजूद लोगों ने गाली-गलौज कर उन्हें भगा दिया। मामला 5–7 साल पुराना था, लेकिन पैसे की मांग पहले भी की गई थी। तीन बार पंचायत हुई, लेकिन फैसला नहीं हुआ।’ पैसे-गहने लूट लिए, अब बेटी की शादी कैसे होगी संजू देवी ने आरोप लगाया कि गांव के ब्राह्मण समुदाय के लोगों ने उनके परिवार के साथ मारपीट, तोड़फोड़ और लूटपाट की। घर से सारा पैसा, गहने और बाकी सामान लूट लिए गए हैं। ‘ये पैसा मैंने अपनी बेटी की शादी के लिए रखा था। 15 फरवरी को उसकी शादी तय है। अब समझ में नहीं आ रहा कि शादी कैसे होगी।’ दो लोगों के बीच विवाद था, तीसरा क्यों बोलेगा 30 जनवरी को विवाद खत्म होने के बाद श्रीकांत झा के साथ मारपीट को लेकर जब सवाल किया गया, तो संजू देवी ने कहा, “श्रीकांत झा हेमकांत झा का पक्ष ले रहे थे। पैसा हमारा बकाया था, उन्हें देना था। दो लोगों के बीच का मामला था, तीसरा आदमी क्यों बोले।“ संजू देवी के अनुसार, “इस घटना में मेरे परिवार के आठ लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (DMCH) में चल रहा है।“ घायलों में अविनाश राजगीर, रामतारा देवी, रामदाइ और कोमल कुमारी सहित अन्य शामिल हैं।
उन्होंने प्रशासन से न्याय की मांग करते हुए कहा कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। नवजात बच्चे को जबरन छीना, फिर गड्ढे में फेंक दिया – आरती देवी मायके आई कैलाश पासवान की बहन आरती देवी की डिलीवरी मात्र 15 दिन पहले हुई है। उन्होंने बताया, ‘घटना के समय मैं अपने नवजात बच्चे के साथ घर में सो रही थीं। घर पर दो भाई मौजूद थे। अचानक पता चला कि गांव में मारपीट शुरू हो गई है। देखते ही देखते करीब 300–400 लोग एक साथ घर पर टूट पड़े।‘ आरती देवी ने आगे बताया, ‘हमलावरों ने नवजात बच्चे को जबरन मेरी गोद से छीन लिया और गड्ढे में फेंक दिया। हम लोगों के साथ बेरहमी से मारपीट की। घर का सामान भी तोड़ दिया गया।’ ब्राह्मण परिवारों के पुरुषों ने छोड़ा गांव घटना के बाद गांव में भय का माहौल है। दोनों पक्ष के लोग सहमे हुए हैं। ब्राह्मण परिवारों के अधिकांश पुरुष गांव छोड़कर फरार हैं, जबकि महिलाएं, बुजुर्ग और युवतियां घरों में मौजूद हैं। गांव में शांति बनाए रखने के लिए पुलिस लगातार पेट्रोलिंग कर रही है। गांव में ब्राह्मण समुदाय की आबादी करीब 2000 है, जिनमें लगभग 1000 लोग बाहर रहते हैं और 1000 गांव में। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि प्राथमिकी में कई ऐसे लोगों के नाम भी शामिल है, जो लंबे समय से गांव से बाहर रह रहे हैं। हमारी पड़ताल के दौरान पूरे दिन गांव में प्रशासनिक अधिकारियों का आना-जाना लगा रहा। एसडीपीओ, एसडीएम सहित कई पुलिस अधिकारी गांव में कैंप करते नजर आए। देर शाम जिलाधिकारी और एसएसपी भी गांव पहुंचे और स्थिति की समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। मेरा बेटा निर्दोष है- हेमकांत झा की मां हेमकांत झा की मां प्रमिला देवी ने दूसरे पक्ष पर आरोप लगाते हुए अपना पक्ष रखा है। उन्होंने बताया कि ‘कैलाश पासवान को मेरे बेटे ने मजदूरी के लिए केरल ले जाकर काम पर लगाया था। शुरुआत में कैलाश पासवान को 15 हजार रुपए मासिक मजदूरी पर काम कराया गया। बाद में उसने ठेकेदारी के आधार पर काम करने की बात कही, जिसे बेटे ने स्वीकार कर लिया।‘ उन्होंने दावा किया, ‘मेरे बेटे ने कहा था कि काम की नापी के बाद जो भी राशि बनेगी, उसका भुगतान किया जाएगा। यदि वह केरल नहीं जाएगा, तो उसके पास पहले से 28 हजार रुपए अतिरिक्त भुगतान किया हुआ है।‘ प्रमिला देवी ने कहा, ‘गांव में कई बार मेरे बेटे के साथ मारपीट या विवाद की स्थिति बनी, लेकिन हर बार समाज के लोगों ने बीच-बचाव कर मामला शांत करा दिया। मेरा बेटा निर्दोष है, उसने गाली-गलौज और मारपीट नहीं की।‘
हमारे आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं, दूसरे पक्ष की प्राथमिकी दर्ज- प्रमिला देवी प्रमिला देवी के अनुसार, ‘30 जनवरी की रात पंच श्रीबाबू के साथ मारपीट की गई और उनकी बहन को भी घायल कर दिया गया। इसके बाद उनके बेटे ने प्राथमिकी दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने समय पर कार्रवाई नहीं की। जब विवाद बढ़ा तो उनके बेटे ने पुलिस को बुलाने की बात कही। पुलिस आई, लेकिन कैलाश पासवान पंचायत कराने की बात कहकर मौके से चला गया। इसके बाद वह गायब हो गया और उसके भाई पंचायत में पहुंचे।‘ प्रमिला देवी ने बताया कि, इस बीच दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई और पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने उनके बेटे को घर से बुलाकर गाड़ी में बैठाकर ले गई। प्रमिला देवी ने आरोप लगाया कि उनके पक्ष से दिए गए आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि दूसरे पक्ष की प्राथमिकी पर कार्रवाई शुरू कर दी गई। कई ऐसे लोगों को आरोपी बनाया गया है, जो गांव में रहते ही नहीं हैं। प्रमिला देवी ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि उनके बेटे को रिहा किया जाए और मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
मेरा पति मौके पर सिर्फ खड़े थे, फिर भी प्राथमिकी में नाम डाला वहीं देवकला देवी ने बताया, ‘मेरा पोता सूरत में रहकर पढ़ाई करता है और तीन दिन पहले ही गांव आया था, लेकिन उसका भी नाम प्राथमिकी में शामिल कर दिया गया है। उसके पिता सौरभ मिश्रा, घटना को देखने के लिए मौके पर खड़े थे, फिर भी उनके खिलाफ प्राथमिकी कर दी गई।’ देवकला देवी ने प्रशासन से मांग की है कि निर्दोष लोगों को मामले से अलग किया जाए और उनके पोते का नाम प्राथमिकी से हटाया जाए। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि निर्दोष लोगों को न्याय मिल सके। पैसे की मांग करने पर विवाद बढ़ा, फिर भीड़ हिंसक हो गई- मुखिया पंचायत के मुखिया विमल चंद्र खां ने दोनों पक्षों की भूमिका पर अपनी बात रखी है। उन्होंने बताया, ‘पासवान समुदाय के दो व्यक्ति केरल में जाकर मकान निर्माण का काम कर रहे थे, लेकिन मजदूरी के भुगतान को लेकर विवाद हुआ। इस मामले में कई बार पंचायत हुई, लेकिन मुझे इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई और न ही बैठक में बुलाया गया।’ उन्होंने बताया, ‘30 जनवरी को फिर विवाद बढ़ा, जब केरल से जुड़े हेमकांत झा के रिश्तेदारों से पासवान परिवार के लोग पैसे की मांग करने पहुंचे। इसी दौरान तनाव बढ़ गया। मारपीट की गई, जिसमें उनका सिर फट गया। इस मामले में कुशेश्वरस्थान थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।‘ आरोपियों पर SC-ST एक्ट में FIR- SSP पूरे मामले में बिरौली DSP प्रभाकर तिवारी ने बताया, ’31 जनवरी 2026 की रात पैसों के लेनदेन के विवाद को लेकर मारपीट हुई थी। इसमें 10 से अधिक लोग घायल हो गए थे। मामले में 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया।‘ पुलिस के मुताबिक, हरिनगर गांव निवासी असर्फी पासवान ने कुशेश्वरस्थान थाने में आवेदन दिया है। आवेदन में पूरे गांव को अभियुक्त बनाया गया । इसमें 70 ब्राह्मण नामजद आरोपी हैं। इसके अलावा 100–150 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। इसमें 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। इसके साथ ही पुलिस आगे की कार्रवाई में जुटी है।


