प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की रफ्तार सुस्त, 30 से अधिक एनएच परियोजनाएं तय समय से पीछे, चार बड़ी परियोजनाएं पड़ी हैं ठप

प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की रफ्तार सुस्त, 30 से अधिक एनएच परियोजनाएं तय समय से पीछे, चार बड़ी परियोजनाएं पड़ी हैं ठप

पंजाब में निर्माणाधीन 37 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं गंभीर संकटों से जूझ रही हैं। इनमें से 30 ऐसी परियोजनाएं हैं जिनकी निर्धारित समय-सीमा कई वर्ष पहले ही समाप्त हो चुकी है, लेकिन अब तक ये कार्य अधूरे पड़े हैं। पंजाब में अटकी हुई इन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति उस समय सामने आई, जब राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से परियोजनाओं की धीमी गति को लेकर सवाल पूछे। मंत्रालय के अनुसार भूमि अधिग्रहण में देरी, किसानों के विरोध प्रदर्शन, कानूनी अड़चनें और निर्माण सामग्री (पॉन्ड ऐश) की लागत से जुड़े विवादों के कारण कई परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा दिए गए लिखित उत्तर में बताया गया कि पंजाब में कुल 37 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं चल रही हैं, जिनमें से 30 से अधिक परियोजनाएं अपनी निर्धारित समय-सीमा पार कर चुकी हैं, जबकि चार ठप हैं। इसके अलावा 15 अन्य परियोजनाएँ स्वीकृत या आवंटित की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण, किसानों के विरोध, पॉन्ड ऐश के भुगतान से जुड़े विवाद और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण कम से कम चार बड़ी परियोजनाएँ पूरी तरह से रुक गई हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि दिल्ली–अमृतसर–कटड़ा एक्सप्रेसवे के तीन पैकेज और लुधियाना–रूपनगर परियोजना लगभग रद्द होने या पूरी तरह बंद होने के कगार पर हैं। इन परियोजनाओं पर जनता के टैक्स के हजारों करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जो अब खतरे में नजर आ रहे हैं। मंत्रालय के अनुसार भूमि अधिग्रहण में लंबी देरी, किसानों के लगातार धरने, राज्य के थर्मल प्लांटों द्वारा पॉन्ड ऐश की ढुलाई का खर्च न देना, मिट्टी की कमी, तथा रेलवे और सिंचाई विभागों की मंजूरियाँ—ये सभी कारण परियोजनाओं को वर्षों पीछे धकेल रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इतनी देरी के बावजूद न तो किसी ठेकेदार पर जुर्माना लगाया गया है और न ही किसी प्रशासनिक अधिकारी की जवाबदेही तय की गई है। रुकी परियोजनाओं को तुरंत शुरू कराया जाए:सीचेवाल पत्रकारों से बातचीत करते हुए संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि जब सभी अधिकार केंद्र सरकार के पास हैं, तो फिर पंजाब को विकास के नाम पर सिर्फ फाइलें और वादे ही क्यों मिल रहे हैं। उन्होंने मांग की कि रुकी हुई परियोजनाओं को तुरंत शुरू कराया जाए, दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और भूमि अधिग्रहण से पहले किसानों व स्थानीय लोगों के साथ बैठकर सहमति बनाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचा जा सके। वहीं मंत्रालय ने बताया है कि बैठकों, समीक्षाओं और ऑनलाइन प्रक्रियाओं के माध्यम से हालात सुधारने की कोशिश की जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पंजाब के लोग आज भी अधूरी सड़कों, टूटे बाइपासों और रुके हुए एक्सप्रेसवे की परेशानी झेल रहे हैं। वर्षों पीछे धकेल रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इतनी देरी के बावजूद न तो किसी ठेकेदार पर जुर्माना लगाया गया है और न ही किसी प्रशासनिक अधिकारी की जवाबदेही तय की गई है।

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