खगड़िया के परबत्ता थाना क्षेत्र में एक सड़क दुर्घटना के बाद दो इंटरमीडिएट छात्राएं परीक्षा देने से वंचित रह गईं। माधवपुर गांव की साक्षी कुमारी और मीनाक्षी कुमारी अपनी परीक्षा देने जा रही थीं, तभी एक अनियंत्रित बाइक ने उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। इस हादसे में दोनों छात्राएं और उनके अभिभावक गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना के बावजूद, दर्द से कराहती और चोटिल छात्राएं हिम्मत जुटाकर भगवान हाई स्कूल, गोगरी (जमालपुर) स्थित परीक्षा केंद्र पहुंचीं। वे किसी भी हाल में परीक्षा देना चाहती थीं। हालांकि, परीक्षा शुरू होने में मात्र एक मिनट की देरी होने के कारण उन्हें केंद्र में प्रवेश नहीं दिया गया। गेट पर तैनात पुलिसकर्मियों और केंद्राध्यक्ष ने नियमों का हवाला देते हुए छात्राओं को अंदर जाने से रोक दिया। छात्राओं ने रोते-बिलखते हुए अपनी मजबूरी बताई और प्रवेश के लिए गिड़गिड़ाया, लेकिन उनकी अपील अनसुनी कर दी गई। नियमों की कठोरता के आगे उनकी पीड़ा और आंसू बेअसर साबित हुए। अंततः, परीक्षा से वंचित होकर दोनों छात्राओं को भारी मन से वापस लौटना पड़ा। सड़क दुर्घटना का शारीरिक दर्द और भविष्य से जुड़ी परीक्षा छूटने का मानसिक आघात, इस दोहरी मार ने उन्हें और उनके परिजनों को झकझोर दिया है। इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में गहरा आक्रोश है। सामाजिक कार्यकर्ता लाल कुमार सिंह ने इस मामले पर चिंता व्यक्त करते हुए सवाल उठाया है कि क्या आपातकालीन परिस्थितियों में नियमों में मानवीय लचीलापन नहीं होना चाहिए? खगड़िया के परबत्ता थाना क्षेत्र में एक सड़क दुर्घटना के बाद दो इंटरमीडिएट छात्राएं परीक्षा देने से वंचित रह गईं। माधवपुर गांव की साक्षी कुमारी और मीनाक्षी कुमारी अपनी परीक्षा देने जा रही थीं, तभी एक अनियंत्रित बाइक ने उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। इस हादसे में दोनों छात्राएं और उनके अभिभावक गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना के बावजूद, दर्द से कराहती और चोटिल छात्राएं हिम्मत जुटाकर भगवान हाई स्कूल, गोगरी (जमालपुर) स्थित परीक्षा केंद्र पहुंचीं। वे किसी भी हाल में परीक्षा देना चाहती थीं। हालांकि, परीक्षा शुरू होने में मात्र एक मिनट की देरी होने के कारण उन्हें केंद्र में प्रवेश नहीं दिया गया। गेट पर तैनात पुलिसकर्मियों और केंद्राध्यक्ष ने नियमों का हवाला देते हुए छात्राओं को अंदर जाने से रोक दिया। छात्राओं ने रोते-बिलखते हुए अपनी मजबूरी बताई और प्रवेश के लिए गिड़गिड़ाया, लेकिन उनकी अपील अनसुनी कर दी गई। नियमों की कठोरता के आगे उनकी पीड़ा और आंसू बेअसर साबित हुए। अंततः, परीक्षा से वंचित होकर दोनों छात्राओं को भारी मन से वापस लौटना पड़ा। सड़क दुर्घटना का शारीरिक दर्द और भविष्य से जुड़ी परीक्षा छूटने का मानसिक आघात, इस दोहरी मार ने उन्हें और उनके परिजनों को झकझोर दिया है। इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में गहरा आक्रोश है। सामाजिक कार्यकर्ता लाल कुमार सिंह ने इस मामले पर चिंता व्यक्त करते हुए सवाल उठाया है कि क्या आपातकालीन परिस्थितियों में नियमों में मानवीय लचीलापन नहीं होना चाहिए?


