एमपी के किसानों की होगी बल्ले-बल्ले, केंद्र सरकार ने दिए 713 करोड़ रुपए

एमपी के किसानों की होगी बल्ले-बल्ले, केंद्र सरकार ने दिए 713 करोड़ रुपए

MP Kisan – मध्यप्रदेश में किसानों को सशक्त बनाने के लिए तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। यहां एआई आधारित डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री से पारदर्शी व प्रमाणिक कृषि डेटा व्यवस्था स्थापित की गई है। यह डिजिटल व्यवस्था डुप्लीकेशन और फर्जी लाभार्थियों पर प्रभावी रोक लगाएगी। भविष्य की सभी डिजिटल कृषि योजनाओं की मजबूत नींव भी बनेगी। इसके साथ ही जन समर्थ पोर्टल के माध्यम से किसानों को आसान कृषि ऋण की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि फार्मर रजिस्ट्री के शत-प्रतिशत अनुपालन वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। इतना ही नहीं, केंद्र सरकार ने 7 सौ करोड़ से ज्यादा राशि स्वीकृत की जिससे किसानों की माली हालत मजबूत बनाई जाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों को सशक्त बनाने और कृषि व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने के लिए तकनीक का खासा इस्तेमाल किया जा रहा है। एआई आधारित डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से राज्य में ग्रामीण डेटा प्रणाली को एक नई दिशा प्रदान की गई है।

एमपी में डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से खेत पर उपस्थित होकर फसल की फोटो लेकर जानकारी सुरक्षित की जा रही है। इससे फसल संबंधी डेटा पूरी तरह प्रमाणिक हो रहा है। जियो-फेंसिंग तकनीक से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सर्वे केवल वास्तविक खेत स्थल पर ही किया जाए। सर्वे डेटा का त्रिस्तरीय सत्यापन एआई, एमएल सिस्टम और पटवारी स्तर पर किया जा रहा है।

राज्य सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इंटरनेट उपलब्ध न होने की स्थिति में भी सर्वे की विश्वसनीयता बनी रहे। सर्वे के दौरान ली गई फोटो की प्रामाणिकता और सही लोकेशन की पुष्टि प्रणाली द्वारा की जाती है। सर्वे केवल निर्धारित समयावधि में ही संभव है और समय सीमा के बाहर या मोबाइल समय में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ होने पर सर्वे स्वतः रुक जाता है। एआई या एमएल एल्गोरिदम के माध्यम से डेटा का क्रॉस-वेरिफिकेशन कर मानवीय त्रुटियों की संभावना को न्यूनतम किया गया है। फसल क्षेत्र, उत्पादन अनुमान और योजनाओं के क्रियान्वयन में डेटा-ड्रिवन निर्णय लिए जा रहे हैं।

फार्मर रजिस्ट्री को एकीकृत डिजिटल प्रणाली के रूप में विकसित किया गया है। इसमें किसानों की पहचान, भूमि विवरण और योजना संबंधी जानकारी का केंद्रीकृत पंजीकरण एवं सत्यापन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में भूमि अभिलेखों का पूर्ण डिजिटल एकीकरण, स्थान आधारित रिकॉर्ड और बहु-स्तरीय डेटा जांच शामिल हैं। प्रत्येक किसान को 11 अंकीय विशिष्ट डिजिटल पहचान संख्या प्रदान की जा रही है, जिससे एक प्रमाणिक और सटीक किसान डेटाबेस (यूनिफाइड डिजिटल प्रोफाइल) तैयार हो रही है।

713 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृति प्राप्त हुई

सीएम डॉ. मोहन यादव ने बताया कि फार्मर रजिस्ट्री के निर्धारित मानकों का 100 प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। उन्होंने बताया कि विशेष केंद्रीय सहायता यानि एससीए योजना में केंद्र सरकार से वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए 713 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृति प्राप्त हुई है। योजना से किसानों की माली हालत सुधारी जाएगी। किसानों को कृषि, पशुपालन और कौशल विकास के माध्यम से स्वरोजगार व आय बढ़ाने के लिए अनुदान व सहायता दी जाएगी।

बता दें कि SCA योजना मुख्यतः अनुसूचित जाति उप-योजना (SCA to SCSP) या SCA to TSP) गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) परिवारों के आर्थिक उत्थान के लिए चलाई जा रही है। यह शत प्रतिशत केंद्र प्रायोजित योजना है। योजना में कृषि, पशुपालन और कौशल विकास के माध्यम से आय बढ़ाने के लिए अनुदान व सहायता दी जाती है।

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