MP News: मध्यप्रदेश के नीमच जिले से ममता की ऐसी रूहानी तस्वीर सामने आई कि जिसे देखकर हर कोई उसे सैल्यूट करता नजर आया कि संवेदनाएं अभी जिंदा हैं… जावद के रानपुर गांव की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कंचन बाई मेघवाल ने 20 मासूमों की जान बचाने के लिए मौत को गले लगा लिया। हजारों मधुमक्खियों के बीच ढाल बनकर खड़ी इस वीरांगना के बलिदान ने प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। अब सीएम मोहन यादव ने इस घटना पर संज्ञान लिया और मृतिका के परिवार को 4 लाख रुपए मुआवजा राशि देने का ऐलान किया है। वहीं उसके मासूम बच्चों का खर्च भी अब सरकार उठाएगी।
तिरपाल और साड़ी को बनाया ढाल और बचा ली बच्चों की जिंदगी
तीन दिन पहले सोमवार 1 फरवरी को सामने आए इस हादसले में रानपुर आंगनवाड़ी में किलकारियां गूंज रही थीं। जो अचानक चीखों में बदल गई। पेड़ से मधुमक्खियों के झुंड ने मासूमों पर हमला कर दिया। जब लोग जान बचाकर भाग रहे थे, तब कंचन बाई ही मौत से लड़ने मैदान में दौड़ गई। उसने अपनी साड़ी और पास पड़ी तिरपाल में बच्चों को लपेट लिया। हजारों मधुमक्खियां कंचन पर टूट पड़ीं। उनके डंकों से कंचन का शरीर नीला पड़ता जा रहा था। लेकिन उन्होंने तब तक हार नहीं मानी जब तक कि आखिरी बच्चा तक सुरक्षित नहीं पहुंच गया।
मुख्यमंत्री की बड़ी घोषणा: बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाएगी सरकार
कंचन बाई के इस अदम्य साहस और बलिदान को नमन करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने परिवार के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं:
- ₹4 लाख की सहायता: मुख्यमंत्री ने मानवीय आधार पर कंचन बाई के परिवार को ₹4 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।
- शिक्षा का जिम्मा: शहीद कंचन बाई के बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च अब राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
- शोक संवेदना: मुख्यमंत्री ने इस निधन को “अत्यंत दुखद व हृदयविदारक” बताते हुए गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है।
प्रशासन का ‘डंक’: बहादुरी के दावों को नकारा
हैरानी की बात यह है कि जहां मुख्यमंत्री सहायता का ऐलान कर रहे हैं और डिप्टी सीएम सहित तमाम जनप्रतिनिधि कंचन बाई को सलामी दे रहे हैं, वहीं नीमच जिला प्रशासन ने प्रेस नोट जारी कर इस बहादुरी को नकार दिया है। प्रशासन का दावा है कि उनकी मौत बच्चों को बचाने के दौरान नहीं हुई। इस विरोधाभास ने क्षेत्र में आक्रोश पैदा कर दिया है कि क्या प्रशासन वीरता पुरस्कार की जिम्मेदारी से बचने के लिए तथ्यों को दबा रहा है?
इन दिग्गजों ने सोशल मीडिया पर माना कंचन बाई का लोहा:
- जगदीश देवड़ा, उपमुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश
- सुधीर गुप्ता, सांसद, मंदसौर
- दिलीप सिंह परिहार, विधायक, नीमच
- ओमप्रकाश सखलेचा, विधायक, जावद
- अनिरुद्ध माधव मारू, विधायक, मनासा
बेसहारा परिवार को न्याय का इंतजार
कंचन बाई के पति शिवलाल पैरालिसिस (लकवा) से पीड़ित हैं और उनके तीन छोटे बच्चे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि कंचन बाई को मरणोपरांत राजकीय सम्मान दिया जाए और इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो कि आखिर प्रशासन उनकी शहादत को क्यों नकार रहा है।


