गया में भूमि सुधार कर्मियों का धरना:17 मांगों को पूरा करने की मांग, कहा- सरकार गंभीर नहीं, आंदोलन ही एकमात्र रास्ता बचा

गया में भूमि सुधार कर्मियों का धरना:17 मांगों को पूरा करने की मांग, कहा- सरकार गंभीर नहीं, आंदोलन ही एकमात्र रास्ता बचा

गयाजी में बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर आज राजस्व कर्मचारियों ने एक दिवसीय धरना दिया। धरने में शामिल कर्मचारियों ने राज्य सरकार की कथित दमनकारी नीति और राजस्व विभाग की ओर से अपने ही निर्णयों के क्रियान्वयन में की जा रही देरी पर नाराजगी जताई। मोर्चा ने 17 सूत्री मांगों को लेकर स्पष्ट कहा कि यदि सरकार ने जल्द ठोस पहल नहीं की, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। ग्रेड पे बढ़ाकर 4200 करने की मांग धरनास्थल पर जुटे कर्मचारियों ने ग्रेड पे बढ़ाकर 4200 करने, मोर्चा के साथ पूर्व में किए गए समझौते को शीघ्र लागू करने और सभी नवनियुक्त कर्मचारियों को गृह जिले में शीघ्र पदस्थापन देने की मांग उठाई। राजस्व कर्मियों को लैपटॉप, ईंधन भत्ता और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग की गई। कर्मचारियों का कहना था कि विभागीय कामकाज का बोझ लगातार बढ़ रहा है, लेकिन संसाधन और सुविधाएं उसी अनुपात में नहीं दी जा रहीं। सरकार और विभाग गंभीरता नहीं दिखा रहे धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि राजस्व विभाग ने कई निर्णय लिए। लेकिन आठ महीने बीत जाने के बाद भी उन पर अमल नहीं हुआ। इससे कर्मचारियों में असंतोष गहराता जा रहा है। उनका आरोप था कि बार-बार ज्ञापन देने और बातचीत के बावजूद सरकार और विभाग गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। ऐसे में आंदोलन ही एकमात्र रास्ता बचा है। राजस्व कर्मचारी सरकार की रीढ़ संघ नेताओं ने कहा कि राजस्व कर्मचारी सरकार की रीढ़ हैं। जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और समयबद्ध कामकाज इन्हीं पर निर्भर करता है। बावजूद इसके उनकी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। मोर्चा ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार और विभाग की होगी। धरने का नेतृत्व संघ के अध्यक्ष रितेश कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत नहीं, बल्कि कर्मचारियों के हक और सम्मान की लड़ाई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार जल्द सकारात्मक फैसला लेगी नहीं तो संघर्ष और व्यापक होगा। गयाजी में बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर आज राजस्व कर्मचारियों ने एक दिवसीय धरना दिया। धरने में शामिल कर्मचारियों ने राज्य सरकार की कथित दमनकारी नीति और राजस्व विभाग की ओर से अपने ही निर्णयों के क्रियान्वयन में की जा रही देरी पर नाराजगी जताई। मोर्चा ने 17 सूत्री मांगों को लेकर स्पष्ट कहा कि यदि सरकार ने जल्द ठोस पहल नहीं की, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। ग्रेड पे बढ़ाकर 4200 करने की मांग धरनास्थल पर जुटे कर्मचारियों ने ग्रेड पे बढ़ाकर 4200 करने, मोर्चा के साथ पूर्व में किए गए समझौते को शीघ्र लागू करने और सभी नवनियुक्त कर्मचारियों को गृह जिले में शीघ्र पदस्थापन देने की मांग उठाई। राजस्व कर्मियों को लैपटॉप, ईंधन भत्ता और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग की गई। कर्मचारियों का कहना था कि विभागीय कामकाज का बोझ लगातार बढ़ रहा है, लेकिन संसाधन और सुविधाएं उसी अनुपात में नहीं दी जा रहीं। सरकार और विभाग गंभीरता नहीं दिखा रहे धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि राजस्व विभाग ने कई निर्णय लिए। लेकिन आठ महीने बीत जाने के बाद भी उन पर अमल नहीं हुआ। इससे कर्मचारियों में असंतोष गहराता जा रहा है। उनका आरोप था कि बार-बार ज्ञापन देने और बातचीत के बावजूद सरकार और विभाग गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। ऐसे में आंदोलन ही एकमात्र रास्ता बचा है। राजस्व कर्मचारी सरकार की रीढ़ संघ नेताओं ने कहा कि राजस्व कर्मचारी सरकार की रीढ़ हैं। जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और समयबद्ध कामकाज इन्हीं पर निर्भर करता है। बावजूद इसके उनकी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। मोर्चा ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार और विभाग की होगी। धरने का नेतृत्व संघ के अध्यक्ष रितेश कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत नहीं, बल्कि कर्मचारियों के हक और सम्मान की लड़ाई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार जल्द सकारात्मक फैसला लेगी नहीं तो संघर्ष और व्यापक होगा।  

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