Hepatitis B Test: सुई के दर्द से डरते हैं? खुश हो जाइए! अब बिना तकलीफ के होगी गंभीर से गंभीर बीमारी की पहचान

Hepatitis B Test: सुई के दर्द से डरते हैं? खुश हो जाइए! अब बिना तकलीफ के होगी गंभीर से गंभीर बीमारी की पहचान

Hepatitis B Test: हेपेटाइटिस-B जैसी गंभीर बीमारी की जांच से अब डरना नहीं, लड़ना है। ऑस्ट्रेलिया में हुई एक रिसर्च में सामने आया कि उंगली से ली गई खून की एक बूंद से भी बीमारी की सटीक पहचान हो सकती है। इस जांच की रिपोर्ट सिर्फ एक घंटे में मिल जाएगी। इसके लिए लैब या अस्पताल में लंबी लाइन लगाने की जरूरत नहीं होगी।

जांच अब आसान और तेज

अभी तक हेपेटाइटिस-B की DNA जांच से मरीजों के मन में एक डर सा था। नस से खून, बड़ी लैब और कई बार रिपोर्ट आने में इतनी देरी हो जाती थी कि इलाज शुरू होने से पहले ही हालत बिगड़ जाती थी। लेकिन नई फिंगरस्टिक तकनीक से अब ये टेस्ट आसान हो गया है। उंगली से लिया गया थोड़ा-सा खून, और सिर्फ 60 मिनट में नतीजा। रिसर्च में यह साफ हुआ है कि यह जांच उतनी ही सटीक है जितनी पारंपरिक लैब टेस्ट, जिससे डॉक्टर तुरंत सही इलाज का फैसला ले सकते हैं।

अब बड़े अस्पताल की जरूरत नहीं

गांव, पहाड़ी इलाके और दूर-दराज बस्तियों में रहने वाले लोगों के लिए जांच हमेशा से ही मुश्किल थी। कई किलोमीटर दूर बार-बार अस्पताल के चक्कर और खर्च के कारण लोग जांच ही टाल देते थे। यह नई जांच छोटे स्वास्थ्य केंद्रों में भी की जा सकती है और इसे करने के लिए बहुत ज्यादा विशेषज्ञता की भी जरूरत नहीं होती। यही वजह है कि डॉक्टर मानते हैं कि यह तकनीक उन लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा सकती है, जो अब तक सिस्टम से बाहर रह जाते थे।

2030 तक 25.4 करोड़ लोगों के इलाज का लक्ष्य

हेपेटाइटिस-B बीमारी आज भी कई लोगों को प्रभावित कर रहा है और हर साल लाखों जानें ले रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह नई तकनीक ज्यादा लोगों की जांच संभव बनाएगी, जिससे बीमारी जल्दी पकड़ में आएगी और इलाज भी समय पर होगा। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार दुनिया में करीब 25.4 करोड़ लोग क्रॉनिक हेपेटाइटिस-B से पीड़ित हैं और हर साल 10 लाख से ज्यादा लोगों की मौत होती है। सिर्फ 14 प्रतिशत मरीजों की पहचान हो पाती है और केवल 8 प्रतिशत लोगों को ही इलाज मिल रहा है। 2030 तक इस बीमारी को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है।

हेपेटाइटिस-B से बचाव:

  1. समय पर जांच और इलाज से इस बीमारी को काबू में रखा जा सकता है।
  2. टीकाकरण जरूर कराएं।
  3. इस्तेमाल की हुई सीरिंज कभी न लगवाएं।
  4. खून चढ़वाते समय स्क्रीन किया हुआ खून ही लें।
  5. गर्भवती महिलाओं की जांच जरूरी।

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