प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भ्रष्ट आचरण का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव को रद्द कर नए सिरे से निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग की है। जन सुराज पार्टी की ओर से दायर रिट याचिका पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जायमॉल्या बागची की पीठ करेगी। आचार संहिता के दौरान महिलाओं को 10,000 रुपए देने का आरोप याचिका में आरोप लगाया गया है कि आचार संहिता लागू रहने के बावजूद राज्य सरकार ने महिलाओं को सीधे 10 हजार रुपए दिए। जन सुराज का कहना है कि यह कदम चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला है। इसे भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। पार्टी ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 112, 202 और 324 का उल्लंघन बताया है। नए लाभार्थियों को जोड़ना और भुगतान अवैध करार जन सुराज ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत चुनाव अवधि में नए लाभार्थियों को जोड़ने और उन्हें भुगतान किए जाने पर भी आपत्ति जताई है। याचिका में कहा गया है कि आचार संहिता लागू रहने के दौरान किसी भी नई योजना का विस्तार या भुगतान अवैध है। निर्वाचन आयोग से कार्रवाई के निर्देश की मांग पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि निर्वाचन आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 (भ्रष्ट आचरण) के तहत आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाए। याचिका में कहा गया है कि 25 से 35 लाख महिला मतदाताओं को सीधे वित्तीय लाभ देना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की भावना के खिलाफ है। जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं की तैनाती पर आपत्ति जन सुराज पार्टी ने दोनों चरणों के मतदान के दौरान स्वयं सहायता समूह ‘जीविका’ से जुड़ी लगभग 1.8 लाख महिला लाभार्थियों की मतदान केंद्रों पर तैनाती को भी अवैध और अनुचित बताया है। पार्टी का दावा है कि इससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हुई है। मुफ्त योजनाओं पर दिशानिर्देश बनाने की मांग याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह भी अनुरोध किया गया है कि वह एस. सुब्रमण्यम बालाजी बनाम तमिलनाडु राज्य (2013) मामले में दिए गए निर्देशों के अनुरूप मुफ्त योजनाओं, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण और कल्याणकारी योजनाओं को लेकर व्यापक दिशा निर्देश तैयार करने के लिए निर्वाचन आयोग को निर्देश दे। चुनाव से छह महीने पहले तक योजनाओं पर रोक की मांग जन सुराज पार्टी ने मांग की है कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से कम से कम छह महीने पहले तक ऐसी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए न्यूनतम समय सीमा तय की जाए, जिनका सीधा प्रभाव मतदाताओं और चुनावी प्रक्रिया पर पड़ता है। पार्टी का कहना है कि जब तक इस तरह के स्पष्ट नियम नहीं बनाए जाते, तब तक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना कठिन होगा। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भ्रष्ट आचरण का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव को रद्द कर नए सिरे से निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग की है। जन सुराज पार्टी की ओर से दायर रिट याचिका पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जायमॉल्या बागची की पीठ करेगी। आचार संहिता के दौरान महिलाओं को 10,000 रुपए देने का आरोप याचिका में आरोप लगाया गया है कि आचार संहिता लागू रहने के बावजूद राज्य सरकार ने महिलाओं को सीधे 10 हजार रुपए दिए। जन सुराज का कहना है कि यह कदम चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला है। इसे भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। पार्टी ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 112, 202 और 324 का उल्लंघन बताया है। नए लाभार्थियों को जोड़ना और भुगतान अवैध करार जन सुराज ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत चुनाव अवधि में नए लाभार्थियों को जोड़ने और उन्हें भुगतान किए जाने पर भी आपत्ति जताई है। याचिका में कहा गया है कि आचार संहिता लागू रहने के दौरान किसी भी नई योजना का विस्तार या भुगतान अवैध है। निर्वाचन आयोग से कार्रवाई के निर्देश की मांग पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि निर्वाचन आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 (भ्रष्ट आचरण) के तहत आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाए। याचिका में कहा गया है कि 25 से 35 लाख महिला मतदाताओं को सीधे वित्तीय लाभ देना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की भावना के खिलाफ है। जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं की तैनाती पर आपत्ति जन सुराज पार्टी ने दोनों चरणों के मतदान के दौरान स्वयं सहायता समूह ‘जीविका’ से जुड़ी लगभग 1.8 लाख महिला लाभार्थियों की मतदान केंद्रों पर तैनाती को भी अवैध और अनुचित बताया है। पार्टी का दावा है कि इससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हुई है। मुफ्त योजनाओं पर दिशानिर्देश बनाने की मांग याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह भी अनुरोध किया गया है कि वह एस. सुब्रमण्यम बालाजी बनाम तमिलनाडु राज्य (2013) मामले में दिए गए निर्देशों के अनुरूप मुफ्त योजनाओं, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण और कल्याणकारी योजनाओं को लेकर व्यापक दिशा निर्देश तैयार करने के लिए निर्वाचन आयोग को निर्देश दे। चुनाव से छह महीने पहले तक योजनाओं पर रोक की मांग जन सुराज पार्टी ने मांग की है कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से कम से कम छह महीने पहले तक ऐसी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए न्यूनतम समय सीमा तय की जाए, जिनका सीधा प्रभाव मतदाताओं और चुनावी प्रक्रिया पर पड़ता है। पार्टी का कहना है कि जब तक इस तरह के स्पष्ट नियम नहीं बनाए जाते, तब तक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना कठिन होगा।


