उप नगर ग्वालियर निवासी 60 वर्षीय शोभाराम पेट दर्द की शिकायत लेकर मुझे (डॉ.आशीष श्रीवास्तव) को सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की गैस्ट्रो सर्जरी की ओपीडी में दिखाने आया। मरीज ने बताया कि उसे एक साल से पेट में दर्द की शिकायत है। कई जगह दिखाया लेकिन आराम नहीं मिल रहा है। मरीज का चेकअप करने के बाद सीटी स्कैन सहित कुछ जांच कराई। सीटी स्कैन की जांच में पता चला कि उसकी पेनक्रियाज में 5 सेमी का ट्यूमर है। यह ट्यूमर तिल्ली, बाएं तरफ की किडनी और बड़ी आंत तक पहुंच चुका है। सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि तिल्ली, बाएं तरफ की किडनी और बड़ी आंत सहित कुछ महत्वपूर्ण नसों को बचाने की थी। साथ ही यह भी देखना था कि कहीं अधिक ब्लीडिंग न हो जाए, जिससे मरीज की जान खतरे में आ जाए। इन सब चुनौतियों को ध्यान में रखकर मैंने (डॉ.आशीष श्रीवास्तव) ने रैंप्स (रेडिकल एंटीग्रेड मॉड्यूलर पैनक्रियाटो स्प्लेनेक्टोमी एंड पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी स्लीव कॉलेक्टमी) पद्धति से ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। यह ट्यूमर तिल्ली, बाएं तरफ की किडनी, बड़ी आंत के साथ शरीर के कुछ महत्वपूर्ण अंगों तक पहुंच गया था। अगर ऑपरेशन के दौरान इन अंगों को कोई क्षति पहुंचती तो मरीज की जान भी जा सकती है। लिहाजा ऑपरेशन में विशेष सावधानी बरती गई। इसी का परिणाम निकला कि 6 घंटे चले इस ऑपरेशन में ट्यूमर तो सफलता पूर्वक बाहर निकाल ही लिया गया। साथ ही बायीं तरफ की किडनी को आधा हिस्सा बचा लिया गया। साथ ही बड़ी आंत सहित किसी भी अंग को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। आमतौर पर ऐसे ऑपरेशन में काफी ब्लीडिंग होने से मरीज को ब्लड चढ़ाना पड़ता है लेकिन इस ऑपरेशन में मरीज को ब्लड चढ़ाने की आवश्यकता नहीं हुई। सप्ताहभर अस्पताल में रखने के बाद बुधवार को ड्रेसिंग कर उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। भास्कर एक्सपर्ट – डॉ. आशीष श्रीवास्तव, वरिष्ठ गैस्ट्रो सर्जन, सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल ऑपरेशन के दौरान टीम में ये भी रहे साथ
इस ऑपरेशन में वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ.प्रशांत श्रीवास्तव, मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुनील सोलंकी, डॉ. श्रेयांस, डॉ.मुस्कान, एनेस्थीसिया के डॉ. मनमोहन, डॉ. सीमा शिंदे, डॉ. नम्रता और डॉ. कुशल जेठानी शामिल थे। ऑपरेशन से जुड़ी फैक्ट फाइल {ट्यूमर का आकार: 5 सेमी {ऑपरेशन समय: 6 घंटे
{तकनीक: RAMPs सर्जरी {ब्लड ट्रांसफ्यूजन: नहीं लगा
{किडनी: बायीं किडनी का आधा हिस्सा सुरक्षित
{खर्च: आयुष्मान योजना में पूरी तरह निशुल्क
{उपलब्धि: अंचल का पहला ऐसा ऑपरेशन


