NEET छात्रा रेप-मौत; लड़की ने डायरी में लिखा-I AM ALONE:आधी रात को पापा को फोन क्यों किया, पढ़िए SIT जांच की 5 थ्योरी

NEET छात्रा रेप-मौत; लड़की ने डायरी में लिखा-I AM ALONE:आधी रात को पापा को फोन क्यों किया, पढ़िए SIT जांच की 5 थ्योरी

‘I AM ALONE’ नीट छात्रा की डायरी में लिखी यह पंक्तियां SIT जांच का केंद्र बन गई हैं। SIT ने अपनी रिपोर्ट में बताया है, ‘छात्रा डायरी लिखती थी, जिसमें उसने अपने परिवार, दोस्तों, भाई और निजी जीवन से जुड़ी कई बातें दर्ज की थीं।’ 20 दिनों तक चली जांच के दौरान SIT ने डायरी में लिखे शब्दों, कॉल डिटेल, पारिवारिक संबंधों, छात्रा की तबीयत और टेक्निकल प्रूफ के आधार पर जांच की 5 थ्योरी तैयार कीं। हालांकि अब SIT ने भी यौन हिंसा की बात को स्वीकार किया है। अब तक की जांच में SIT की 5 थ्योरी क्या हैं? क्या CBI भी उसी थ्योरी के इर्द-गिर्द चलेगी जो SIT ने बनाई…SIT ने अब तक क्या माना? पढ़िए रिपोर्ट… थ्योरी-1: छात्रा ने डायरी में लिखा- I AM ALONE SIT की पहली और सबसे अहम थ्योरी छात्रा की मानसिक स्थिति को बयां करती है। SIT के मुताबिक, छात्रा लंबे समय से अकेलापन महसूस कर रही थी। इसलिए उसने अपनी डायरी में, ‘I AM ALONE’ और ‘F**K MY LIFE’ जैसे शब्द लिखे हैं। SIT ने यह भी बताया है, ‘छात्रा जब अपने दोस्त के बारे में कुछ लिखती है, तो बहुत सॉफ्ट लिखती है, लेकिन उसकी परिवार के प्रति नाराजगी झलकती है। रिपोर्ट में यह भी बताया कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी, परिवार से दूरी और किसी विवाद के कारण छात्रा किसी मेंटल स्ट्रेस से गुजर रही थी। टीम के अनुसार, डायरी के शब्द किसी एक दिन की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहे इमोशनल डिटैचमेंट या अटैचमेंट के कारण है। SIT ने यह भी माना कि छात्रा ने कभी अपने इमोशन किसी से खुलकर साझा नहीं की। अंदर ही अंदर वह दबाव झेल रही थी। इसी कारण उसके व्यवहार और लिखने में नेगेटिविटी दिखाई देती है। थ्योरी-2: परिवार और भाई से किस प्रकार की नाराजगी SIT की दूसरी थ्योरी छात्रा के पारिवारिक रिश्तों से जुड़ी है। जांच के दौरान मिली डायरी में छात्रा ने अपने भाई के लिए अपशब्द लिखे जाने का उल्लेख किया। SIT ने इसे किसी न किसी मुद्दे पर पारिवारिक विवाद माना है। रिपोर्ट में बताया गया कि छात्रा अपने परिवार, खासकर भाई से नाराज थी। इसी बिंदु को आधार बनाकर SIT ने यह निष्कर्ष निकाला कि घर-परिवार के रिश्तों में खटास उसकी मानसिक स्थिति को और कमजोर कर रही थी। टीम ने भाई और परिवार के अन्य सदस्यों से पूछताछ भी की और इस नाराजगी को समझने की कोशिश की। SIT की रिपोर्ट में यह भी माना गया कि छात्रा और परिवार के बीच बातचीत कम हो गई थी, लेकिन बातचीत कम होने का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। डायरी के शब्दों को इमोशनल दूरी का सबूत मान लिया गया। थ्योरी-3: देर रात पिता को किए गए कॉल, फोन उठा नहीं तीसरी थ्योरी तकनीकी जांच से निकली। SIT ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाले और पाया कि 25 दिसंबर की देर रात से 26 दिसंबर की सुबह के बीच छात्रा ने अपने पिता को तीन बार कॉल किया था। इसके अलावा 26 दिसंबर की सुबह भी एक कॉल की गई। SIT रिपोर्ट के अनुसार, ये कॉल्स रात 1 बजे से सुबह 4 बजे के बीच किए गए, जिन्हें पिता ने रिसीव नहीं किया। जांच टीम ने इसे एक महत्वपूर्ण संकेत माना। रिपोर्ट में दर्ज है कि कॉल रिसीव न होने के बाद छात्रा ने अपनी मां को वॉट्सएप मैसेज किया और दोपहर बाद पिता से बातचीत हुई। SIT ने इन कॉल्स को छात्रा की बेचैनी के रूप में देखा। रिपोर्ट में यह माना गया कि देर रात किए गए कॉल्स सामान्य नहीं थे। छात्रा किसी मानसिक या भावनात्मक परेशानी के कारण ही पिता से संपर्क करना चाह रही थी। अब पिता ने फोन क्यों नहीं उठाया, सुबह कॉल बैक क्यों नहीं किया, ये सब अभी भी अनसुलझा ही रह गया है। थ्योरी-4: तबीयत खराब हुई, SIT ने पूछा- किस चीज की दवा दी और क्यों चौथी थ्योरी उस बयान पर आधारित है, जो SIT ने स्कॉर्पियो वाहन के मालिक से दर्ज किया। उसके अनुसार, परिवार ने 27 दिसंबर को कहा था कि उनकी बेटी की तबीयत खराब है और उसे पटना से घर लाना है। रिपोर्ट में दर्ज है कि पटना से वापसी के दौरान छात्रा गाड़ी में लेटी रही, रास्ते में रुकने पर भी बाहर नहीं निकली। SIT ने इसे इस बात के संकेत के रूप में देखा कि छात्रा शारीरिक रूप से अस्वस्थ थी। SIT के अनुसार, तबीयत खराब होने की जानकारी परिवार ने यात्रा के समय दी। जिससे यह माना गया कि छात्रा पहले से किसी शारीरिक परेशानी से गुजर रही थी। इसे भी केस की एक महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर शामिल किया गया। जांच टीम ने परिवार से यह भी पूछा था कि छात्रा को किस चीज की दवा दी गई और क्यों दी गई, जिससे उसकी तबीयत खराब हो गई। हालांकि परिवार ने इस बात से साफ इनकार कर दिया है। थ्योरी-5: जहानाबाद के घर में मोबाइल टूटे मिले SIT की 5वीं थ्योरी जांच में आई बाधाओं से जुड़ी है। रिपोर्ट में दर्ज है कि छात्रा की मां और भाई के मोबाइल फोन जांच के दौरान टूटे हुए पाए गए। एक ही दिन एक साथ दोनों के मोबाइल कैसे टूटे? क्या दोनों के बीच कोई झगड़ा हुआ। SIT ने इसे जांच में बाधा के रूप में दर्ज किया और माना कि इससे कई डिजिटल एविडेंस जुटाने में दिक्कते आईं। रिपोर्ट में कहा गया कि मोबाइल डेटा, चैट और कॉल हिस्ट्री की पूरी जांच संभव नहीं हो सकी। पिता और बेटी की आखिरी बातचीत क्या थी? बेटी ने पिता को फोन क्यों किया था, दोपहर को क्या बातचीत हुई और क्यों मां-बाप सीधे उसे पटना से लेने चले गए। 5 बातें जिसे SIT ने जांच के बाद स्वीकार की… यौन हिंसा से इनकार नहीं किया पीसी में कार्तिकेय शर्मा ने स्पष्ट कहा कि छात्रा के साथ यौन हिंसा से इनकार नहीं किया जा सकता। परिवार को दिए गए पांच कपड़ों में से एक कपड़े पर स्पर्म मिलने की पुष्टि हुई है। SIT की यही स्वीकारोक्ति शुरुआत में सुसाइड की थ्योरी से बड़ा यू-टर्न मानी जा रही है। स्थानीय थाने की लापरवाही मानी गई SIT ने यह भी स्वीकार किया कि चित्रगुप्त नगर थाना स्तर पर गंभीर लापरवाही हुई। SSP ने कहा कि SHO स्तर की चूक सामने आई है। संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई की गई। यह पहली बार है, जब पुलिस ने औपचारिक रूप से जांच में शुरुआती चूक को सार्वजनिक रूप से माना। अस्पताल की ‘लामा रिपोर्ट’ जब्त की SDPO सचिवालय-1 अनु कुमारी ने माना कि जांच के दौरान अस्पताल से ‘लामा रिपोर्ट’ जब्त की गई है और उसे केस डायरी का हिस्सा बनाया गया है। इसका मतलब है कि छात्रा के इलाज और अस्पताल प्रक्रिया में भी कई अहम पहलुओं की दोबारा जांच हो रही है। CCTV टाइमलाइन पर निर्भरता स्वीकारी SIT ने माना कि जांच का बड़ा आधार हॉस्टल और पटना जंक्शन के CCTV फुटेज हैं। पुलिस के मुताबिक, 5 जनवरी को छात्रा दोस्त के साथ कमरे में गई, 2 मिनट बाद बाहर आई और फिर नहीं दिखी। 6 जनवरी को दरवाजा खोलने पर वह बेहोश मिली। DNA जांच में विफलता स्वीकार की पुलिस ने साफ माना कि 18 लोगों के DNA सैंपल लिए गए, लेकिन किसी का भी मिलान नहीं हुआ। इसी विफलता के बाद राज्य सरकार ने CBI जांच की सिफारिश की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह स्वीकार किया गया कि SIT किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाई। ‘I AM ALONE’ नीट छात्रा की डायरी में लिखी यह पंक्तियां SIT जांच का केंद्र बन गई हैं। SIT ने अपनी रिपोर्ट में बताया है, ‘छात्रा डायरी लिखती थी, जिसमें उसने अपने परिवार, दोस्तों, भाई और निजी जीवन से जुड़ी कई बातें दर्ज की थीं।’ 20 दिनों तक चली जांच के दौरान SIT ने डायरी में लिखे शब्दों, कॉल डिटेल, पारिवारिक संबंधों, छात्रा की तबीयत और टेक्निकल प्रूफ के आधार पर जांच की 5 थ्योरी तैयार कीं। हालांकि अब SIT ने भी यौन हिंसा की बात को स्वीकार किया है। अब तक की जांच में SIT की 5 थ्योरी क्या हैं? क्या CBI भी उसी थ्योरी के इर्द-गिर्द चलेगी जो SIT ने बनाई…SIT ने अब तक क्या माना? पढ़िए रिपोर्ट… थ्योरी-1: छात्रा ने डायरी में लिखा- I AM ALONE SIT की पहली और सबसे अहम थ्योरी छात्रा की मानसिक स्थिति को बयां करती है। SIT के मुताबिक, छात्रा लंबे समय से अकेलापन महसूस कर रही थी। इसलिए उसने अपनी डायरी में, ‘I AM ALONE’ और ‘F**K MY LIFE’ जैसे शब्द लिखे हैं। SIT ने यह भी बताया है, ‘छात्रा जब अपने दोस्त के बारे में कुछ लिखती है, तो बहुत सॉफ्ट लिखती है, लेकिन उसकी परिवार के प्रति नाराजगी झलकती है। रिपोर्ट में यह भी बताया कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी, परिवार से दूरी और किसी विवाद के कारण छात्रा किसी मेंटल स्ट्रेस से गुजर रही थी। टीम के अनुसार, डायरी के शब्द किसी एक दिन की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहे इमोशनल डिटैचमेंट या अटैचमेंट के कारण है। SIT ने यह भी माना कि छात्रा ने कभी अपने इमोशन किसी से खुलकर साझा नहीं की। अंदर ही अंदर वह दबाव झेल रही थी। इसी कारण उसके व्यवहार और लिखने में नेगेटिविटी दिखाई देती है। थ्योरी-2: परिवार और भाई से किस प्रकार की नाराजगी SIT की दूसरी थ्योरी छात्रा के पारिवारिक रिश्तों से जुड़ी है। जांच के दौरान मिली डायरी में छात्रा ने अपने भाई के लिए अपशब्द लिखे जाने का उल्लेख किया। SIT ने इसे किसी न किसी मुद्दे पर पारिवारिक विवाद माना है। रिपोर्ट में बताया गया कि छात्रा अपने परिवार, खासकर भाई से नाराज थी। इसी बिंदु को आधार बनाकर SIT ने यह निष्कर्ष निकाला कि घर-परिवार के रिश्तों में खटास उसकी मानसिक स्थिति को और कमजोर कर रही थी। टीम ने भाई और परिवार के अन्य सदस्यों से पूछताछ भी की और इस नाराजगी को समझने की कोशिश की। SIT की रिपोर्ट में यह भी माना गया कि छात्रा और परिवार के बीच बातचीत कम हो गई थी, लेकिन बातचीत कम होने का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। डायरी के शब्दों को इमोशनल दूरी का सबूत मान लिया गया। थ्योरी-3: देर रात पिता को किए गए कॉल, फोन उठा नहीं तीसरी थ्योरी तकनीकी जांच से निकली। SIT ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाले और पाया कि 25 दिसंबर की देर रात से 26 दिसंबर की सुबह के बीच छात्रा ने अपने पिता को तीन बार कॉल किया था। इसके अलावा 26 दिसंबर की सुबह भी एक कॉल की गई। SIT रिपोर्ट के अनुसार, ये कॉल्स रात 1 बजे से सुबह 4 बजे के बीच किए गए, जिन्हें पिता ने रिसीव नहीं किया। जांच टीम ने इसे एक महत्वपूर्ण संकेत माना। रिपोर्ट में दर्ज है कि कॉल रिसीव न होने के बाद छात्रा ने अपनी मां को वॉट्सएप मैसेज किया और दोपहर बाद पिता से बातचीत हुई। SIT ने इन कॉल्स को छात्रा की बेचैनी के रूप में देखा। रिपोर्ट में यह माना गया कि देर रात किए गए कॉल्स सामान्य नहीं थे। छात्रा किसी मानसिक या भावनात्मक परेशानी के कारण ही पिता से संपर्क करना चाह रही थी। अब पिता ने फोन क्यों नहीं उठाया, सुबह कॉल बैक क्यों नहीं किया, ये सब अभी भी अनसुलझा ही रह गया है। थ्योरी-4: तबीयत खराब हुई, SIT ने पूछा- किस चीज की दवा दी और क्यों चौथी थ्योरी उस बयान पर आधारित है, जो SIT ने स्कॉर्पियो वाहन के मालिक से दर्ज किया। उसके अनुसार, परिवार ने 27 दिसंबर को कहा था कि उनकी बेटी की तबीयत खराब है और उसे पटना से घर लाना है। रिपोर्ट में दर्ज है कि पटना से वापसी के दौरान छात्रा गाड़ी में लेटी रही, रास्ते में रुकने पर भी बाहर नहीं निकली। SIT ने इसे इस बात के संकेत के रूप में देखा कि छात्रा शारीरिक रूप से अस्वस्थ थी। SIT के अनुसार, तबीयत खराब होने की जानकारी परिवार ने यात्रा के समय दी। जिससे यह माना गया कि छात्रा पहले से किसी शारीरिक परेशानी से गुजर रही थी। इसे भी केस की एक महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर शामिल किया गया। जांच टीम ने परिवार से यह भी पूछा था कि छात्रा को किस चीज की दवा दी गई और क्यों दी गई, जिससे उसकी तबीयत खराब हो गई। हालांकि परिवार ने इस बात से साफ इनकार कर दिया है। थ्योरी-5: जहानाबाद के घर में मोबाइल टूटे मिले SIT की 5वीं थ्योरी जांच में आई बाधाओं से जुड़ी है। रिपोर्ट में दर्ज है कि छात्रा की मां और भाई के मोबाइल फोन जांच के दौरान टूटे हुए पाए गए। एक ही दिन एक साथ दोनों के मोबाइल कैसे टूटे? क्या दोनों के बीच कोई झगड़ा हुआ। SIT ने इसे जांच में बाधा के रूप में दर्ज किया और माना कि इससे कई डिजिटल एविडेंस जुटाने में दिक्कते आईं। रिपोर्ट में कहा गया कि मोबाइल डेटा, चैट और कॉल हिस्ट्री की पूरी जांच संभव नहीं हो सकी। पिता और बेटी की आखिरी बातचीत क्या थी? बेटी ने पिता को फोन क्यों किया था, दोपहर को क्या बातचीत हुई और क्यों मां-बाप सीधे उसे पटना से लेने चले गए। 5 बातें जिसे SIT ने जांच के बाद स्वीकार की… यौन हिंसा से इनकार नहीं किया पीसी में कार्तिकेय शर्मा ने स्पष्ट कहा कि छात्रा के साथ यौन हिंसा से इनकार नहीं किया जा सकता। परिवार को दिए गए पांच कपड़ों में से एक कपड़े पर स्पर्म मिलने की पुष्टि हुई है। SIT की यही स्वीकारोक्ति शुरुआत में सुसाइड की थ्योरी से बड़ा यू-टर्न मानी जा रही है। स्थानीय थाने की लापरवाही मानी गई SIT ने यह भी स्वीकार किया कि चित्रगुप्त नगर थाना स्तर पर गंभीर लापरवाही हुई। SSP ने कहा कि SHO स्तर की चूक सामने आई है। संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई की गई। यह पहली बार है, जब पुलिस ने औपचारिक रूप से जांच में शुरुआती चूक को सार्वजनिक रूप से माना। अस्पताल की ‘लामा रिपोर्ट’ जब्त की SDPO सचिवालय-1 अनु कुमारी ने माना कि जांच के दौरान अस्पताल से ‘लामा रिपोर्ट’ जब्त की गई है और उसे केस डायरी का हिस्सा बनाया गया है। इसका मतलब है कि छात्रा के इलाज और अस्पताल प्रक्रिया में भी कई अहम पहलुओं की दोबारा जांच हो रही है। CCTV टाइमलाइन पर निर्भरता स्वीकारी SIT ने माना कि जांच का बड़ा आधार हॉस्टल और पटना जंक्शन के CCTV फुटेज हैं। पुलिस के मुताबिक, 5 जनवरी को छात्रा दोस्त के साथ कमरे में गई, 2 मिनट बाद बाहर आई और फिर नहीं दिखी। 6 जनवरी को दरवाजा खोलने पर वह बेहोश मिली। DNA जांच में विफलता स्वीकार की पुलिस ने साफ माना कि 18 लोगों के DNA सैंपल लिए गए, लेकिन किसी का भी मिलान नहीं हुआ। इसी विफलता के बाद राज्य सरकार ने CBI जांच की सिफारिश की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह स्वीकार किया गया कि SIT किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाई।  

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