मेरा अपने पड़ोसी से जमीन-जायदाद को लेकर पुराना विवाद चल रहा है। मैं दिसंबर में कर्नाटक गया था और 26-27 जनवरी को ट्रेन से लौटा। उसी दौरान मैं विस्फोटक सामग्री लेकर आया और उसे पड़ोसी के घर फंसाने के इरादे से फेंक दिया। मेरी मां ने भी पुलिस को सूचना दी थी ताकि मामला उसी पर चला जाए। यह कबूलनामा है, अहिरवलिया गांव से बरामद अवैध विस्फोटक मामले के मुख्य आरोपी विध्यांशु राव उर्फ दिव्यांशु राव का। बगहा पुलिस से पूछताछ में उसने बताया कि कैसे कर्नाटक की एक पत्थर तोड़ने वाली कंपनी से डेटोनेटर विस्फोटक के तीन पीस लेकर आया। आरोपी का पड़ोसी से क्या विवाद है, कर्नाटक की कंपनी से डेटोनेटर सहित और क्या-क्या लेकर आया? आइए सिलसिलेवार समझते हैं… आरोपी के पकड़े जाने के बाद की 2 तस्वीरें.. 6 वर्ष पुराना जमीन विवाद से शुरू हुआ मामला
पुलिस जांच में सामने आया है कि विस्फोटक बरामदगी का मामला आपसी रंजिश और लंबे समय से चले आ रहे जमीन विवाद से जुड़ा है। आरोपी विध्यांशु राव उर्फ दिव्यांशु राव और उसका पड़ोसी नीरज राव उर्फ पिंटू आपस में रिश्तेदार हैं और दोनों परिवारों के बीच जमीन-जायदाद को लेकर करीब छह वर्षों से विवाद चला आ रहा था। जांच के अनुसार, आरोपी के परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें अपनी जमीन बेचनी पड़ी थी, जबकि उनके चचेरे भाई हरिशंकर राव ने अपनी जमीन सुरक्षित रखी थी। हरिशंकर राव की समाज में अच्छी प्रतिष्ठा मानी जाती थी, जिसे लेकर भी पारिवारिक तनाव और बढ़ गया था। आरोपी आर्म्स एक्ट में जेल जा चुका
जमीन विवाद के कारण दोनों पक्षों के बीच पहले भी कई बार विवाद हुआ। वर्ष 2023 में आरोपी की मां रंजू देवी ने हरिशंकर राव और उनके दो बेटों पर गंभीर आरोप लगाते हुए चौतरवा थाना में मुकदमा दर्ज कराया था। हालांकि, जांच और बाद में आपसी समझौते के बाद वह मामला वापस ले लिया गया था, लेकिन इससे दोनों परिवारों के बीच की कड़वाहट और गहरी हो गई। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी शुरू से ही आपराधिक प्रवृत्ति का रहा है और पहले भी आर्म्स एक्ट के मामले में जेल जा चुका है। दिसंबर में बेल, फिर कर्नाटक की यात्रा
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, दिसंबर महीने में आर्म्स एक्ट के एक मामले में विध्यांशु राव को बेल मिली थी। बेल मिलने के महज एक सप्ताह के भीतर ही वह कर्नाटक चला गया। वहां वह पत्थर तोड़ने वाली एक कंपनी में काम कर रहा था। जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी ने वहीं से विस्फोटक सामग्री छिपाकर रखी और 26-27 जनवरी के आसपास ट्रेन से कर्नाटक से वापस लौटा। 31 जनवरी की रात क्या हुआ
31 जनवरी 2026 की रात करीब 10:30 बजे चौतरवा थाना को सूचना मिली कि अहिरवलिया गांव में संदिग्ध विस्फोटक सामग्री पड़ी हुई है। सूचना मिलते ही बगहा एसडीपीओ कुमार देवेंद्र पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान गांव में एक झोले से विस्फोटक सामग्री बरामद की गई। सुरक्षा कारणों से विस्फोटक सामग्री को गांव से बाहर एक निजी विद्यालय परिसर में कड़ी निगरानी में रखा गया और वरीय अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई। एसपी और एसडीपीओ ने जायजा लिया अगली सुबह बगहा के एसपी रामानंद कौशल और एसडीपीओ कुमार देवेंद्र ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। विधि-सम्मत तरीके से जांच और छापेमारी की गई। इसके बाद बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया, जिसने मौके पर पहुंचकर विस्फोटक सामग्री को सुरक्षित तरीके से डिफ्यूज किया। अज्ञात पर एफआईआर, फिर SIT का गठन
इस मामले में चौतरवा थाना में कांड संख्या 45/26 के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी रामानंद कौशल ने एसडीपीओ कुमार देवेंद्र के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। तकनीकी जांच से खुली साजिश की परतें
SIT ने मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की। जांच में स्पष्ट हुआ कि विस्फोटक रखने का उद्देश्य किसी बड़े हमले का नहीं, बल्कि पड़ोसी को फंसाने की साजिश था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी की मां रंजू देवी ने भी जानबूझकर पुलिस को सूचना दी थी ताकि विस्फोटक पड़ोसी के घर से जुड़ा दिखाया जा सके। तीन साल पुराना झूठा रेप केस भी आया सामने
जांच के दौरान आरोपी के परिवार का आपराधिक इतिहास भी उजागर हुआ। करीब तीन वर्ष पहले आरोपी की मां रंजू देवी ने अपने ही रिश्ते के भसुर हरिशंकर राव और उनके दो बेटों पर रेप का झूठा मुकदमा चौतरवा थाना में दर्ज कराया था। तत्कालीन एसडीओपी कैलाश प्रसाद ने जांच के बाद दोनों बेटों को सुपरविजन में नाम छांट दिया था। बाद में रंजू देवी ने हरिशंकर राव से पैसे लेकर समझौता किया और केस वापस ले लिया। 48 घंटे में खुलासा हुआ
SIT ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज 48 घंटे के भीतर मामले का खुलासा कर दिया। विध्यांशु राव उर्फ दिव्यांशु राव को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से एक मोबाइल फोन भी जब्त किया गया। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने ही विस्फोटक सामग्री कर्नाटक से लाकर पड़ोसी को फंसाने के इरादे से रखी थी और इसमें उसकी मां भी शामिल थी। न्यायिक हिरासत और आगे की जांच
पुलिस ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। साथ ही बरामद विस्फोटक सामग्री के स्रोत, सप्लाई चैन और संभावित नेटवर्क की गहन जांच जारी है।
प्रशिक्षु डीएसपी और चौतरवा थाना प्रभारी अंकित कुमार ने बताया कि मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मेरा अपने पड़ोसी से जमीन-जायदाद को लेकर पुराना विवाद चल रहा है। मैं दिसंबर में कर्नाटक गया था और 26-27 जनवरी को ट्रेन से लौटा। उसी दौरान मैं विस्फोटक सामग्री लेकर आया और उसे पड़ोसी के घर फंसाने के इरादे से फेंक दिया। मेरी मां ने भी पुलिस को सूचना दी थी ताकि मामला उसी पर चला जाए। यह कबूलनामा है, अहिरवलिया गांव से बरामद अवैध विस्फोटक मामले के मुख्य आरोपी विध्यांशु राव उर्फ दिव्यांशु राव का। बगहा पुलिस से पूछताछ में उसने बताया कि कैसे कर्नाटक की एक पत्थर तोड़ने वाली कंपनी से डेटोनेटर विस्फोटक के तीन पीस लेकर आया। आरोपी का पड़ोसी से क्या विवाद है, कर्नाटक की कंपनी से डेटोनेटर सहित और क्या-क्या लेकर आया? आइए सिलसिलेवार समझते हैं… आरोपी के पकड़े जाने के बाद की 2 तस्वीरें.. 6 वर्ष पुराना जमीन विवाद से शुरू हुआ मामला
पुलिस जांच में सामने आया है कि विस्फोटक बरामदगी का मामला आपसी रंजिश और लंबे समय से चले आ रहे जमीन विवाद से जुड़ा है। आरोपी विध्यांशु राव उर्फ दिव्यांशु राव और उसका पड़ोसी नीरज राव उर्फ पिंटू आपस में रिश्तेदार हैं और दोनों परिवारों के बीच जमीन-जायदाद को लेकर करीब छह वर्षों से विवाद चला आ रहा था। जांच के अनुसार, आरोपी के परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें अपनी जमीन बेचनी पड़ी थी, जबकि उनके चचेरे भाई हरिशंकर राव ने अपनी जमीन सुरक्षित रखी थी। हरिशंकर राव की समाज में अच्छी प्रतिष्ठा मानी जाती थी, जिसे लेकर भी पारिवारिक तनाव और बढ़ गया था। आरोपी आर्म्स एक्ट में जेल जा चुका
जमीन विवाद के कारण दोनों पक्षों के बीच पहले भी कई बार विवाद हुआ। वर्ष 2023 में आरोपी की मां रंजू देवी ने हरिशंकर राव और उनके दो बेटों पर गंभीर आरोप लगाते हुए चौतरवा थाना में मुकदमा दर्ज कराया था। हालांकि, जांच और बाद में आपसी समझौते के बाद वह मामला वापस ले लिया गया था, लेकिन इससे दोनों परिवारों के बीच की कड़वाहट और गहरी हो गई। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी शुरू से ही आपराधिक प्रवृत्ति का रहा है और पहले भी आर्म्स एक्ट के मामले में जेल जा चुका है। दिसंबर में बेल, फिर कर्नाटक की यात्रा
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, दिसंबर महीने में आर्म्स एक्ट के एक मामले में विध्यांशु राव को बेल मिली थी। बेल मिलने के महज एक सप्ताह के भीतर ही वह कर्नाटक चला गया। वहां वह पत्थर तोड़ने वाली एक कंपनी में काम कर रहा था। जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी ने वहीं से विस्फोटक सामग्री छिपाकर रखी और 26-27 जनवरी के आसपास ट्रेन से कर्नाटक से वापस लौटा। 31 जनवरी की रात क्या हुआ
31 जनवरी 2026 की रात करीब 10:30 बजे चौतरवा थाना को सूचना मिली कि अहिरवलिया गांव में संदिग्ध विस्फोटक सामग्री पड़ी हुई है। सूचना मिलते ही बगहा एसडीपीओ कुमार देवेंद्र पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान गांव में एक झोले से विस्फोटक सामग्री बरामद की गई। सुरक्षा कारणों से विस्फोटक सामग्री को गांव से बाहर एक निजी विद्यालय परिसर में कड़ी निगरानी में रखा गया और वरीय अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई। एसपी और एसडीपीओ ने जायजा लिया अगली सुबह बगहा के एसपी रामानंद कौशल और एसडीपीओ कुमार देवेंद्र ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। विधि-सम्मत तरीके से जांच और छापेमारी की गई। इसके बाद बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया, जिसने मौके पर पहुंचकर विस्फोटक सामग्री को सुरक्षित तरीके से डिफ्यूज किया। अज्ञात पर एफआईआर, फिर SIT का गठन
इस मामले में चौतरवा थाना में कांड संख्या 45/26 के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी रामानंद कौशल ने एसडीपीओ कुमार देवेंद्र के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। तकनीकी जांच से खुली साजिश की परतें
SIT ने मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की। जांच में स्पष्ट हुआ कि विस्फोटक रखने का उद्देश्य किसी बड़े हमले का नहीं, बल्कि पड़ोसी को फंसाने की साजिश था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी की मां रंजू देवी ने भी जानबूझकर पुलिस को सूचना दी थी ताकि विस्फोटक पड़ोसी के घर से जुड़ा दिखाया जा सके। तीन साल पुराना झूठा रेप केस भी आया सामने
जांच के दौरान आरोपी के परिवार का आपराधिक इतिहास भी उजागर हुआ। करीब तीन वर्ष पहले आरोपी की मां रंजू देवी ने अपने ही रिश्ते के भसुर हरिशंकर राव और उनके दो बेटों पर रेप का झूठा मुकदमा चौतरवा थाना में दर्ज कराया था। तत्कालीन एसडीओपी कैलाश प्रसाद ने जांच के बाद दोनों बेटों को सुपरविजन में नाम छांट दिया था। बाद में रंजू देवी ने हरिशंकर राव से पैसे लेकर समझौता किया और केस वापस ले लिया। 48 घंटे में खुलासा हुआ
SIT ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज 48 घंटे के भीतर मामले का खुलासा कर दिया। विध्यांशु राव उर्फ दिव्यांशु राव को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से एक मोबाइल फोन भी जब्त किया गया। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने ही विस्फोटक सामग्री कर्नाटक से लाकर पड़ोसी को फंसाने के इरादे से रखी थी और इसमें उसकी मां भी शामिल थी। न्यायिक हिरासत और आगे की जांच
पुलिस ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। साथ ही बरामद विस्फोटक सामग्री के स्रोत, सप्लाई चैन और संभावित नेटवर्क की गहन जांच जारी है।
प्रशिक्षु डीएसपी और चौतरवा थाना प्रभारी अंकित कुमार ने बताया कि मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


