एशियाई बाजार में सोना मजबूत, मध्य पूर्व तनाव और फेड संकेतों पर निवेशकों की नजर

एशियाई बाजार में सोना मजबूत, मध्य पूर्व तनाव और फेड संकेतों पर निवेशकों की नजर
बुधवार को एशियाई सत्र के दौरान सोने की कीमतें मजबूती के साथ कारोबार करती नजर आईं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड करीब 4,985 डॉलर के आसपास बना हुआ है और बीते हफ्ते आई ऐतिहासिक व उतार-चढ़ाव भरी गिरावट के बाद इसमें रिकवरी का सिलसिला जारी है।
बता दें कि हाल के दिनों में सोने की कीमतों में भारी दबाव देखने को मिला था, लेकिन अब निवेशक एक बार फिर सुरक्षित निवेश विकल्पों पर ध्यान दे रहे हैं। अमेरिकी आर्थिक संकेतों की अगली कड़ी और वैश्विक जोखिम कारकों को लेकर बाजार सतर्क बना हुआ है।
गौरतलब है कि मंगलवार को सीएनबीसी की एक रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिकी सेना ने अरब सागर में यूएसएस अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर के करीब पहुंचे एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया है। यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है जब मध्य पूर्व में तनाव पहले से ही ऊंचा बना हुआ है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, इसी बीच ईरान ने अमेरिका के साथ होने वाली बातचीत को लेकर शर्तें रख दी हैं। ईरान चाहता है कि इस सप्ताह प्रस्तावित वार्ता तुर्की के बजाय ओमान में हो और बातचीत का दायरा सिर्फ परमाणु मुद्दे तक सीमित रखा जाए। इस रुख ने पहले से नाजुक कूटनीतिक प्रयासों को और जटिल बना दिया है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के किसी भी संकेत से सोने जैसी पारंपरिक सुरक्षित संपत्तियों को निकट अवधि में समर्थन मिल सकता है। यही वजह है कि निवेशक इस घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
हालांकि दूसरी ओर कुछ ऐसे कारक भी हैं जो सोने की तेजी पर लगाम लगा सकते हैं। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन पद के लिए केविन वार्श के नामांकन को बाजार अपेक्षाकृत सख्त मौद्रिक रुख के संकेत के तौर पर देख रहा है। उन्हें ब्याज दरों के मामले में ‘हॉकिश’ माना जाता है, जिससे दरों के लंबे समय तक ऊंचा बने रहने की संभावना जताई जा रही है।
इसी वजह से फेड की ओर से निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कुछ कमजोर पड़ी हैं। फेड की जनवरी बैठक में यथास्थिति बनाए रखने और वार्श के नामांकन के बाद ट्रेडर्स ने अपने अनुमान में संशोधन किया है। सीएमई फेडवॉच टूल के मुताबिक, जून की नीति बैठक में दरों में कटौती की संभावना फिलहाल करीब 66 प्रतिशत के आसपास आंकी जा रही है।

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