मोतिहारी में पुलिस मित्र बहाली के नाम पर एक एनजीओ द्वारा लाखों रुपये की ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि एनजीओ संचालक ने जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों के बेरोजगार युवकों को पुलिस मित्र बनाने का झांसा देकर यह ठगी की। मामला उजागर होने के बाद एसपी स्वर्ण प्रभात ने कोटवा थाना में प्राथमिकी दर्ज करने और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी के निर्देश दिए हैं। एनजीओ ने युवकों को विश्वास दिलाने के लिए दी ट्रनिंग सूत्रों के अनुसार, अब तक लगभग 41 बेरोजगार युवकों से 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक की वसूली की गई है। एनजीओ ने युवकों को बहाली का विश्वास दिलाने के लिए मुजफ्फरपुर में कथित प्रशिक्षण दिया और फिर थाना परिसर में फर्जी आईडी कार्ड भी बांटे, जिससे पीड़ितों को उनकी नियुक्ति का पूरा यकीन हो गया। एनजीओ संचालक ने युवकों को 20 हजार रुपये मासिक वेतन का लालच देकर अपने जाल में फंसाया। इस ठगी का शिकार थाना चौकीदार और दफादार के पुत्र भी हुए हैं। कई युवकों से फोन-पे और अन्य डिजिटल माध्यमों से भी पैसे लिए गए। अरेराज, चिरैया और घोड़ासहन सहित कई थाना क्षेत्रों में हुई यह ठगी अरेराज, फेनहारा, ढाका, चिरैया और घोड़ासहन सहित कई थाना क्षेत्रों में हुई है। सबसे गंभीर बात यह है कि कुछ थानों में पुलिस मित्र की ज्वाइनिंग स्टेशन डायरी में भी दर्ज की गई थी, जिससे इस पूरे फर्जीवाड़े में अंदरूनी मिलीभगत की आशंका बढ़ गई है। कई थानेदारों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। एनजीओ संचालक की गिरफ्तारी को चल रही छापेमारी एसपी स्वर्ण प्रभात ने बताया कि पीड़ित युवक के आवेदन पर कोटवा थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। एनजीओ संचालक की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से सामने आए मामलों की गहन जांच के लिए एक प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है। एसपी ने साफ शब्दों में कहा है कि इस फर्जीवाड़े में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद पूरे जिले में हड़कंप मचा हुआ है। मोतिहारी में पुलिस मित्र बहाली के नाम पर एक एनजीओ द्वारा लाखों रुपये की ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि एनजीओ संचालक ने जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों के बेरोजगार युवकों को पुलिस मित्र बनाने का झांसा देकर यह ठगी की। मामला उजागर होने के बाद एसपी स्वर्ण प्रभात ने कोटवा थाना में प्राथमिकी दर्ज करने और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी के निर्देश दिए हैं। एनजीओ ने युवकों को विश्वास दिलाने के लिए दी ट्रनिंग सूत्रों के अनुसार, अब तक लगभग 41 बेरोजगार युवकों से 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक की वसूली की गई है। एनजीओ ने युवकों को बहाली का विश्वास दिलाने के लिए मुजफ्फरपुर में कथित प्रशिक्षण दिया और फिर थाना परिसर में फर्जी आईडी कार्ड भी बांटे, जिससे पीड़ितों को उनकी नियुक्ति का पूरा यकीन हो गया। एनजीओ संचालक ने युवकों को 20 हजार रुपये मासिक वेतन का लालच देकर अपने जाल में फंसाया। इस ठगी का शिकार थाना चौकीदार और दफादार के पुत्र भी हुए हैं। कई युवकों से फोन-पे और अन्य डिजिटल माध्यमों से भी पैसे लिए गए। अरेराज, चिरैया और घोड़ासहन सहित कई थाना क्षेत्रों में हुई यह ठगी अरेराज, फेनहारा, ढाका, चिरैया और घोड़ासहन सहित कई थाना क्षेत्रों में हुई है। सबसे गंभीर बात यह है कि कुछ थानों में पुलिस मित्र की ज्वाइनिंग स्टेशन डायरी में भी दर्ज की गई थी, जिससे इस पूरे फर्जीवाड़े में अंदरूनी मिलीभगत की आशंका बढ़ गई है। कई थानेदारों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। एनजीओ संचालक की गिरफ्तारी को चल रही छापेमारी एसपी स्वर्ण प्रभात ने बताया कि पीड़ित युवक के आवेदन पर कोटवा थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। एनजीओ संचालक की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से सामने आए मामलों की गहन जांच के लिए एक प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है। एसपी ने साफ शब्दों में कहा है कि इस फर्जीवाड़े में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद पूरे जिले में हड़कंप मचा हुआ है।


