भागलपुर जिले के नाथनगर दियारा क्षेत्र में किसान परेशान हैं। पाला रोग के चलते बैंगन की फसल खराब हो रही है। इस बीमारी के कारण सैकड़ों पौधे झुलस गए, जिससे पूरी फसल बर्बाद होने की आशंका है। मेहनत पर पानी फिरता देख चिंता बढ़ गई है। राघोपुर गांव के किसानों का कहना है कि उन्हें हर साल किसी न किसी प्राकृतिक आपदा से भारी नुकसान उठाना पड़ता है। कभी बाढ़ तो कभी अत्यधिक ठंड और पाला उनकी फसलों को तबाह कर देता है। इस बार कड़ाके की ठंड और पाले ने बैंगन की फसल को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। कई खेतों में पौधे पूरी तरह सूख चुके हैं, जिससे अब उत्पादन की कोई उम्मीद नहीं बची है। खाद, बीज, सिंचाई पर काफी पैसा खर्च हुआ है मदन मोहन मंडल ने बताया कि इस इलाके में 50 से अधिक किसान बैंगन की खेती करते हैं। फसल पाला बीमारी से प्रभावित हुई है। लागत भी निकलना मुश्किल हो जाएगा। खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी पर खर्च की गई पूंजी डूबने के कगार पर है।
सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग किसानों का आरोप है कि फसल खराब होने के बावजूद कृषि विभाग के अधिकारी अब तक स्थिति का जायजा लेने नहीं पहुंचे हैं। न तो कोई सर्वे हुआ है और न ही किसी तरह की सरकारी सहायता की जानकारी दी गई है। इससे नाराजगी और निराशा बढ़ रही है। किसानों ने सरकार और जिला प्रशासन से जल्द से जल्द प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है, ताकि वे आगे की खेती कर सकें। उनका कहना है कि अगर समय रहते मदद नहीं मिली तो उनकी आर्थिक स्थिति और भी खराब हो जाएगी, जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो जाएगा। भागलपुर जिले के नाथनगर दियारा क्षेत्र में किसान परेशान हैं। पाला रोग के चलते बैंगन की फसल खराब हो रही है। इस बीमारी के कारण सैकड़ों पौधे झुलस गए, जिससे पूरी फसल बर्बाद होने की आशंका है। मेहनत पर पानी फिरता देख चिंता बढ़ गई है। राघोपुर गांव के किसानों का कहना है कि उन्हें हर साल किसी न किसी प्राकृतिक आपदा से भारी नुकसान उठाना पड़ता है। कभी बाढ़ तो कभी अत्यधिक ठंड और पाला उनकी फसलों को तबाह कर देता है। इस बार कड़ाके की ठंड और पाले ने बैंगन की फसल को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। कई खेतों में पौधे पूरी तरह सूख चुके हैं, जिससे अब उत्पादन की कोई उम्मीद नहीं बची है। खाद, बीज, सिंचाई पर काफी पैसा खर्च हुआ है मदन मोहन मंडल ने बताया कि इस इलाके में 50 से अधिक किसान बैंगन की खेती करते हैं। फसल पाला बीमारी से प्रभावित हुई है। लागत भी निकलना मुश्किल हो जाएगा। खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी पर खर्च की गई पूंजी डूबने के कगार पर है।
सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग किसानों का आरोप है कि फसल खराब होने के बावजूद कृषि विभाग के अधिकारी अब तक स्थिति का जायजा लेने नहीं पहुंचे हैं। न तो कोई सर्वे हुआ है और न ही किसी तरह की सरकारी सहायता की जानकारी दी गई है। इससे नाराजगी और निराशा बढ़ रही है। किसानों ने सरकार और जिला प्रशासन से जल्द से जल्द प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है, ताकि वे आगे की खेती कर सकें। उनका कहना है कि अगर समय रहते मदद नहीं मिली तो उनकी आर्थिक स्थिति और भी खराब हो जाएगी, जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो जाएगा।


