दरभंगा जिले में सिंहवाड़ा प्रखंड के बहुआरा बुजुर्ग गांव में बाबा खास पीर के दरबार पर भव्य जलसा ‘फैजान-ए-शब-ए-बारात’ का आयोजन किया गया। जलसे को लेकर गांव में साफ-सफाई, बिजली और पानी की व्यवस्था की गई थी। पीर के दरबार सहित पूरे गांव को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया, जिससे गांव की गलियां रोशनी से जगमगा उठी। जलसे में शायरे इस्लाम मोहम्मद रजा मदनी, मो. आसिफ रजा, मो. कासीफ रजा, मो. राशिद, अहमद रजा मक्की, इमाम हुसैन (मदरसा हमिदिया किलाघाट, दरभंगा), कारी मो. नेमतुल्लाह रजवी (बहुआरा बुजुर्ग), मो. जावेद, एजाज अहमद, मो. तौसीफ सहित कई मुस्लिम वक्ताओं और धर्मगुरुओं ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने शब-ए-बारात की अहमियत, तौबा, इबादत और नेक अमलों पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान शहदेव पासवान और मो. इरशाद सहित ग्रामीणों ने एक साथ चादरपोशी कर आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब का संदेश दिया। शहदेव पासवान ने कहा कि बाबा खास पीर के दरबार पर सभी धर्मों के लोगों की मौजूदगी कौमी एकता की मिसाल है। मीर मो. शहनवाज ने कहा कि देश में आपसी भाईचारे की परंपरा इतनी आसानी से टूटने वाली नहीं है, आज भी इंसानियत जिंदा है। पूरी रात चला इबादत का दौर शब-ए-बारात के मौके पर पूरे जिले में धार्मिक उल्लास का माहौल देखा गया। दिग्घी पश्चिम मजार, भीखा शाह सेलानी मचार, मिर्जा खां, दोनार गंगासागर मोहल्ला कब्रिस्तान सहित विभिन्न स्थानों पर रात भर इबादत और सजदे का सिलसिला जारी रहा। घरों में पकवान बने और बाजारों में चहल-पहल बढ़ी रही। इमाम छोटी काजीपुरा करमगंज के हाजी मौलाना अब्दुल अल्लाम मिस्बाही ने कहा कि शब-ए-बारात की रात तौबा, इबादत और बख्शीश की रात है। इस रात लोग अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और अपने व अपने परिजनों की मगफिरत के लिए दुआ करते हैं। उन्होंने लोगों से फिजूलखर्ची और दिखावे से दूर रहकर नेक अमलों में समय बिताने की अपील की। दरभंगा जिले में सिंहवाड़ा प्रखंड के बहुआरा बुजुर्ग गांव में बाबा खास पीर के दरबार पर भव्य जलसा ‘फैजान-ए-शब-ए-बारात’ का आयोजन किया गया। जलसे को लेकर गांव में साफ-सफाई, बिजली और पानी की व्यवस्था की गई थी। पीर के दरबार सहित पूरे गांव को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया, जिससे गांव की गलियां रोशनी से जगमगा उठी। जलसे में शायरे इस्लाम मोहम्मद रजा मदनी, मो. आसिफ रजा, मो. कासीफ रजा, मो. राशिद, अहमद रजा मक्की, इमाम हुसैन (मदरसा हमिदिया किलाघाट, दरभंगा), कारी मो. नेमतुल्लाह रजवी (बहुआरा बुजुर्ग), मो. जावेद, एजाज अहमद, मो. तौसीफ सहित कई मुस्लिम वक्ताओं और धर्मगुरुओं ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने शब-ए-बारात की अहमियत, तौबा, इबादत और नेक अमलों पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान शहदेव पासवान और मो. इरशाद सहित ग्रामीणों ने एक साथ चादरपोशी कर आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब का संदेश दिया। शहदेव पासवान ने कहा कि बाबा खास पीर के दरबार पर सभी धर्मों के लोगों की मौजूदगी कौमी एकता की मिसाल है। मीर मो. शहनवाज ने कहा कि देश में आपसी भाईचारे की परंपरा इतनी आसानी से टूटने वाली नहीं है, आज भी इंसानियत जिंदा है। पूरी रात चला इबादत का दौर शब-ए-बारात के मौके पर पूरे जिले में धार्मिक उल्लास का माहौल देखा गया। दिग्घी पश्चिम मजार, भीखा शाह सेलानी मचार, मिर्जा खां, दोनार गंगासागर मोहल्ला कब्रिस्तान सहित विभिन्न स्थानों पर रात भर इबादत और सजदे का सिलसिला जारी रहा। घरों में पकवान बने और बाजारों में चहल-पहल बढ़ी रही। इमाम छोटी काजीपुरा करमगंज के हाजी मौलाना अब्दुल अल्लाम मिस्बाही ने कहा कि शब-ए-बारात की रात तौबा, इबादत और बख्शीश की रात है। इस रात लोग अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और अपने व अपने परिजनों की मगफिरत के लिए दुआ करते हैं। उन्होंने लोगों से फिजूलखर्ची और दिखावे से दूर रहकर नेक अमलों में समय बिताने की अपील की।


