पटना जू में मादा जिराफ ‘शांति’ की मौत:21 साल की उम्र में ली आखिरी सांस, अदला-बदली कार्यक्रम के तहत USA से लाया था पटना

पटना जू में मादा जिराफ ‘शांति’ की मौत:21 साल की उम्र में ली आखिरी सांस, अदला-बदली कार्यक्रम के तहत USA से लाया था पटना

पटना जू में मादा जिराफ ‘शांति’ की मंगलवार रात को उम्र 21 साल की उम्र में मौत हो गयी है। पटना जू प्रशासन द्वारा मौत का प्रारंभिक कारण प्रेगनेंसी कॉम्प्लिकेशंस बताया गया है। शांति के मौत के कारणों के डिटेल जांच के लिए सैम्पल को विशेषज्ञ संस्थानों में भेजा जा रहा है। फिलहाल शांति के दो बच्चे “अमन और नंदनी” पटना जू में है। पटना जू और देश के चिड़ियाघरों में जिराफों के संरक्षण प्रजनन में मादा जिराफ “शांति” का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। USA से लाया गया था मादा जिराफ शांति का जन्म दिनांक 20 जुलाई 2005 को यू.एस.ए के सेन डियागो जू में हुआ था। वर्ष 2006 में मादा जिराफ को सेन डियागो जू से संजय गांधी जैविक उद्यान, पटना में वन्यजीव अदला-बदली कार्यक्रम के तहत लाया गया था। मादा जिराफ “शांति” के द्वारा 2011 में पटना जू में पहला बच्चा “नव्या” को जन्म दिया गया। 2011 से वर्ष 2023 तक मादा जिराफ के द्वारा 6 बच्चों को जन्म दिया गया है। मादा जिराफ के बच्चों को देश के अन्य चिड़ियाघरों- नंदनकानन जू, भुवनेश्वर, गुवाहटी जू, असम, मैसूर जू, कर्नाटक को दिया गया है। ठंड से बचाने खुले मैदान में पुआल बिछाया पटना जू में ठंड के मौसम को देखते हुए वन्यजीवों के बचाव के लिए विशेष इंतजाम किए गए। इसमें से जिराफ के लिए भी खास इंतजाम थे। जिराफ के लिए खुले मैदान में पुआल बिछाया गया, ताकि वह ठंड में उसपर बैठ सके। इसके साथ ही छोटे शावक को केयर टेकर द्वारा बोरे का खोल बनाकर पहनाया गया है। तीन बार में खाना दिया जा रहा। पीने और नहाने के लिए जू-प्रबंधन की ओर से गर्म पानी का खास तौर पर इंतजाम किया गया। उन्हें हल्का गर्म पानी पीने के लिए दिया जाता। इसके साथ ही उस पानी में नमक मिलाया जा रहा। पटना जू में मादा जिराफ ‘शांति’ की मंगलवार रात को उम्र 21 साल की उम्र में मौत हो गयी है। पटना जू प्रशासन द्वारा मौत का प्रारंभिक कारण प्रेगनेंसी कॉम्प्लिकेशंस बताया गया है। शांति के मौत के कारणों के डिटेल जांच के लिए सैम्पल को विशेषज्ञ संस्थानों में भेजा जा रहा है। फिलहाल शांति के दो बच्चे “अमन और नंदनी” पटना जू में है। पटना जू और देश के चिड़ियाघरों में जिराफों के संरक्षण प्रजनन में मादा जिराफ “शांति” का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। USA से लाया गया था मादा जिराफ शांति का जन्म दिनांक 20 जुलाई 2005 को यू.एस.ए के सेन डियागो जू में हुआ था। वर्ष 2006 में मादा जिराफ को सेन डियागो जू से संजय गांधी जैविक उद्यान, पटना में वन्यजीव अदला-बदली कार्यक्रम के तहत लाया गया था। मादा जिराफ “शांति” के द्वारा 2011 में पटना जू में पहला बच्चा “नव्या” को जन्म दिया गया। 2011 से वर्ष 2023 तक मादा जिराफ के द्वारा 6 बच्चों को जन्म दिया गया है। मादा जिराफ के बच्चों को देश के अन्य चिड़ियाघरों- नंदनकानन जू, भुवनेश्वर, गुवाहटी जू, असम, मैसूर जू, कर्नाटक को दिया गया है। ठंड से बचाने खुले मैदान में पुआल बिछाया पटना जू में ठंड के मौसम को देखते हुए वन्यजीवों के बचाव के लिए विशेष इंतजाम किए गए। इसमें से जिराफ के लिए भी खास इंतजाम थे। जिराफ के लिए खुले मैदान में पुआल बिछाया गया, ताकि वह ठंड में उसपर बैठ सके। इसके साथ ही छोटे शावक को केयर टेकर द्वारा बोरे का खोल बनाकर पहनाया गया है। तीन बार में खाना दिया जा रहा। पीने और नहाने के लिए जू-प्रबंधन की ओर से गर्म पानी का खास तौर पर इंतजाम किया गया। उन्हें हल्का गर्म पानी पीने के लिए दिया जाता। इसके साथ ही उस पानी में नमक मिलाया जा रहा।  

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