शेखपुरा में वामदलों की एक संयुक्त बैठक मंगलवार को सीपीआई कार्यालय में हुई। यह बैठक 12 फरवरी को ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत देशव्यापी आम हड़ताल को सफल बनाने की रणनीति तैयार करने के लिए बुलाई गई थी। बैठक की अध्यक्षता माले जिला सचिव विजय कुमार विजय ने की। इसमें सीपीआई के जिला सचिव प्रभात कुमार पाण्डेय और सीपीएम के जिला सचिव बीरबल शर्मा सहित अन्य नेता मौजूद थे। जन-विरोधी और देश विरोधी नीतियों के खिलाफ
वामदलों के नेताओं ने कहा कि यह हड़ताल भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी, जन-विरोधी और देश विरोधी नीतियों के खिलाफ है। उन्होंने चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को श्रमिकों के शोषण का नया हथियार बताया, जिन्हें तमाम विरोध के बावजूद उद्योगपतियों और पूंजीपतियों के हित में लागू किया गया है। लिखित अनुबंध के आधार पर श्रमिकों की नियुक्ति
नेताओं ने औद्योगिक संबंध संहिता 2020 की धारा 2 का हवाला दिया, जिसके तहत निश्चित अवधि के रोजगार के लिखित अनुबंध के आधार पर श्रमिकों की नियुक्ति का प्रावधान है। उनका कहना था कि यह प्रावधान अस्थायी नौकरी की सुरक्षा को खत्म कर देगा। इसके अतिरिक्त, मनरेगा अधिनियम को कमजोर करना भी जनता के हित में नहीं है। बिहार में बहू-बेटियां सुरक्षित नहीं
बैठक में बिहार सरकार की ‘अराजक स्थिति’ पर भी गंभीरता से विचार किया गया। नेताओं ने शंभू गर्ल्स हॉस्टल की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि पूरे बिहार में बहू-बेटियां सुरक्षित नहीं हैं और आम लोगों का खुलेआम चलना मुश्किल हो गया है। उन्होंने एनडीए के नेतृत्व वाली सरकार पर भूमिहीन परिवारों को अतिक्रमण के नाम पर भयभीत कर वर्षों से बसे परिवारों को उजाड़ने का आरोप लगाया, जिसे वामदल बर्दाश्त नहीं करेंगे। वामदलों के नेता और कार्यकर्ता 12 फरवरी को आम हड़ताल के समर्थन में सड़कों पर उतरेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वे महागठबंधन के राजद सहित अन्य दलों से भी इस आंदोलन को समर्थन देने का आग्रह करेंगे। शेखपुरा में वामदलों की एक संयुक्त बैठक मंगलवार को सीपीआई कार्यालय में हुई। यह बैठक 12 फरवरी को ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत देशव्यापी आम हड़ताल को सफल बनाने की रणनीति तैयार करने के लिए बुलाई गई थी। बैठक की अध्यक्षता माले जिला सचिव विजय कुमार विजय ने की। इसमें सीपीआई के जिला सचिव प्रभात कुमार पाण्डेय और सीपीएम के जिला सचिव बीरबल शर्मा सहित अन्य नेता मौजूद थे। जन-विरोधी और देश विरोधी नीतियों के खिलाफ
वामदलों के नेताओं ने कहा कि यह हड़ताल भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी, जन-विरोधी और देश विरोधी नीतियों के खिलाफ है। उन्होंने चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को श्रमिकों के शोषण का नया हथियार बताया, जिन्हें तमाम विरोध के बावजूद उद्योगपतियों और पूंजीपतियों के हित में लागू किया गया है। लिखित अनुबंध के आधार पर श्रमिकों की नियुक्ति
नेताओं ने औद्योगिक संबंध संहिता 2020 की धारा 2 का हवाला दिया, जिसके तहत निश्चित अवधि के रोजगार के लिखित अनुबंध के आधार पर श्रमिकों की नियुक्ति का प्रावधान है। उनका कहना था कि यह प्रावधान अस्थायी नौकरी की सुरक्षा को खत्म कर देगा। इसके अतिरिक्त, मनरेगा अधिनियम को कमजोर करना भी जनता के हित में नहीं है। बिहार में बहू-बेटियां सुरक्षित नहीं
बैठक में बिहार सरकार की ‘अराजक स्थिति’ पर भी गंभीरता से विचार किया गया। नेताओं ने शंभू गर्ल्स हॉस्टल की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि पूरे बिहार में बहू-बेटियां सुरक्षित नहीं हैं और आम लोगों का खुलेआम चलना मुश्किल हो गया है। उन्होंने एनडीए के नेतृत्व वाली सरकार पर भूमिहीन परिवारों को अतिक्रमण के नाम पर भयभीत कर वर्षों से बसे परिवारों को उजाड़ने का आरोप लगाया, जिसे वामदल बर्दाश्त नहीं करेंगे। वामदलों के नेता और कार्यकर्ता 12 फरवरी को आम हड़ताल के समर्थन में सड़कों पर उतरेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वे महागठबंधन के राजद सहित अन्य दलों से भी इस आंदोलन को समर्थन देने का आग्रह करेंगे।


