निगम परिषद बना टकराव का अखाड़ा, अफसरशाही बनाम जनप्रतिनिधि आमने-सामने, दो जेडओ का वेतन रोका

नगर निगम की अभियाचित परिषद बैठक सोमवार को विकास और जनहित की बजाय अफसरशाही और जनप्रतिनिधियों के टकराव का मैदान बन गई। पदेन व्यवस्था के तहत पारित ठहरावों को लागू न किए जाने और क्षेत्राधिकारियों के कथित अभद्र व अपमानजनक व्यवहार को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षद एक सुर में भडक़ उठे। हालात इतने बिगड़े कि सदन के भीतर ही धरना देना पड़ा और आखिरकार सभापति को सख्त कार्रवाई के निर्देश देने पड़े।निगम परिषद की बैठक को 20 फरवरी तक के लिए स्थगित किया गया।

पदेन व्यवस्था पर बवाल, परिषद की अवहेलना का आरोप
सोमवार दोपहर तीन बजे जलबिहार परिषद सभागार में बैठक शुरू होते ही पदेन व्यवस्था मुद्दे पर विस्फोट हो गया। पार्षदों ने आरोप लगाया कि परिषद द्वारा पहले ही पारित ठहरावों के बावजूद अधिकारियों को हटाया नहीं गया, बल्कि एक ही अधिकारी को चार-चार जिम्मेदारियां सौंप दी गईं। पार्षद नागेंद्र राणा, भगवान सिंह कुशवाह, देवेंद्र राठौर, महेंद्र आर्य और ब्रजेश श्रीवास ने निगम प्रशासन पर सीधे-सीधे परिषद की अवहेलना का आरोप लगाया, जिससे सदन में हंगामा तेज हो गया।

आप कौन हैं, अफसरों के रवैये पर फूटा गुस्सा
हंगामे के बीच सत्तापक्ष की पार्षद अनीता धाकड़, चांदनी चौहान और विपक्षी पार्षद मोहित जाट ने जोन-16 की क्षेत्राधिकारी प्रगति गोस्वामी और अनीता, शाकिल,दीपक मांझी ने जोन-02 पर पदस्थ जेडओ तनुजा वर्मा के व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाए। पार्षदों का कहना था कि जनप्रतिनिधियों से बात करने का तरीका बेहद अपमानजनक है, काम कहने पर जवाब मिलता है यह मेरा काम नहीं है। नेता प्रतिपक्ष हरिपाल ने सदन में सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि जब उन्होंने एक क्षेत्राधिकारी को फोन कर अपना परिचय दिया, तो जवाब मिला आप कौन हैं, यह सुनते ही सदन में शोर-शराबा और आक्रोश चरम पर पहुंच गया।

दोनों जेडओ का वेतन रोको और जांच कराओ
बढ़ते हंगामे के बीच सभापति ने हस्तक्षेप करते हुए निगमायुक्त संघप्रिय को स्पष्ट निर्देश दिए कि परिषद में पूर्व में पारित सभी ठहरावों का अक्षरश: पालन किया जाए। साथ में कोई पद खाली है तो वहां व्यवस्था करें एवं नेता प्रतिपक्ष हरिपाल, विधायक प्रतिनिधि कृष्ण राव दीक्षित के सुझावों को शामिल करते हुए निगमायुक्त कार्रवाई करें तथा क्षेत्राधिकारी प्रगति गोस्वामी एवं तनुजा वर्मा जहां जहां पदस्थ रहीं है वहां कितने बिल बनाए है उनकी पुस्तिकाओं की जांच निगमायुक्त स्वयं करें या संबंधित अधिकारी से जांच कराई जाए और जांच पूरी होने तक दोनों अधिकारियों का वेतन रोका जाए।

बैठक के बाद भी जारी रहा धरना,बृजेश के साथ मोहित डटे
पानी और सीवर के मुद्दे पर चर्चा के दौरान पार्षद देवेंद्र राठौर ने पूर्व में उठाए गए सवालों पर रिपोर्ट न आने पर नाराजगी जताते हुए आसंदी के सामने धरना दे दिया। इससे पहले ब्रजेश श्रीवास भी पदेन व्यवस्था को लेकर धरने पर बैठे रहे और कार्रवाई की स्पष्ट समय-सीमा तय करने की मांग करते रहे। बैठक समाप्त होने के बाद भी ब्रजेश का धरना खत्म नहीं हुआ और शाम को उसमें मोहित सहित दो अन्य पार्षद भी शामिल हुए।

स्ट्रीट लाइट पर पहली बार राहत
लगातार हंगामे के बीच एजेंडे के बिंदु क्रमांक-3 स्ट्रीट लाइट व्यवस्था पर चर्चा में पहली बार सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षद संतुष्ट नजर आए। पार्षदों ने माना कि विद्युत विभाग के सुधारों से हालात पहले से बेहतर हुए हैं। सभापति ने शेष समस्याओं पर भी तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

सीवर-पानी पर फिर तनाव, अगली बैठक में रिपोर्ट
सीवर और पानी पर चर्चा शुरू होते ही सदन में फिर तल्खी बढ़ गई। एमआईसी सदस्य विनोद यादव माठू ने तो यहां तक कह दिया कि हालात ऐसे हैं कि अब स्वर्णरेखा के चैंबर में डूबकर मरना पड़ेगा। इसके बाद सभापति ने निर्देश दिए कि सीवर-पानी के काम ठेका प्रथा या विभागीय व्यवस्था से कराने को लेकर आयुक्त स्पष्ट निर्णय के साथ विस्तृत रिपोर्ट अगली बैठक में पेश की जाए।जिससे आम नागरिकों को गंदे पानी एवं सीवर की समस्या से राहत मिले।

इन बिंदूओं पर यह हुआ निर्णय
-बिंदु चार में निगम व पीएचई से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को पुन: निगम में संविदा पर रखे जाने पर चर्चा पर आयुक्त को निर्देश दिए कि वह निगम हित ध्यान में रखते हुए शासन के आदेश का पालन करें।
-बिंदु 5 में निगम कर्मचारी की मृत्यु पर उनके परिजनों को आउटसोर्स के माध्यम से नौकरी पर रखा जाए तथा पूर्व में भी अगर किसी विनियमित कर्मचारी की मृत्यु हो चुकी है तो उनको भी इसमें शामिल किया जाए।

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