बांका जिले के किसानों के लिए उद्यान विभाग लगातार नई-नई योजनाओं को धरातल पर उतार रहा है। इसी कड़ी में अब जिले में प्लास्टिक मल्चिंग (प्लास्टिक पलवार बिछाने) तकनीक के माध्यम से बागवानी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सफल रही इस तकनीक को अब बांका जिले के सभी 11 प्रखंडों में लागू करने की तैयारी की जा रही है। बागान मालिकों को किया जाएगा जागरूक उद्यान विभाग द्वारा ग्राम स्तर पर किसानों और बागान मालिकों को इस तकनीक के प्रति जागरूक किया जाएगा। प्लास्टिक मल्चिंग विधि से खेती करने पर किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त होता है। इस तकनीक से मिट्टी में नमी बनी रहती है, खरपतवार कम उगते हैं, कीट प्रकोप घटता है और फसलों की गुणवत्ता एवं पैदावार में वृद्धि होती है। बागवानी फसलों की खेती करने वाले किसानों को इस योजना के तहत बिहार सरकार के उद्यान निदेशालय (हॉर्टिकल्चर बिहार) के माध्यम से अनुदान भी दिया जाएगा। किसानों को ऑनलाइन करना होगा आवेदन योजना के अंतर्गत किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। बांका जिले को कुल 100 हेक्टेयर का लक्ष्य दिया गया है। इसमें एक किसान को न्यूनतम 50 डिसमिल तथा अधिकतम दो हेक्टेयर तक क्षेत्रफल के लिए लाभ मिलेगा। आवेदन पूरी तरह से ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक विभिन्न मौसमों में अलग-अलग फसलों के लिए उपयोगी साबित होती है। रबी मौसम (अक्टूबर से फरवरी) में टमाटर, फूलगोभी,पत्तागोभी,ब्रोकली,मटर,गाजर, मूली, चुकंदर,प्याज और लहसुन की खेती में यह तकनीक काफी कारगर है। वहीं खरीफ मौसम (जून से सितंबर)में लौकी, नेनुआ, करैला, भिंडी, तोरई,परवल और मिर्च की खेती में इससे अच्छा लाभ मिलता है। जायद मौसम (फरवरी से मई) में खीरा, खरबूजा,तरबूज और ककड़ी जैसी फसलों में तेज गर्मी के दौरान नमी संरक्षण के लिए यह तकनीक बेहद उपयोगी मानी जाती है। प्रति हेक्टेयर 40 हजार रुपए की लागत निर्धारित सहायक निदेशक उद्यान दिवाकर भारती ने बताया कि प्लास्टिक मल्चिंग योजना के तहत प्रति हेक्टेयर कुल लागत 40 हजार रुपये निर्धारित की गई है। इसमें से 50 प्रतिशत यानी 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान राज्य सरकार की ओर से दिया जाएगा, जबकि शेष 20 हजार रुपये किसान को स्वयं खर्च करने होंगे। बांका जिले के किसानों के लिए उद्यान विभाग लगातार नई-नई योजनाओं को धरातल पर उतार रहा है। इसी कड़ी में अब जिले में प्लास्टिक मल्चिंग (प्लास्टिक पलवार बिछाने) तकनीक के माध्यम से बागवानी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सफल रही इस तकनीक को अब बांका जिले के सभी 11 प्रखंडों में लागू करने की तैयारी की जा रही है। बागान मालिकों को किया जाएगा जागरूक उद्यान विभाग द्वारा ग्राम स्तर पर किसानों और बागान मालिकों को इस तकनीक के प्रति जागरूक किया जाएगा। प्लास्टिक मल्चिंग विधि से खेती करने पर किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त होता है। इस तकनीक से मिट्टी में नमी बनी रहती है, खरपतवार कम उगते हैं, कीट प्रकोप घटता है और फसलों की गुणवत्ता एवं पैदावार में वृद्धि होती है। बागवानी फसलों की खेती करने वाले किसानों को इस योजना के तहत बिहार सरकार के उद्यान निदेशालय (हॉर्टिकल्चर बिहार) के माध्यम से अनुदान भी दिया जाएगा। किसानों को ऑनलाइन करना होगा आवेदन योजना के अंतर्गत किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। बांका जिले को कुल 100 हेक्टेयर का लक्ष्य दिया गया है। इसमें एक किसान को न्यूनतम 50 डिसमिल तथा अधिकतम दो हेक्टेयर तक क्षेत्रफल के लिए लाभ मिलेगा। आवेदन पूरी तरह से ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक विभिन्न मौसमों में अलग-अलग फसलों के लिए उपयोगी साबित होती है। रबी मौसम (अक्टूबर से फरवरी) में टमाटर, फूलगोभी,पत्तागोभी,ब्रोकली,मटर,गाजर, मूली, चुकंदर,प्याज और लहसुन की खेती में यह तकनीक काफी कारगर है। वहीं खरीफ मौसम (जून से सितंबर)में लौकी, नेनुआ, करैला, भिंडी, तोरई,परवल और मिर्च की खेती में इससे अच्छा लाभ मिलता है। जायद मौसम (फरवरी से मई) में खीरा, खरबूजा,तरबूज और ककड़ी जैसी फसलों में तेज गर्मी के दौरान नमी संरक्षण के लिए यह तकनीक बेहद उपयोगी मानी जाती है। प्रति हेक्टेयर 40 हजार रुपए की लागत निर्धारित सहायक निदेशक उद्यान दिवाकर भारती ने बताया कि प्लास्टिक मल्चिंग योजना के तहत प्रति हेक्टेयर कुल लागत 40 हजार रुपये निर्धारित की गई है। इसमें से 50 प्रतिशत यानी 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान राज्य सरकार की ओर से दिया जाएगा, जबकि शेष 20 हजार रुपये किसान को स्वयं खर्च करने होंगे।


