India-US Trade Deal: लैपटॉप से ​​लेकर डेयरी उत्पादों तक…जानें भारत में क्या-क्या होगा सस्ता

India-US Trade Deal: लैपटॉप से ​​लेकर डेयरी उत्पादों तक…जानें भारत में क्या-क्या होगा सस्ता

India-US Trade Deal: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत करने के बाद व्यापार समझौते को लेकर जानकारी शेयर की। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने भारत के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति जताई है। इसके साथ ही उन्होंने भारत पर लागू टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले को दोनों देशों के रिश्तों में बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।

मोदी ने ट्रंप का किया धन्यवाद

डील के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राष्ट्रपति ट्रंप का धन्यवाद किया है। वहीं अमेरिका का कहना है कि यह समझौता तब संभव हुआ जब भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद करने का फैसला लिया।

भारत में क्या सस्ता हो सकता है?

इस समझौते के बाद भारत में आयातित अमेरिकी वस्तुओं की खुदरा कीमतों में गिरावट देखी जा सकती है। डेयरी उत्पाद, दालें और पैकेज्ड फूड आइटम्स की कीमतों में कमी हो सकती है। 

इसके अलावा लैपटॉप, गैजेट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे तकनीकी हार्डवेयर और कंपोनेंट्स की कीमतें भी गिर सकती हैं। इसके अतिरिक्त, आयात संबंधी खर्चों में कमी आने से प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, पैकेटबंद सामान और घरेलू उपकरण जैसे उपभोक्ता उत्पादों की सामर्थ्य में सुधार हो सकता है।

अमेरिका में क्या होंगे भारतीय प्रोडक्ट सस्ते?

टैरिफ में कटौती से भारत के कई क्षेत्रों को सीधा फायदा हो सकता है। कपड़ा और परिधान उद्योग में अमेरिका में सामान की लैंडेड कॉस्ट घटेगी, जिससे भारतीय उत्पाद ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे और निर्यातकों को बेहतर बाजार पहुंच मिलेगी। आभूषणों के निर्यात को भी मजबूती मिलेगी, क्योंकि भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में और ज्यादा किफायती और आकर्षक होंगे।

इसके अलावा इस्पात, रसायन, इंजीनियरिंग सामान जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को भी कम व्यापारिक बाधाओं और आसान बाजार पहुंच का फायदा मिलेगा, जिससे निर्यात बढ़ने की संभावना है।

क्या अभी भी महंगा रहेगा?

हालांकि कई श्रेणियों के उत्पाद अधिक किफायती होने वाले हैं, लेकिन मौजूदा शुल्क संरचनाओं के कारण कुछ महत्वपूर्ण औद्योगिक उत्पाद महंगे बने रह सकते हैं। 

इस्पात, एल्युमीनियम और तांबा – अमेरिका में धारा 232 के तहत शुल्क लगभग 50% पर बना हुआ है और इन्हें प्रवेश के लिए उच्च बाधाओं का सामना करना पड़ेगा।

इसी प्रकार, सीमित टैरिफ छूट के कारण कुछ ऑटो घटकों पर टैरिफ अभी भी लगभग 25% हो सकता है।

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